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???? खबरी न्यूज विशेष रिपोर्ट -नवरात्र और पर्यावरण: संस्कृति का संगम, प्रकृति का संदेश

✍️ एडिटर इन चीफ: एडवोकेट के. सी. श्रीवास्तव

खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क

SRVS Sikanderpur

???? नवरात्रि और पर्यावरण का गहरा रिश्ता

नवरात्रि भारत का सबसे महत्वपूर्ण और व्यापक पर्व है। यह केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति, समाज और पर्यावरण संरक्षण से भी जुड़ा हुआ है।
प्रकृति और शक्ति – दोनों ही जीवन के आधार हैं। मां दुर्गा की उपासना हमें आंतरिक ऊर्जा देती है, वहीं पर्यावरण हमें सांस लेने की शक्ति, जल और जीवन का आधार देता है। यही कारण है कि नवरात्रि और पर्यावरण एक-दूसरे के पर्याय कहे जा सकते हैं।

???? वृक्ष बंधु डॉ परशुराम सिंह की खास बातचीत

खबरी न्यूज के एडिटर इन चीफ एडवोकेट के. सी. श्रीवास्तव से खास बातचीत के दौरान प्रसिद्ध पर्यावरणविद् “वृक्ष बंधु डॉ परशुराम सिंह” (युनेस्को से ग्रीन गार्डियन वैरियर और लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से सम्मानित) ने स्पष्ट कहा:

???? “नवरात्रि का अर्थ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण और प्रकृति से जुड़ने का पर्व है। जिस तरह मां दुर्गा हमें जीवन देने वाली शक्ति हैं, उसी प्रकार पर्यावरण हमारी सांसों की डोर है। अगर हम नवरात्रि के वास्तविक संदेश को समझें, तो यह हमें प्रकृति की रक्षा करने की प्रेरणा देता है।”

???? धरती का बढ़ता तापमान और खतरे की घंटी

वृक्ष बंधु परशुराम सिंह ने जोर देकर कहा कि आज धरती का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ चुका है। ग्लोबल वार्मिंग पूरी मानवता के लिए संकट है।

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  • हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।
  • समुद्र का जलस्तर बढ़ने से तटीय शहर खतरे में हैं।
  • जंगलों की अंधाधुंध कटाई ने जैव-विविधता को संकट में डाल दिया है।

???? “धरती माता कराह रही है, नदियां सूख रही हैं, पेड़ गिर रहे हैं और हवा जहरीली हो रही है। यह सब हमारी लापरवाही का नतीजा है। नवरात्रि का संदेश यही है कि संतुलन बनाओ। भोग-विलास छोड़ो और प्रकृति को माता के रूप में पूजो।” – वृक्ष बंधु परशुराम सिंह

???? नवरात्रि के अनुष्ठानों में पर्यावरण का संदेश

नवरात्रि के हर अनुष्ठान में पर्यावरण का सीधा संबंध दिखता है –

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  • घट स्थापना: मिट्टी का कलश धरती माता का प्रतीक है।
  • जौ बोना: हरियाली और जीवन चक्र का प्रतीक है।
  • अखण्ड ज्योति: ऊर्जा, प्रकाश और सकारात्मकता का संदेश देती है।
  • पत्तों और फूलों का उपयोग: यह दर्शाता है कि प्रकृति ही हमारे उत्सव की आधारशिला है।

वृक्ष बंधु परशुराम सिंह कहते हैं – “हमारे पूर्वजों ने धार्मिक परंपराओं को पर्यावरण से जोड़ा ताकि हर पीढ़ी प्रकृति का सम्मान करना सीखे। नवरात्रि केवल पूजा नहीं, बल्कि पर्यावरण शिक्षा का पर्व भी है।”

⚖️ हाईकोर्ट का आदेश और सामाजिक शुद्धि

खबरी न्यूज की चर्चा के दौरान जब जातिसूचक रैलियों और आयोजनों पर हाईकोर्ट के आदेश पर राय मांगी गई, तो वृक्ष बंधु परशुराम सिंह ने कहा:

???? “यह ऐतिहासिक कदम है। जिस तरह हम नवरात्रि में आत्मशुद्धि और पर्यावरण शुद्धि का संकल्प लेते हैं, उसी तरह समाज को भी जातिवाद की गंदगी से शुद्ध करना जरूरी है। जातिसूचक रैलियां और कार्यक्रम समाज को तोड़ते हैं, जबकि हमें जोड़ने की जरूरत है।”

उन्होंने इसे “समाज सुधार का बड़ा कदम” करार दिया और कहा कि न्यायपालिका का यह संदेश हर नागरिक को आत्मसात करना चाहिए।

???? नवरात्रि और हरित संकल्प

आज की युवा पीढ़ी को नवरात्रि से यह सीख लेनी चाहिए कि –

  • एक पौधा लगाना ही सच्ची पूजा है।
  • नदियों और तालाबों की रक्षा करना ही सच्चा व्रत है।
  • प्लास्टिक और प्रदूषण से दूर रहना ही सच्चा त्याग है।

वृक्ष बंधु परशुराम सिंह कहते हैं –
???? “अगर हर नागरिक नवरात्रि में एक पौधा लगाए और उसकी देखभाल करे, तो आने वाले दस सालों में हम धरती को हरित और सुरक्षित बना सकते हैं।”

???? खबरी न्यूज का विश्लेषण

  • नवरात्रि केवल धर्म नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का भी पर्व है।
  • वृक्ष बंधु परशुराम सिंह जैसे पर्यावरण योद्धा हमें दिखाते हैं कि संस्कृति और प्रकृति का संगम कितना जरूरी है।
  • समाज को जातिवाद की संकीर्ण मानसिकता से निकालकर हरित भविष्य की ओर ले जाना होगा।

???? एडिटर इन चीफ K.C. श्रीवास्तव की चेतावनी

“अगर हमने वृक्ष बंधु परशुराम सिंह जैसे पर्यावरण योद्धाओं की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया तो आने वाली पीढ़ियां हमें कभी माफ नहीं करेंगी। नवरात्रि का असली संदेश है – शक्ति, शुद्धि और संतुलन। हमें जातिवाद से मुक्त होकर पर्यावरण और समाज दोनों की रक्षा करनी होगी। यही मानवता का धर्म है, यही भविष्य का रास्ता है।”

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