???? भूमिका – एक ऐतिहासिक दिन
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चंदौली…
बुधवार की दोपहर, नगर के एक प्रतिष्ठित होटल का सभागार पत्रकारों और समाजसेवियों से खचाखच भरा हुआ था। बाहर हल्की-हल्की बारिश हो रही थी, और भीतर वातावरण में एक अनकही उम्मीद की गूंज। हर आंख में उत्सुकता थी, हर दिल में एक सवाल – आज पत्रकारिता का भविष्य किस दिशा में मुड़ेगा? कौन होगा वह नेतृत्वकर्ता जो चंदौली के कलमकारों की आवाज़ को नई धार देगा?
और तभी… मंच पर दीप प्रज्वलित हुआ। मशाल जल उठी।
सहायक कमांडेंट संजय कुमार तिवारी ने जैसे ही शपथ की औपचारिक शुरुआत की, सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। उस पल ऐसा लगा मानो चंदौली की पत्रकारिता एक नई यात्रा पर निकल पड़ी है।



✨ नेतृत्व का ताज – अमरेंद्र पांडेय के सिर
घोषणा हुई—
???? “अमरेंद्र पांडेय, अध्यक्ष!”
मंच पर खड़े अमरेंद्र पांडेय की आंखों में चमक थी, चेहरे पर आत्मविश्वास की आभा और दिल में जिम्मेदारी का बोझ।
क्योंकि यह सिर्फ एक पद नहीं था।
यह थी पत्रकारिता की साख। यह थी सैकड़ों पत्रकारों की उम्मीदों का ताज।
जब तालियों की गूंज उनके स्वागत में उठी, तो पूरा माहौल भावनाओं से भर गया। पत्रकारिता की कसमों, संघर्षों और त्यागों की यादें हर किसी की आंखों के सामने तैर गईं।
⚡ ब्रजेश कुमार – महामंत्री के रूप में नया जोश
वहीं, जब ब्रजेश कुमार के नाम का ऐलान हुआ महामंत्री पद के लिए, तो युवाओं में उत्साह की लहर दौड़ गई।
उनकी संगठन क्षमता, ऊर्जा और दूरदर्शिता को हर कोई जानता है। पत्रकारों की कतार में खड़े साथी मुस्कुरा उठे – “अब संगठन के पास वो जज़्बा है, जो पुरानी जड़ों और नए सपनों को साथ जोड़ देगा।”

???? कार्यकारिणी का गठन – एक से बढ़कर एक हस्तियां
उपाध्यक्ष बने राजीव कुमार जायसवाल, सचिव बने संदीप कुमार निगम, कोषाध्यक्ष बने कृष्ण मोहन गुप्ता।
लेकिन असली रोमांच तो तब आया जब कार्यकारिणी के नामों का ऐलान हुआ –
आनंद प्रताप सिंह, सरदार महेंद्र सिंह, कमलेश तिवारी, पवन तिवारी, आशाराम यादव, कृष्णकांत गुप्ता, करूणापति तिवारी, संजीव पाठक, सूर्य प्रकाश सिंह…
हर नाम अपने आप में एक किताब, हर हस्ती अपने आप में पत्रकारिता का एक अध्याय।




???? शपथ ग्रहण की शांति में छिपी गूंज
सहायक कमांडेंट संजय कुमार तिवारी की आवाज़ गूंजी –
“मैं सत्य का पक्षधर रहूंगा… मैं पत्रकारिता की गरिमा को बनाए रखूंगा… मैं कलम की नोक से समाज का आईना बनूंगा…”
जैसे-जैसे शपथ के शब्द मंच से निकलकर सभागार में गूंजते, दर्शकों का दिल जोर-जोर से धड़कने लगता। उस पल लगा मानो पूरा हॉल एक परिवार बन गया है—एक ऐसा परिवार, जो सच को ताक़त और आवाज़ को हौसला देगा।
???? अमरेंद्र पांडेय का भावुक संबोधन – पत्रकारों के हित सर्वोपरि
अमरेंद्र पांडेय ने जैसे ही माइक संभाला, सन्नाटा छा गया। हर कान, हर नजर बस उनकी ओर टिक गई।
उन्होंने कहा—
???? “दोस्तों, आज देश भर के मीडिया हाउस रिक्तियों से भरे पड़े हैं। लेकिन योग्य पत्रकारों की कमी है। इसका कारण है – भाषा, लेखन और प्रस्तुतिकरण की कमी। हम इसे बदलेंगे। चंदौली प्रेस क्लब अब सिर्फ संगठन नहीं रहेगा, यह होगा Journalism Training Hub।”
तालियों की गूंज से दीवारें कांप उठीं।
जैसे ही उन्होंने घोषणा की कि क्लब नियमित प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन करेगा, हर चेहरे पर उम्मीद की रौशनी चमक उठी।

