
रिपोर्ट: Khabari News Team | निर्देशन: एडिटर-इन-चीफ़ K.C. Shrivastava (Adv.)
एक-एक कर ताले पड़े, मशीनें हटाईं गईं, सवालों के निशाने पर पूरा हेल्थ नेटवर्क…”
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चंदौली।
कभी-कभी प्रशासन की कार्रवाई सिर्फ़ कार्रवाई नहीं होती—
एक झटका, एक डर, और एक साफ़ संदेश बनकर आती है।
चकिया में शुक्रवार की शाम ठीक ऐसा ही हुआ।
पूरा शहर सन्न, पैथालाजी सेंटरों में ताले फड़फड़ाते हुए, और संचालकों के चेहरे पीले पड़ते हुए…
और बीच में खड़े एक अधिकारी—उपजिलाधिकारी चकिया विनय कुमार मिश्र,
जो बिना किसी हिचक, बिना किसी रियायत,
पूरा सिस्टम हिला देने वाले मोड में।
शुरुआत प्रशासन के कड़े निर्देशों से—अंत हुआ भगदड़ से भरे शहर पर
शुक्रवार की शाम, जब आम तौर पर अस्पतालों में भीड़ बढ़ने लगती है, उसी समय प्रशासन के शीर्ष स्तर से एक निर्देश आता है—
“चकिया क्षेत्र में अवैध स्वास्थ्य सुविधाओं पर तुरंत सख्त कार्रवाई की जाए।”
यह निर्देश लागू करना था
उपजिलाधिकारी विनय कुमार मिश्र को
और मेडिकल विशेषज्ञता के साथ टीम का नेतृत्व कर रहे थे
एडिशनल CMO डॉ. S.K. सिंह।
और फिर शुरू होता है
चकिया के हेल्थ सेक्टर का सबसे बड़ा छापा अभियान।
छापेमारी शुरू… और पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया
टीम जैसे ही जिला संयुक्त चिकित्सालय के आसपास फैले अवैध पैथालॉजी व हास्पिटल क्षेत्रों में पहुंची—
पूरा माहौल बदल गया।
कई सेंटरों में ताले लगा दिए गए,
कई ने भागने की कोशिश की,
कुछ संचालक तो बिना दरवाजा बंद किए सीधा खिड़की से निकल भागे।
सीन देखने लायक था—
मार्केट के लोग मोबाइल ऑन कर लाइव कर रहे थे,
मरीज अस्पतालों के बाहर खड़े तमाशा देख रहे थे,
और प्रशासन अंदर जाकर फाइलें, मशीनें, रिकॉर्ड खंगाल रहा था।
पहला बड़ा झटका: आकांक्षा चाइल्ड केयर सेंटर पूरी तरह शील
जब टीम आकांक्षा चाइल्ड केयर सेंटर पहुंची,
कुछ ही मिनटों में माहौल बदल गया।
👉 कागज़ अधूरे
👉 लाइसेंस पर सवाल
👉 स्टाफ़ गायब
और उसी वक़्त
उपजिलाधिकारी मिश्र ने आदेश दिया—
“पूरा सेंटर तत्काल शील किया जाए।”
ताला लगा,
मुहर लगी,
और बाहर भीड़ जमा हो गई।
लोग धीरे-धीरे सिर्फ़ एक बात बोल रहे थे—
“आज पहली बार किसी ने बच्चों की जिंदगी पर खेल करने वालों को सबक सिखाया है।”

