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????️ “भाई हो तो भरत जैसा…” — हेतिमपुर की कथा में भक्ति की बयार, श्रोताओं की आंखें हुईं नम

शिकारगंज क्षेत्र स्थित बाबा जागेश्वरनाथ हेतिमपुर में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा का आठवां दिवस बना भक्ति, समर्पण और त्याग की अनोखी मिसाल

(विशेष रिपोर्ट — Khabari News | संपादक-इन-चीफ: एडवोकेट के. सी. श्रीवास्तव)

चकिया (चंदौली):

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बाबा जागेश्वरनाथ धाम हेतिमपुर का माहौल गुरुवार की शाम कुछ ऐसा था मानो त्रेतायुग उतर आया हो।
चारों ओर घी के दीयों की झिलमिल रोशनी, पंडाल में गूंजता “जय श्रीराम”, और भक्तों के चेहरे पर अद्भुत शांति…
यही वह क्षण था जब जौनपुर से आए कथा व्यास पंडित रामेश्वरानंद जी महाराज ने अपने मधुर स्वर में भरत चरित्र की गाथा आरंभ की —

“भरत का प्रेम राम के चरणों में नहीं, उनके हृदय में बसा था…”

बस, फिर क्या था — पूरा पंडाल मौन हो गया, और माहौल में भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा।

???? उप जिलाधिकारी विनय कुमार मिश्रा ने दीप प्रज्वलित कर किया शुभारंभ

कार्यक्रम की शुरुआत उप जिलाधिकारी विनय कुमार मिश्रा ने अपने करकमलों से दीप प्रज्वलित कर की।
दीप की लौ के साथ जैसे ही भजन की धुन बजी — पूरा पंडाल “हर हर राम!” के उद्घोष से गूंज उठा।

एसडीएम मिश्रा ने कहा —

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“भरत का जीवन हमें सिखाता है कि त्याग ही सच्चा धर्म है।
आज जब रिश्ते स्वार्थ में उलझते जा रहे हैं, तब भरत का आदर्श हमें आत्मा का आईना दिखाता है।”

उन्होंने आगे कहा —

“हम सबको भरत की तरह निस्वार्थ प्रेम और समर्पण की भावना अपनानी चाहिए — तभी समाज में सच्चा ‘रामराज्य’ संभव है।”

उनके शब्दों पर तालियों की गड़गड़ाहट गूंजी — मानो श्रोताओं ने इस भाव को अपने दिल से स्वीकार कर लिया हो।
शिकारगंज क्षेत्र के पवित्र बाबा जागेश्वरनाथ धाम हेतिमपुर में चल रही नौ दिवसीय संगीतमय श्रीराम कथा के आठवें दिन जब जौनपुर से पधारे कथा व्यास पंडित रामेश्वरानंद जी महाराज ने “भरत चरित्र” की अमर गाथा का वर्णन आरंभ किया — तो पूरा पंडाल एक अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा से भर उठा।

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जैसे ही कथा व्यास जी ने मधुर स्वर में कहा —

“भरत के त्याग में प्रेम है, प्रेम में समर्पण है और समर्पण में भगवान की झलक है…”
वैसे ही श्रोताओं की आंखें नम हो उठीं, भक्ति के सागर में डूबा हर जन भावविभोर हो गया।

???? “भरत चरित्र” — सच्चे प्रेम और त्याग का जीवंत प्रतीक

कथा व्यास पंडित रामेश्वरानंद जी ने कहा कि भरत चरित्र केवल एक कथा नहीं, बल्कि यह “भ्रातृ प्रेम”, “आदर”, “समर्पण” और “निस्वार्थ भाव” का ऐसा शिखर है, जिसे आज की दुनिया भी नमन करती है।

उन्होंने बताया कि जब भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास मिला, तब भरत ने सिंहासन को ठुकरा दिया।
उन्होंने राजमुकुट की जगह राम की चरण पादुका को सिर पर धारण कर ली और कहा —

“राज मेरा नहीं, यह तो राम का है… मैं तो बस उनका सेवक हूं।”

