किसान-युवा-महिलाओं के लिए बड़े ऐलान… लेकिन जमीन पर क्या होगा?”

डॉ. विनय प्रकाश तिवारी, SEBI पंजीकृत निवेश सलाहकार एवं
फाउंडर – Daddy’s International School, विशुनपुरा कांटा (चंदौली, यूपी)
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क लखनऊ/उत्तर प्रदेश।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा प्रस्तुत वित्तीय वर्ष 2026-27 का ₹9.12 लाख करोड़ का विशाल बजट राज्य की अब तक की सबसे बड़ी आर्थिक रूपरेखाओं में से एक माना जा रहा है। बजट में विकास, बुनियादी सुविधाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और रोजगार के बड़े-बड़े दावे किए गए हैं। लेकिन आम नागरिक, किसान, युवा और छोटे निवेशक के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है—क्या यह बजट वाकई उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को बदल पाएगा या फिर यह आंकड़े केवल कागजों और भाषणों तक सीमित रह जाएंगे?
कबड्डी न्यूज़ पोर्टल मॉडल में तैयार यह विशेष रिपोर्ट बजट के हर महत्वपूर्ण पहलू का गहराई से विश्लेषण करती है—ताकि जनता समझ सके कि इन घोषणाओं का असली असर क्या हो सकता है।

बजट का आकार और सरकार की प्राथमिकताएँ: विकास की बड़ी तस्वीर
राज्य सरकार ने इस बार ₹9.12 लाख करोड़ का बजट पेश करके साफ संकेत दिया है कि वह विकास और इंफ्रास्ट्रक्चर पर बड़े पैमाने पर निवेश करना चाहती है। यह बजट पिछले वर्षों की तुलना में अधिक महत्वाकांक्षी माना जा रहा है।
सरकार का दावा है कि ग्रामीण विकास, शहरी सुविधाओं, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े बदलाव किए जाएंगे। विशेषज्ञों के अनुसार, बजट का आकार बड़ा होना सकारात्मक संकेत है, लेकिन असली सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि योजनाओं का क्रियान्वयन कितनी तेजी और पारदर्शिता से होता है।


ग्रामीण विकास और बुनियादी सुविधाएँ: क्या गांवों तक पहुँचेगा बदलाव?
ग्रामीण इलाकों के लिए सरकार ने कई बड़े प्रावधान किए हैं।
- हर घर नल योजना के लिए ₹22,676 करोड़
- पंचायत भवन, डिजिटल लाइब्रेरी और ग्रामीण स्टेडियम के लिए ₹32,090 करोड़
- सड़कों और पुलों के निर्माण व चौड़ीकरण के लिए ₹34,468 करोड़
ये योजनाएँ ग्रामीण जीवन की गुणवत्ता सुधारने के लिए अहम मानी जा रही हैं। गांवों में पानी, सड़क और डिजिटल सुविधाएँ मिलने से शिक्षा, व्यापार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच आसान हो सकती है।
हालांकि, पिछली परियोजनाओं में देरी और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इसलिए जनता के बीच यह संशय भी है कि क्या इस बार योजनाएँ समय पर पूरी होंगी।


किसानों के लिए बजट: उम्मीदें बड़ी, चुनौतियाँ भी कम नहीं
राज्य की अर्थव्यवस्था में कृषि का अहम योगदान है। बजट में
- कृषि योजनाओं के लिए ₹10,888 करोड़
- सिंचाई व जल संसाधन के लिए ₹18,290 करोड़
का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने डीबीटी के माध्यम से किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने पर जोर दिया है। बताया गया कि पिछले वर्षों में ₹94,668 करोड़ सीधे खातों में भेजे गए।
विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सिंचाई परियोजनाएँ समय पर पूरी होती हैं तो उत्पादन में बड़ा सुधार हो सकता है। लेकिन किसानों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि योजनाएँ जमीन तक पहुंचे और उन्हें समय पर पानी, बीज और बाजार मिल सके।

