अंतरराष्ट्रीय कराटे चैम्पियनशिप में तीन उभरते सितारों ने लहराया चकिया का परचम
Khabari News | Editor-in-Chief: K.C. Shrivastava (Adv.)”
स्थान — कलंगूट वद्दो, कम्युनिटी सेंटर हॉल, गोवा
मंच पर चमक रही रोशनी, चारों ओर अंतरराष्ट्रीय झंडे, और वातावरण में उत्साह की बिजली-सी गूंज!
यहीं, इस माहौल में, Shotokan Karate India Association द्वारा आयोजित अंतरराष्ट्रीय कराटे चैम्पियनशिप ने पूरे भारत के लिए गर्व का क्षण रचा। लेकिन सिर्फ भारत के लिए ही नहीं—बल्कि चकिया के लिए यह वह दिन था, जब एक छोटे कस्बे की तीन मासूम-सी आँखों में छिपे बड़े सपने इंटरनेशनल मंच पर आकाश बनकर चमक उठे।
भारत, नेपाल, श्रीलंका, भूटान, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान जैसे 7 देशों के खिलाड़ियों के बीच जब मुकाबलों का बिगुल बजा, तब हॉल में बैठा हर व्यक्ति सोच रहा था—
“क्या छोटे शहरों के बच्चे इस बड़े मंच पर टिक भी पाएंगे…?”
लेकिन जवाब मिला—
“चकिया के बच्चे मैदान में उतरें और इतिहास न लिखें—ऐसा कैसे हो सकता है!”
⭐ जब चकिया के तीन सितारे गोवा की रेत पर चमके…
तीन नाम—कृतिका, शेखर और आयुष।
तीनों के चेहरे मासूम, लेकिन हिम्मत लोहा काटने वाली।
तीनों की उम्र छोटी, लेकिन इरादे विराट!
जिस पल उन्होंने अपने-अपने मुकाबले के लिए मैट पर कदम रखा, पूरा हॉल शांत हो गया।
उनके हर मूव में अनुशासन झलक रहा था, हर किक में आत्मविश्वास, और हर पंच में अपने गाँव-नगर की उम्मीदें।
और जब परिणाम आया—
✨ कुमिते में रजत…!
✨ काता में कांस्य…!
हॉल तालियों से गूंज उठा।
ये पदक सिर्फ मेडल नहीं थे—
👉 ये उस संघर्ष का सम्मान थे जो इन बच्चों ने चुपचाप, रोज़, बिना दुनिया को बताए किया था।
👉 ये उस उम्मीद का फल थे जो उनके माता-पिता ने आर्थिक-सामाजिक चुनौतियों के बावजूद जिंदा रखी।
👉 और सबसे बढ़कर—ये उस विश्वास की जीत थे जो उनके कोच नीरज गुप्ता ने सालों से इन पर जताया है।

🥋 1️⃣ कृतिका श्रीवास्तव—चकिया की ‘कराटे क्वीन’
16 वर्ष…
57 किलो भार वर्ग…
येलो बेल्ट…
एक साधारण-सी दिखने वाली बच्ची, लेकिन उसके हौसले किसी चट्टान से कम नहीं।
कृतिका ने जिस आत्मविश्वास से कुमिते में मुकाबला किया, उसने इंटरनेशनल कोचों तक को चौंका दिया। हर मूव ऐसा जैसे वह अपने मन में पहले से मैच का पूरा नक्शा बना चुकी हो।
कृतिका ने कहा—
“मैडम-पापा की उम्मीद मेरे लिए सबसे बड़ा मेडल है।”
उसके चेहरे पर चमक देखकर हर कोई समझ गया कि यह बच्ची भविष्य में अंतरराष्ट्रीय कराटे की बड़ी स्टार बनने वाली है।
🥋 2️⃣ शेखर गुप्ता—कम उम्र, तेज आग, बड़ा धमाका!