भरत ने अपने भाई की अनुपस्थिति में भी शासन को राम के नाम से चलाया, और स्वयं साधु जीवन अपनाया। कथा व्यास जी ने कहा —

“भरत का जीवन बताता है कि भक्ति केवल पूजा नहीं, बल्कि आत्मा का समर्पण है।”

???? “भाई हो तो भारत जैसा…” — कथा स्थल में गूंजा जयघोष

जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, कथा पंडाल में “जय श्रीराम” और “भरत महाराज की जय” के नारे गूंज उठे। महिलाएं और वृद्ध श्रद्धालु भावविभोर होकर आँसू बहाते रहे। बच्चों ने भी पहली बार सुना कि सच्चे भाई का प्रेम कैसा होता है!

संगीतमय कथा के दौरान शास्त्रीय धुनों पर राम-भरत मिलन प्रसंग का मंचन हुआ — और पूरा वातावरण जैसे त्रेतायुग की भावभूमि में परिवर्तित हो गया।

???? आयोजन समिति और जनसमूह की उपस्थिति

इस अवसर पर महंत अनूप गिरी, समिति अध्यक्ष अरविंद सिंह, समाजसेविका गीता यादव, राम भरोस जायसवाल, अशोक सिंह, धर्मेंद्र मोदनवाल, साक्षी सिंह, भरत माली, राजेश यादव, पत्रकार देव मौर्य, धर्मेंद्र जायसवाल, मनोज माली, राजू गरी सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

कथा के दौरान भक्ति गीतों की धुनों पर महिलाओं ने झूमकर भगवान श्रीराम और भरत के नाम का जयघोष किया।

???? भक्ति का महासागर — जब श्रोता खो गए भावों में

संगीत मंडली द्वारा “राम बिना कौन सहोदर प्यारा” जैसे भजन जब गूंजे, तो उपस्थित लोग आंखें बंद कर प्रभु के चरणों में डूब गए।
कई वृद्ध श्रद्धालु तो भरत-राम मिलन का प्रसंग सुनते हुए रो पड़े।

पंडित रामेश्वरानंद जी ने कहा —

“भरत का प्रेम केवल शब्द नहीं, वह आचरण है। राम को वनवास मिला तो भरत को भी वनवास मिला, लेकिन हृदय का — क्योंकि उन्होंने सिंहासन छोड़कर अपने भाई का राज्य चलाया, पर स्वयं के सुख को त्याग दिया।”

???? “भरत” — त्याग की वो परिभाषा जो हर युग में जीवित है

कथा व्यास जी ने कहा —

“आज जब रिश्ते स्वार्थ पर टिके हैं, तब भरत का चरित्र हमें बताता है कि सच्चा रिश्ता त्याग पर आधारित होता है। जो प्रेम केवल पाने में नहीं, बल्कि खोकर भी मुस्कुराने में हो — वही दिव्यता है।”

उन्होंने आगे कहा कि भरत का नाम हर उस इंसान के दिल में होना चाहिए जो प्रेम को पूज्य मानता है।

???? कथा का समापन — भक्ति, करुणा और आस्था के संग

कथा के समापन पर पंडित रामेश्वरानंद जी ने श्रोताओं को आशीर्वाद दिया और कहा —

“जो मनुष्य अपने हृदय में भरत जैसा प्रेम और राम जैसा सत्य रखता है, उसे कोई दुख डिगा नहीं सकता।”

वहीं, समिति की ओर से आए श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया और अगले दिन “हनुमान चरित्र” पर आधारित कथा की घोषणा की गई।

???? खबरी न्यूज एक्सक्लूसिव निष्कर्ष

बाबा जागेश्वरनाथ हेतिमपुर में चल रही श्रीराम कथा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि यह “मानवता और संबंधों के पुनर्जागरण” का उत्सव है।
भरत चरित्र के माध्यम से यह संदेश पूरे समाज में गूंजा —

“त्याग ही सच्चा धर्म है, सेवा ही सच्ची पूजा, और प्रेम ही सच्चा भगवान।”

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