✍️ Khabari News | Editor-in-Chief K.C. Shrivastava (Advocate)
चकिया (चंदौली)।
थिंकर्स एवोल्यूशन्स फाउंडेशन ट्रस्ट ने ग्राम सभा में ऐसा जागरूकता अभियान चलाया, जिसने गांव की आत्मा को झकझोर दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्थापक करुणेश पांडेय ने की। मंच पर पहुंचे हर वक्ता ने एक ही सवाल दागा – “क्या हम अपने बच्चों का भविष्य शराब और गंदगी में डूबने देंगे?”



???? मुद्दा जो सबसे बड़ा है – शराब का ज़हर
अभियान की शुरुआत ग्रामीण महिलाओं के दर्द से हुई। उन्होंने कहा कि शराब परिवार की नींव को खोखला कर रही है।
- पति की कमाई शराब में बह जाती है।
- घर की जरूरतें अधूरी रह जाती हैं।
- बच्चों की पढ़ाई बीच में छूट जाती है।
- घर में कलह, हिंसा और टूटन बढ़ जाती है।
????️ एक महिला ने भावुक होकर कहा –
“साहब, शराब ने हमारे घर की रोटी छीन ली है। हमारे बच्चे भूखे सो जाते हैं, लेकिन शराब की दुकान रोज़ चमक रही है।”
शराब केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए खतरा है। वक्ताओं ने बताया कि यह आर्थिक, सामाजिक और मानवीय क्षति पूरे परिवार को अंधेरे में धकेल देती है।
???? अवैध मांस की दुकानें – बीमारी का अड्डा
दूसरा बड़ा मुद्दा था सड़कों पर चल रही अवैध मांस की दुकानें।

- गांव के बीचों-बीच गंदगी फैली रहती है।
- मक्खी-मच्छर और दुर्गंध से लोग बीमार पड़ते हैं।
- स्वच्छता मिशन की धज्जियां उड़ रही हैं।
???? विशेषज्ञों ने चेतावनी दी –
“इस तरह की गंदगी से डेंगू, हैजा और इंफेक्शन जैसी बीमारियाँ फैलती हैं।”



???? बच्चों पर सबसे बड़ा संकट
वक्ताओं का कहना था कि इस जहरीले माहौल का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ रहा है।

- उनका शरीर कमजोर हो रहा है।
- मानसिक विकास रुक रहा है।
- खेल और पढ़ाई से उनका ध्यान भटक रहा है।
????️ एक शिक्षक ने कहा –
“बच्चों के कोमल तंतु ऐसे माहौल से टूट जाते हैं। उनका भविष्य बर्बाद हो रहा है और आने वाली पीढ़ियाँ खतरे में हैं।”
✊ बदलाव की गूंज – करुणेश पांडेय का संदेश
अभियान के अंत में संस्थापक करुणेश पांडेय ने जोरदार अपील की।
➡️ उन्होंने कहा –
“गांव की ताकत उसकी एकता है। अगर हम सब मिलकर ठान लें कि नशा और गंदगी को गांव से बाहर करना है, तो कोई ताकत हमें रोक नहीं सकती। आइए, मिलकर अपनी ग्राम सभा को स्वच्छ, सुरक्षित और स्वस्थ बनाएं।”
???? सोशल मीडिया पर सवालिया अंदाज़
इस अभियान की चर्चा गांव से निकलकर सोशल मीडिया तक पहुंची। लोग एक-दूसरे से सवाल पूछ रहे हैं –
- क्या आप अपने बच्चों का भविष्य शराब में डूबते देख सकते हैं❓
- क्या आप चाहेंगे कि आपके गांव की पहचान गंदगी और बीमारी से हो❓
- कब तक हम चुप रहेंगे और सिस्टम को जिम्मेदार नहीं ठहराएंगे❓
???? सोशल मीडिया रिएक्शन
???? कई युवाओं ने लिखा – “अब समय आ गया है, हम गांव के लिए खड़े हों।”
???? महिलाओं ने कहा – “हम हर हाल में नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगे।”
???? बुजुर्ग बोले – “गांव तभी बचेगा जब नई पीढ़ी को सही माहौल मिलेगा।”
???? बदलाव की शुरुआत यहीं से
इस अभियान से एक बात साफ हो गई –
गांव बदलना है तो शुरुआत गांव के लोगों को ही करनी होगी।
- शराब की दुकानें बंद करने की मांग उठानी होगी।
- अवैध मांस की दुकानों पर प्रशासन से कार्रवाई करानी होगी।
- बच्चों को स्वच्छ माहौल देने की जिम्मेदारी उठानी होगी।
???? निष्कर्ष – गांव की हुंकार
ग्राम सभा का यह अभियान केवल एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक आंदोलन की शुरुआत है। यह आवाज़ अब थमने वाली नहीं है।
????️ आखिरी पंक्ति में हर ग्रामीण की गूंज यही थी –
“हम नशा-मुक्त और स्वच्छ गांव बनाएंगे, अपने बच्चों का भविष्य सुरक्षित रखेंगे।”
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