शिक्षा और युवाओं के सपने: ट्रेनिंग, टैबलेट और रोजगार के वादे
युवाओं को ध्यान में रखते हुए बजट में शिक्षा और कौशल विकास पर जोर दिया गया है।
- मेडिकल शिक्षा के लिए ₹14,997 करोड़
- स्वास्थ्य क्षेत्र में ₹37,956 करोड़ की बढ़ोतरी
- पांच वर्षों में 9.25 लाख युवाओं को ट्रेनिंग और 4.22 लाख को रोजगार देने का लक्ष्य
- “डिजिटल यूपी” के तहत 49 लाख से अधिक टैबलेट/स्मार्टफोन वितरण
सरकार का मानना है कि डिजिटल शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। हालांकि कई विशेषज्ञों का कहना है कि केवल गैजेट वितरण से रोजगार नहीं बनता, बल्कि उद्योगों का विस्तार और रोजगार सृजन नीतियाँ ज्यादा जरूरी हैं।
महिलाओं की भागीदारी और सामाजिक सशक्तिकरण
बजट में महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण पर भी जोर दिया गया है।
- मिशन शक्ति और बीसी सखी योजना के तहत 39,880 महिलाएँ सक्रिय
- स्वयं सहायता समूहों द्वारा 39,000 करोड़ से अधिक का लेन-देन
ये योजनाएँ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद कर सकती हैं। महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से परिवारों की आय और सामाजिक स्थिति में सुधार देखने को मिल सकता है।
हालांकि सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि केवल आर्थिक योजनाएँ ही नहीं, बल्कि सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को भी मजबूत करना जरूरी है।
उद्योग और रोजगार: निजी क्षेत्र को कितना फायदा?
बजट में उद्योग और रोजगार के लिए भी प्रावधान किए गए हैं—
- उद्योग व अधोसंरचना विकास के लिए ₹27,103 करोड़
- MSME सेक्टर के लिए ₹3,822 करोड़
- आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए ₹2,059 करोड़
सरकार का दावा है कि इससे निवेश बढ़ेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
इसके अलावा 2.19 लाख पुलिस पदों पर भर्ती और युवा काउंसिलिंग कार्यक्रम भी घोषित किए गए हैं।
फिर भी निजी नौकरी करने वालों के लिए सीधे लाभ कम दिखने की बात विशेषज्ञ मानते हैं। रोजगार सृजन का असली असर उद्योगों की स्थापना और बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: क्या बदलेगी आम आदमी की चिकित्सा व्यवस्था?
स्वास्थ्य बजट में बढ़ोतरी को सरकार की बड़ी उपलब्धि बताया जा रहा है। नए मेडिकल कॉलेज, अस्पतालों का विस्तार और आधुनिक उपकरणों की खरीद की योजना है।
यदि ये योजनाएँ सफल होती हैं तो ग्रामीण और छोटे शहरों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहतर हो सकती है। लेकिन स्वास्थ्य क्षेत्र में स्टाफ की कमी, उपकरणों की खराबी और प्रबंधन की समस्याएँ पहले से मौजूद हैं, जिन्हें दूर करना जरूरी होगा।

डिजिटल और इंफ्रास्ट्रक्चर: भविष्य की तैयारी या सिर्फ घोषणाएँ?
डिजिटल यूपी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर भारी निवेश भविष्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाईवे, स्मार्ट सिटी, डिजिटल सेवाएँ और ऑनलाइन गवर्नेंस सिस्टम प्रशासन को अधिक पारदर्शी बना सकते हैं।
लेकिन डिजिटल योजनाओं की सफलता के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी, साइबर सुरक्षा और डिजिटल साक्षरता भी जरूरी है—जो अभी कई ग्रामीण क्षेत्रों में चुनौती बनी हुई है।
आम नागरिक की नजर से बजट: उम्मीद और संशय दोनों
बजट के बड़े आंकड़े सुनकर जनता में उत्साह भी है और सवाल भी। लोग उम्मीद कर रहे हैं कि गांवों में सड़कें बनेंगी, अस्पताल सुधरेंगे और युवाओं को नौकरी मिलेगी। लेकिन पिछले अनुभवों के कारण कई लोग यह भी सोच रहे हैं कि कहीं योजनाएँ अधूरी न रह जाएँ।
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बजट की असली सफलता उसके क्रियान्वयन पर निर्भर करती है। अगर योजनाएँ समय पर पूरी हों और भ्रष्टाचार कम हो तो आम आदमी की जिंदगी में वास्तविक बदलाव संभव है।
विश्लेषण: किसे क्या फायदा हो सकता है?
- किसान: सिंचाई और डीबीटी योजनाओं से राहत मिल सकती है
- युवा: ट्रेनिंग और डिजिटल शिक्षा से नए अवसर मिल सकते हैं
- महिलाएँ: स्वयं सहायता समूह और वित्तीय योजनाएँ मददगार
- व्यापारी और निवेशक: इंफ्रास्ट्रक्चर और उद्योग निवेश से लाभ
- आम नागरिक: सड़क, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की उम्मीद
क्या सच में बदलेगी जिंदगी?
यूपी बजट 2026-27 आकार और घोषणाओं के लिहाज से महत्वाकांक्षी है। इसमें विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार को लेकर कई सकारात्मक पहलें दिखाई देती हैं। लेकिन असली बदलाव तभी होगा जब योजनाएँ जमीन पर उतरें, समय पर पूरी हों और जनता तक उनका लाभ पहुंचे।
आम नागरिकों को केवल घोषणाओं पर भरोसा करने के बजाय जागरूक रहना होगा—सरकारी योजनाओं का लाभ लेना होगा और जरूरत पड़ने पर सवाल भी पूछने होंगे। तभी यह ₹9.12 लाख करोड़ का बजट कागजों से निकलकर लोगों की जिंदगी में वास्तविक परिवर्तन ला सकेगा।







