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कोइलरवा हनुमान जी पर नौ दिवसीय संगीतमय श्री रामकथा—

खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चंदौली।

जहाँ आध्यात्म से उठी स्वर लहरियाँ, वहीं समाजसेवा का स्वरूप बने डॉ. परशुराम सिंह व माता डॉ. गीता शुक्ला

SRVS Sikanderpur

चकिया की पावन धरती पर इन दिनों ऐसा आध्यात्मिक रंग चढ़ा है कि हर राह, हर मोड़, हर घर से सिर्फ एक ही धुन उठ रही है—“जय श्री राम…!”
और वह स्वर नहीं, एक अनुभूति है…
एक स्पंदन है…
एक दिव्य ऊर्जा है…
जो कोइलरवा हनुमान जी मंदिर प्रांगण में हो रहे नौ दिवसीय संगीतमय श्री रामकथा से निकलकर पूरे क्षेत्र के वातावरण में फैल गई है।

सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक चलने वाली इस कथा में भक्ति, ज्ञान, संगीत, और भावनाओं का ऐसा अद्भुत संगम दिखा कि हर श्रोता के रोम-रोम में भक्ति का प्रकाश फैल गया।

लेकिन इस कथा का सबसे भावुक, सबसे यादगार और सबसे प्रेरणादायक क्षण वह था जब ग्लोबल ग्रीन आइकॉन, “वृक्ष बंधु” डॉ. परशुराम सिंह और चकिया की “मदर टेरेसा” माता श्री डॉ. गीता शुक्ला ने एक साथ संयुक्त रूप से फीता काटकर कथा का उद्घाटन किया।

यह दृश्य मात्र उद्घाटन नहीं था…
यह आध्यात्म, समाजसेवा और मानवता का संगम था।

Dalimss Sunbeam Chakia

???? जब वृक्ष बंधु डॉ. परशुराम सिंह पहुँचे कथा स्थल — पूरा पंडाल जय-जयकार से गूंज उठा!

वैश्विक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण की एक अलग ही पहचान रखने वाले
डॉ. परशुराम सिंह,
जिन्हें चंदौली ही नहीं, पूर्वांचल और देश सम्मान से देखता है…
जब वे कथा स्थल पर पहुँचे तो भक्तों में मानो ऊर्जा की एक लहर दौड़ गई।

लोगों ने नारे लगाए—
“वृक्ष बंधु अमर रहें!”
“पर्यावरण के प्रहरी–डॉ. परशुराम सिंह!”

Silver Bells Chakia

उनकी उपस्थिति ने पूरे कार्यक्रम को एक भक्ति से भरे सामाजिक संदेश का रूप दे दिया।

उद्घाटन के समय उन्होंने कहा—
“भगवान श्रीराम हमारे आदर्श हैं। उनकी कथा सुनना, कहना और समझना—ये जीवन के हर संघर्ष को सरल बना देता है। राम हमारे भीतर के संयम, साहस और सत्य का प्रतीक हैं।”

उनके शब्द सिर्फ भाषण नहीं थे…
वे अनुभव थे…
जो सीधे श्रोताओं के हृदय को छू गए।

चकिया की अनमोल धरोहर— माता श्री डॉ. गीता शुक्ला की उपस्थिति:

मानवता और मातृत्व का जीवंत स्वरूप**

कहा जाता है कि कोई व्यक्ति मंदिर में भगवान बनता है, और कोई भगवान के बनाए बच्चों के बीच।
माता डॉ. गीता शुक्ला का नाम उसी श्रेणी में आता है।
वो सिर्फ चिकित्सक नहीं—
मानवता की चलती-फिरती मिसाल हैं।

लोग उन्हें चकिया की मदर टेरेसा कहकर बुलाते हैं।
उनके चेहरे पर वही करुणा, वही मातृत्व, वही शांत ऊर्जा…
कथा स्थल पर उनकी उपस्थिति ने माहौल को एक अलग ही शीतलता दी।

जैसे ही उन्होंने फीता काटा, महिलाएँ और बुज़ुर्ग भावुक हो उठे—
कहने लगे:
“माता जी आ गईं… आशीर्वाद पूरा हो गया।”