???? मुख्य अतिथि का संदेश – नई सोच की मिसाल
मुख्य अतिथि संजय कुमार तिवारी ने कहा—
???? “चंदौली प्रेस क्लब का यह संकल्प नई दिशा देगा। जिस संगठन में प्रशिक्षण और आत्ममंथन की परंपरा हो, वहां पत्रकारिता कभी कमजोर नहीं हो सकती।”
उनकी यह पंक्तियां जैसे पत्रकारों के दिलों में ईंधन भर गईं।
???? विशिष्ट अतिथियों का आशीर्वाद
गुरुद्वारा कमेटी के प्रधान रंजीत सिंह और नीमा अध्यक्ष डॉ. ओपी सिंह ने भी मंच से आशीर्वाद दिया।
उन्होंने कहा—
???? “पत्रकार सिर्फ खबर नहीं लिखते, वे समाज का इतिहास रचते हैं। चंदौली प्रेस क्लब इस इतिहास को सुनहरी स्याही से लिखेगा।”
???? ड्रामा और सस्पेंस – मंच संचालन की कलाकारी
जब पवन कुमार तिवारी ने मंच संचालन किया, तो हर घोषणा पर तालियों की बौछार होती।
कभी गंभीर, कभी मज़ाकिया, कभी भावुक – उनके शब्दों ने पूरे समारोह को बांधे रखा।
और अंत में जब सूर्य प्रकाश सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन दिया, तो ऐसा लगा जैसे पूरी कहानी का परफेक्ट क्लाइमेक्स हो गया हो।
????️ पत्रकारिता की नई सुबह का वादा
समारोह में मौजूद थे –
कृष्ण मुरारी मिश्र, सुनील कुमार, मनीष द्विवेदी, सतीश जिंदल, बृजभूषण मिश्र, रेनू सिंह, सतनाम सिंह, दुर्गेश पांडेय, हरिओम आनंद, शशांक शेखर पांडेय,कार्तिकेय , नितिन गोस्वामी…
हर शख्सियत इस बात की गवाह बनी कि आज चंदौली प्रेस क्लब सिर्फ गठन नहीं था, यह था एक आंदोलन का जन्म।
???? एपिक क्लोजिंग – जब दीप बुझा, पर उजाला बाकी रहा
जब कार्यक्रम समाप्त हुआ और दीप की लौ धीरे-धीरे मंद हुई, तो भी आंखों में चमक और दिलों में आग बाकी रही।
हर पत्रकार ने महसूस किया –
???? आज हमने सिर्फ पदाधिकारियों का चुनाव नहीं किया, बल्कि अपनी कलम को नया हथियार, अपने हक को नया कवच और अपने भविष्य को नया रास्ता दिया है।
???? संपादकीय टिप्पणी – Editor-in-Chief, K.C. Shrivastava (Advocate)
“यह शपथ ग्रहण केवल पदभार ग्रहण नहीं था। यह था पत्रकारिता की आत्मा को जीवित रखने का संकल्प। अमरेंद्र पांडेय और ब्रजेश कुमार की टीम जिस राह पर निकली है, वह सिर्फ चंदौली नहीं, बल्कि पूरे पूर्वांचल की पत्रकारिता को दिशा देगी। आज यह दीप जला है, कल यह मशाल बनेगा और आने वाले समय में यह तूफ़ान रचेगा।”
???? यह महज़ एक कार्यक्रम नहीं था, यह था पत्रकारिता की क्रांति का आरंभ।
???? यह सिर्फ पदों का बंटवारा नहीं था, यह था जिम्मेदारियों का प्रण।
???? यह सिर्फ शपथ नहीं थी, यह था समाज के सच को लिखने का व्रत।
⚡ कहानी अभी शुरू हुई है… देखना है कि यह नया प्रेस क्लब कलम की धार से कितना इतिहास लिखता है!






