अगला पड़ाव: ग्लोबल पैथालॉजी—पहले से शील, लेकिन बड़ा खुलासा
ग्लोबल पैथालॉजी पहले से ही बंद चल रहा था।
जिलाधिकारी के स्तर पर जो आदेश हुआ था,
उसका क्लियर निर्देश था—
“यहां अल्ट्रासाउंड का संचालन नहीं हो सकता।”
लेकिन अंदर जाकर जो मिला,
उसने टीम को चौंका दिया।
💢 अल्ट्रासाउंड मशीन अब भी मौजूद
💢 संचालन रुकने के बाद भी हटाई नहीं गई
यह सुनते ही
एडिशनल CMO डॉ. S.K. सिंह ने आदेश दिया—
“मशीन तुरंत हटवाई जाए।”
मशीन निकली, सील दोबारा चैक हुई,
और पूरा केंद्र प्रशासन की कार्रवाई के बीच एक सख्त संदेश बनकर खड़ा हो गया।
तीसरा बड़ा मोड़: शाश्वत पैथालॉजी—संचालक भागा, सवाल छोड़ गया…
जैसे ही टीम शाश्वत पैथालॉजी पहुंची,
वहां का माहौल देखकर हर कोई चौंक गया।
संचालक गायब।
स्टाफ़ गायब।
दरवाजा खुला… लेकिन पूरा सेंटर खाली।
जैसे किसी को पहले से भनक लग गई हो।
उपजिलाधिकारी मिश्र अंदर गए,
मामला देखा,
और फिर बोले—
“अगर सब सही था… तो भागे क्यों? डर किस बात का?”
यह एक सवाल था,
जिसने पूरे क्षेत्र की अवैध पैथालॉजी व्यवस्था को आईना दिखा दिया।
पूरे अभियान के दौरान भारी पुलिस बल तैनात
कार्रवाई हल्की नहीं थी।
अवैध कारोबार, लोगों की जान से खिलवाड़,
और लगातार मिल रही शिकायतें…
सब देखते हुए
पूरी टीम सुरक्षा कवच में थी।
▶ पुलिस बल
▶ CHC टीम
▶ PHC कर्मचारी
▶ मेडिकल टेक्निकल स्क्वॉड
पूरा माहौल एक बड़े ऑपरेशन जैसा था।
जनता की शिकायतें—कार्रवाई की ‘जड़’
लोग लगातार कह रहे थे—
“सर, फलां सेंटर बिना डॉक्टर चलता है”
“पैथालॉजी में टेस्ट फर्जी आते हैं”
“हॉस्पिटल बिना NOC चल रहा है”
इन शिकायतों पर महीनों से
फुसफुसाहट थी…
लेकिन कार्रवाई शुक्रवार की शाम आई,
और सीधे दिल पर लगी।
इसलिए क्षेत्र में लोग कह रहे हैं—
“आज प्रशासन ने पहली बार हमारी आवाज़ सुनी।”

उपजिलाधिकारी विनय कुमार मिश्र—इस पूरी कार्रवाई का चेहरा
कार्रवाई के दौरान
विनय कुमार मिश्र का अंदाज़ बिल्कुल अलग था।
ना घबराहट,
ना दबाव,
ना किसी का पक्ष।
जहां गड़बड़ी मिली—
सीधे ताला।
जहां मशीन गलत इस्तेमाल में—
तुरंत जब्ती।
जहां संचालक भागा—
सीधा सवाल।
उनकी पूरी टीम कई घंटों तक
एक-एक सेंटर खंगालती रही।
लोगों ने जगह-जगह कहा—
“आज SDM साहब ने जो किया, वह पूरे जिले के लिए मिसाल है।”
हेल्थ सिस्टम पर बड़ा सवाल—क्या इतने दिन से सब अंधे थे?
यह छापेमारी सिर्फ़ ताले लगाने की कार्रवाई नहीं,
बल्कि वो खत्म न होने वाला सवाल है—
“बिना लाइसेंस, बिना डॉक्टर, बिना रजिस्ट्रेशन…
इतने अस्पताल कैसे चलते रहे?”
क्या स्वास्थ्य विभाग को पता नहीं था?
क्या शिकायतें दबा दी जाती थीं?
क्या कार्रवाई सिर्फ़ कागज़ों में होती थी?
आज क्षेत्र के लोग पूछ रहे हैं—
“अगर SDM मिश्र और SK सिंह की टीम एक दिन में ये कर सकती है,
तो बाकी विभाग इतने महीनों तक क्या कर रहे थे?”
यह सिर्फ़ शुरुआत है—आगे और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं
प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि
यह अभियान “पहला चरण” था।
दूसरे चरण में—
✔ बिना रजिस्ट्रेशन वाले क्लीनिक
✔ झोलाछाप डॉक्टर
✔ अवैध अल्ट्रासाउंड
✔ नकली दवाइयों के गोदाम
सबकी जांच होगी।

भीगी-भीगी, भारी-भारी माहौल—लोगों में राहत और डर दोनों
शुक्रवार शाम चकिया का माहौल
मानो बदली से भरा हो…
थोड़ी राहत… थोड़ी भीगी-सी हवा…
और लोगों के चेहरों पर
गुस्सा भी… भरोसा भी।
कुछ लोग कह रहे थे—
“अब बचेंगे हमारे बच्चे…”
और कुछ कह रहे थे—
“अभी और नाम आएंगे… देखना!”
Khabari News का फाइनल रिब्यू
यह छापेमारी सिर्फ़ खबर नहीं—‚चकिया के स्वास्थ्य सिस्टम पर
लगी सबसे बड़ी सर्जरी थी।
SDM विनय कुमार मिश्र,
एडिशनल CMO S.K. सिंह
और पूरी टीम ने
साफ़ किया कि—
⚡ “अब अवैध धंधे नहीं चलेंगे।”
⚡ “बिना लाइसेंस दवाई नहीं बिकेगी।”
⚡ “बच्चों की जिंदगी पर व्यापार नहीं होगा।”
और जनता के मन में भीतर तक एक बात दर्ज हो गई—
**“अगर कोई कार्रवाई का मतलब समझना चाहता है…
तो आज की शाम चकिया में देख ले।

