

✍️ विशेष संवाददाता, खबरी न्यूज़ – संपादक-इन-चीफ के.सी. श्रीवास्तव (एडवोकेट)
✨ मुगलसराय का ऐतिहासिक दिन
चंदौली जनपद के लिए 23 सितंबर 2025 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर (मुगलसराय) के अलीनगर स्थित केंद्रीय विद्यालय के भव्य आडिटोरियम में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की 117वीं जयंती का आयोजन ऐसे हुआ मानो पूरा नगर एक सांस्कृतिक पर्व का हिस्सा बन गया हो।
जब मंच पर उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक पहुँचे तो सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। हर तरफ “दिनकर अमर रहें” और “जय हिंद” के स्वर गूंज रहे थे।

???? हेलीकॉप्टर से उतरते ही हुआ भव्य स्वागत
मा० उप मुख्यमंत्री का जनपद आगमन भी किसी महोत्सव से कम न था।
चकिया विधायक कैलाश आचार्य, पीडीडीयू नगर विधायक रमेश जायसवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह, जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग, पुलिस अधीक्षक आदित्य लांघे समेत तमाम जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों ने हेलीपैड पर पुष्पगुच्छ अर्पित कर स्वागत किया।
जनसमूह उमड़ पड़ा… हर किसी की आंखों में उत्साह, चेहरों पर गर्व और दिलों में उम्मीदें झलक रही थीं।



???? राष्ट्रकवि दिनकर – भारत की आत्मा की आवाज़
सभा को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने कहा –
“रामधारी सिंह दिनकर न केवल कवि थे बल्कि भारत की आत्मा की आवाज़ थे। उनकी कविताएं आज भी हर भारतीय के दिल में जोश और आत्मविश्वास जगाती हैं। वे संघर्ष के कवि थे, राष्ट्रवाद के कवि थे और जनमानस के कवि थे।”
दिनकर के जीवन, साहित्य और राष्ट्रप्रेम की चर्चा करते हुए उप मुख्यमंत्री भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि आज के समय में जब समाज विभाजनों से जूझ रहा है, हमें दिनकर के विचारों को आत्मसात करना चाहिए।
???? आभार प्रदर्शन – पूर्व केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय
कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय ने जनपद आगमन पर उप मुख्यमंत्री का आभार जताया और कहा कि दिनकर की रचनाओं ने युवाओं को जागरूक किया और भारत माता की स्वतंत्रता की लड़ाई में ऊर्जा भरी।


???? मंच पर गरिमामयी उपस्थिति
कार्यक्रम में मा० राज्यसभा सांसद श्रीमती दर्शना सिंह, सैयदराजा विधायक सुशील सिंह, चकिया विधायक कैलाश आचार्य, पीडीडीयू नगर विधायक रमेश जायसवाल, भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह समेत बड़ी संख्या में अधिकारीगण और जनता उपस्थित रही।
सभागार खचाखच भरा था। बाहर खड़े लोग भी मंचीय कार्यक्रम को सुनने के लिए बेसब्री से इंतजार करते रहे।

???? दिनकर की कविताओं का पाठ
कार्यक्रम में छात्रों व साहित्यकारों ने दिनकर की प्रसिद्ध रचनाओं का पाठ किया।
“सिंहासन खाली करो कि जनता आती है” जैसी पंक्तियां गूंजते ही श्रोताओं के रोंगटे खड़े हो गए।
विद्यार्थियों ने नृत्य-नाटिका के जरिए दिनकर के राष्ट्रवादी विचारों को जीवंत कर दिया।

????️ साहित्य और राष्ट्रवाद का संगम
पूरा आडिटोरियम मानो एक सांस्कृतिक तीर्थस्थल में बदल गया था।
दीवारों पर दिनकर की तस्वीरें सजी थीं, उनके जीवन परिचय को पोस्टर और प्रदर्शनी के जरिए दिखाया गया।
हर चेहरा गर्व से दमक रहा था कि वे उस भूमि पर खड़े हैं जहाँ दिनकर जैसे महापुरुष की याद में इतना विराट आयोजन हो रहा है।
✨ भावुक क्षण – जनता की आंखों में चमक
कार्यक्रम के दौरान कई बार ऐसा हुआ जब लोग भावुक हो उठे।
एक बुजुर्ग किसान ने कहा –
“हम दिनकर जी की कविताओं को सुनते-सुनते बड़े हुए हैं। आज उनके नाम पर उप मुख्यमंत्री जी का यहां आना हमारे लिए गर्व की बात है।”
महिलाओं ने भी पुष्प अर्पित कर राष्ट्रकवि को नमन किया।


???? दिनकर की प्रासंगिकता आज भी
कार्यक्रम में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि दिनकर केवल साहित्य के नहीं बल्कि सामाजिक न्याय और समानता के भी समर्थक थे।
उनकी कविताएं आज भी युवाओं को संघर्ष और ईमानदारी का पाठ पढ़ाती हैं।
???? उप मुख्यमंत्री का संदेश – “युवा अपनाएं दिनकर की राह”
अपने भाषण के अंत में उप मुख्यमंत्री ने कहा –
“युवाओं को दिनकर की कविताओं से प्रेरणा लेनी चाहिए। जिस साहस और तेजस्विता से उन्होंने लेखनी चलाई, उसी तरह हमें भी अपने जीवन में राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना चाहिए।”
सभागार तालियों से गूंज उठा और “भारत माता की जय” के नारे गूंजते रहे।
???? कार्यक्रम की विशेषताएं
- विद्यार्थियों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां।
- दिनकर की रचनाओं का सामूहिक पाठ।
- साहित्यकारों की भावनात्मक अभिव्यक्ति।
- भव्य स्वागत व पुष्पगुच्छ अर्पण।
- उप मुख्यमंत्री का प्रेरणादायी संबोधन।
???? निष्कर्ष – एक ऐतिहासिक आयोजन
23 सितंबर का दिन चंदौली की जनता के लिए गर्व और प्रेरणा का दिन बन गया।
यह आयोजन सिर्फ एक जयंती नहीं था, बल्कि यह संदेश था कि राष्ट्रकवि दिनकर की विरासत अमर है और रहेगी।
उप मुख्यमंत्री बृजेश पाठक की उपस्थिति ने इस आयोजन को और ऐतिहासिक बना दिया।
???? खबरी न्यूज़ मानता है कि ऐसे आयोजनों से नई पीढ़ी को सही दिशा और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा मिलती है।
राष्ट्रकवि दिनकर के शब्द आज भी गूंज रहे हैं –
“आओ फिर से दीया जलाएं…”






