14 साल…
47 किलो भार वर्ग…
ओरेंज बेल्ट…
लेकिन प्रदर्शन ऐसी कि बड़े-बड़ों की सांसें अटक जाएं।
शेखर ने जिस तेजी से किक और पंच लगाए, उन्होंने साबित कर दिया कि चकिया का यह लड़का किसी से कम नहीं।
कुमिते में उसके हर अंक पर जोश की लहर दौड़ जाती थी।
काता में उसकी बॉडी बैलेंसिंग और फॉर्म ने जजों को तक प्रभावित किया।
शेखर के पिता ने कहा—
“बेटा छोटे घर से है लेकिन सपने बड़े हैं, और आज गोवा में उसने वो सपने सच कर दिखाए।”
🥋 3️⃣ आयुष यादव—11 साल का ‘लिटिल कराटे टाइगर’
सबसे छोटा, सबसे मासूम…
लेकिन उसके खेल में जो परिपक्वता दिखी, वह कमाल की थी।
61 किलो भार वर्ग में उतरकर आयुष ने अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के खिलाफ जिस बहादुरी से मुकाबला किया, उसने साबित कर दिया कि उम्र केवल एक संख्या है।
11 साल की उम्र में जब बच्चे मोबाइल और गेम में खोए रहते हैं, आयुष ने अपनी मेहनत और फोकस से सबको हैरान किया।
उसने कहा—
“मैं इंडिया के लिए गोल्ड लाना चाहता हूँ… बस इतना ही।”
उसकी यह मासूम लाइन सुनते ही माहौल तालियों से गूंज उठा।
🎖️ कोच नीरज गुप्ता—इन तीनों जीतों के पीछे खड़े असली योद्धा
कराटे हो, खेल हो या जीवन—हर सफलता के पीछे एक ‘गुरु’ होता है।
कृतिका, शेखर और आयुष के लिए वह गुरु हैं—नीरज गुप्ता।
नीरज सर ने कहा—
“अगर हमारे चकिया के बच्चों को ट्रेनिंग, संसाधन और मंच मिले, तो वे राष्ट्रीय ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नाम रोशन कर सकते हैं।”
उनकी आंखों में अपने छात्रों के लिए गर्व का भाव साफ दिखा।
निश्चय ही—इन पदकों में जितना योगदान बच्चों का है, उतना ही उनके इस समर्पित कोच का भी।

🌍 7 देशों की भागीदारी—और चकिया के तीन नायकों की चमक
इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले देश—
🇮🇳 भारत
🇳🇵 नेपाल
🇱🇰 श्रीलंका
🇧🇹 भूटान
🇧🇩 बांग्लादेश
🇵🇰 पाकिस्तान
🇦🇫 अफगानिस्तान
इन अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों के बीच खड़े होकर जब हमारे चकिया के खिलाड़ी मैट पर उतरे, तो यह सिर्फ मुकाबला नहीं था—यह पहचान की परीक्षा थी।
और उन्होंने यह परीक्षा शानदार तरीके से पास की।
ये सिर्फ पदक नहीं थे—
👉 यह संदेश था कि चकिया खेल प्रतिभाओं की जन्मभूमि बन रहा है।
👉 यह प्रमाण था कि छोटे शहर भी बड़े सपने जगा सकते हैं।
चकिया में खुशी की लहर—गाँव-नगर में बधाईयों की बारिश
जैसे ही Khabari News पर यह खबर आई, चकिया नगर में मानो उत्सव शुरू हो गया।
स्कूल, कोचिंग, मोहल्ले, सब जगह लोग एक-दूसरे को बधाइयाँ देने लगे।
अभिभावक गर्व से कहते दिखे—
“हमारे बच्चे अब इंटरनेशनल में चमक रहे हैं… चकिया का नाम अब दुनिया सुनेगी!”
🌟 क्यों खास है यह जीत?
✔️ छोटे कस्बे के बच्चों ने इंटरनेशनल मंच पर दम दिखाया
✔️ संसाधनों की कमी के बावजूद प्रतिभा ने जीत दर्ज की
✔️ चकिया के खेल भविष्य को नई दिशा मिली
✔️ ये जीत आने वाले सैकड़ों बच्चों को प्रोत्साहित करेगी
✔️ खेलों में पूर्वांचल के बढ़ते प्रभाव का संकेत
💬 Khabari News व एडिटर-इन-चीफ़ K.C. Shrivastava (Adv.) का संदेश
“चकिया के इन तीनों खिलाड़ियों ने यह साबित किया है कि प्रतिभा जन्मस्थान नहीं देखती, अवसर देखती है।
हम Khabari News परिवार की ओर से इन बच्चों, उनके अभिभावकों और कोच नीरज गुप्ता को दिल से साधुवाद देते हैं।
यह जीत आने वाले कल की नई कहानी लिखेगी।”
🌈 यही है चकिया—जहाँ सपने छोटे घरों से निकलकर इंटरनेशनल मंच तक उड़ान भरते हैं!
आज के बाद हर बच्चा, हर परिवार, हर कोच और हर संस्था के दिल में यह बात और गहरी हो गई—
🔥 “अवसर मिले तो चकिया के बच्चे दुनिया जीतने की ताकत रखते हैं!” 🔥
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