ब्रजधाम वृन्दावन से पधारे ब्रजराज जी महाराज—

जिनकी संगीतमय कथा ने सभी को भावविभोर कर दिया**

कथा वाचक ब्रजराज जी महाराज की आवाज़ में जो माधुर्य था,
वह मानो सीधे ब्रजभूमि से आती हवा के झोंके जैसा था।

उनकी संगीतमय प्रस्तुति में—
कभी राग था,
कभी विराग था,
कभी प्रेम था,
कभी करुणा थी।

जब वे बोले “राम केवल नाम नहीं… जीवन जीने का तरीका हैं” —
तो पूरा पंडाल “जय श्री राम” के नारों से गूंज उठा।

उन्होंने श्री राम जन्म, बाल लीलाएँ, सीता जी का मंगल, वनगमन और राम-भक्ति की अद्भुत घटनाओं को ऐसे प्रस्तुत किया कि
श्रोता—भक्ति सागर में डूबते-उतरते रहे।

???? प्रतिदिन भंडारे का आयोजन—भक्ति के साथ सेवा की परंपरा

कथा के साथ ही प्रतिदिन भंडारे का आयोजन चल रहा है।
इस भंडारे में बच्चे, महिलाएँ, बुजुर्ग—
सभी श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण कर रहे हैं।

यह सिर्फ भोजन नहीं…
सेवा की परंपरा है, समाज को जोड़ने का माध्यम है।

कथा आयोजनकर्ता – श्रीमती शकुंतला सिंह (पत्नी: संतोष कुमार सिंह)

जिनके समर्पण से यह भव्य आयोजन संभव हुआ

पूरी व्यवस्था, अनुशासन, शांति और भक्तिमय माहौल—
सब उनके सूझ-बूझ और भक्ति भाव का ही परिणाम है।

साथ ही कथा स्थल पर मौजूद रहे— श्री श्री 108 श्री रामदास महाराज

जिनकी उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी आध्यात्मिक बनाया।

यह कथा क्यों बन गई वायरल?

क्यों जनता बोल रही – “ये सिर्फ कार्यक्रम नहीं, एक अनुभव था!”**

क्योंकि इसमें—
✔ भक्ति थी
✔ संगीत था
✔ आध्यात्म था
✔ समाजसेवा की मिशालें थीं
✔ और सबसे बड़ा—
डॉ. परशुराम सिंह व माता डॉ. गीता शुक्ला का एक साथ आशीर्वाद

यह दृश्य सोशल मीडिया पर धुआंधार वायरल हो गया।
लोग लगातार पोस्ट कर रहे—
“दोनों महान व्यक्तित्व एक मंच पर—धन्य हुआ चकिया!”
“Ram Katha + Social Service = Divine Vibes”

Khabari News का एक्सक्लूसिव हाईलाइट

???? डॉ. परशुराम सिंह – ‘वृक्ष बंधु’

पर्यावरण रक्षा के प्रतीक, जिनकी उपस्थिति ने कथा को वैश्विक संदेश दिया।

???? माता श्री डॉ. गीता शुक्ला – ‘मदर टेरेसा ऑफ चकिया’

मानवता और दया की प्रतिमा, जिनकी शांत उपस्थिति से कथा स्थल ऊर्जा से भर गया।

???? कथा का समय

18 नवंबर — 26 नवंबर (अनवरत 9 दिवस)
⏰ सुबह 10:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक
???? हनुमान जी मंदिर प्रांगण, कोइलरवा (चकिया)

⚡ **अंत में…

ये कथा सिर्फ सुनाई नहीं जा रही—
ये जी जा रही है…**

यह आयोजन चकिया के लिए आशीर्वाद की वर्षा जैसा है।
जहाँ भगवान श्री राम की कथा के साथ
पर्यावरण संरक्षण का संदेश,
समाजसेवा का उदाहरण,
और मानवता की सुगंध,
तीनों एक साथ बह रही हैं।

???? जय श्री राम | #KhabariNews | #ViralPost | #ChakiaLive | #KathaSpecial

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