
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क‚चंदौली।
एक बेलगाम हत्या… एक कातिल… और फिर रात के अंधेरे में गरजा पुलिस का कानून!
चन्दौली—
रात की स्याही अभी गहरी ही थी… गांवों की गलियों में सन्नाटा पसरा था…
और उसी सन्नाटे के बीच एक दिल दहलाने वाली चीख कई परिवारों का चैन लूट चुकी थी।
23 नवंबर की रात… एक मामूली बाइक साइड करने को लेकर शुरू हुआ विवाद…
कुछ मिनटों में लाठी और डंडों से मौत में बदल गया।
एक जवान ज़िंदगी खत्म… एक परिवार तबाह… और एक पूरा इलाका दहशत में।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती—
कहानी की असली शुरुआत तो अब हुई थी…

🔴 प्रॉलॉग: “हमें कुछ करना होगा साहब… नहीं तो ये लोग खुलकर घूमते रहेंगे…”
मृतक के परिवार की रोती हुई आवाजें…
क्षेत्र का आक्रोश…
और सोशल मीडिया पर उठता तूफान—
“कब मिलेगा न्याय?”
“कब गिरेगा ये गैंग?”
ये सवाल चन्दौली पुलिस के लिए अब मिशन बन चुके थे।
SP आदित्य लांग्हे, IPS के निर्देश और वाराणसी जोन के ADG व DIG की सख्त मॉनिटरिंग ने संकेत साफ कर दिए—
“कातिल को हर हाल में पकड़ना है… जिंदा या मुठभेड़ में।”
ऑपरेशन ‘घेराबंदी’ – रात में शुरू हुआ शिकारी मिशन
थाना सैयदराजा प्रभारी निरीक्षक विन्देश्वर प्रसाद…
थाना चन्दौली प्रभारी निरीक्षक संजय कुमार…
दोनों टीमों के बीच वायरलेस पर सिर्फ एक ही कोड—
“Target Active… Move Silent… Zero Noise.”
रात की चेकिंग के बीच मुखबिर ने सूचना दी—
“सावरू उर्फ रितेश उर्फ बीन… कल्याणपुर रेलवे लाइन के पास छिपा है।”
टीमों की सांसें तेज… कदम धीमे…
और दिल में सिर्फ एक संकल्प—
आज ये भाग नहीं पाएगा।
रेलवे लाइन के दो खंभों के बीच, अंधेरे में अकेला खड़ा था एक 19 साल का लड़का…
लेकिन उसके हाथ में था मौत का तमंचा।
घिरने का एहसास… और फिर पहली गोली!
जैसे ही पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेरना शुरू किया—
सवरू ने पीछे मुड़कर देखा…
और उसकी आँखों में एक ही बात साफ दिखी—
“अब बचना मुश्किल है…”
और तभी—
धड़ामmm!…
पहली गोली चली!
गोली सीटी काटती हुई निकली और
आरक्षी विष्णुदत्त प्रजापति के हाथ को चीरते हुए निकल गई।
सन्नाटा टूट चुका था…
अब यह ऑपरेशन सीधे Encounter Mode में बदल चुका था।
पुलिस की दौड़… अपराधी का भागना… और हवा में तैरती गोलियाँ
टीमों ने पोज़िशन बदली…
रेलवे स्टेशन सैयदराजा की तरफ आरोपी भागने लगा…
जवानों के बूटों की आवाज़ें…
रेलवे पुल के नीचे गूंजती फायरिंग…
होटल और घरों की लाइटें अचानक जगना…
इलाके में दहशत फैलना…
सब कुछ एक फिल्म जैसा था—
लेकिन ये फिल्म नहीं…
कानून का असली रूप था।
जवाबी फायर का आदेश मिल चुका था।
और फिर—
धाँय!!!
एक गोली आरोपी के पैर में लगी।
वह वहीं गिर पड़ा।
“सर… Target Down!” – वो ऐतिहासिक पल
वायरलेस पर आवाज गूंजी—
“Sir, Target down… Target down!”
पूरी टीम ने दौड़कर आरोपी को पकड़ा।
उसके हाथ से तमंचा छीन लिया गया।
मौके से बरामद—
- 315 बोर का अवैध तमंचा
- 02 जिंदा कारतूस
- 01 खोखा कारतूस
19 साल का अपराधी… लेकिन फाइलों में दर्ज था खौफ का पूरा इतिहास।
मौत की रात की सच्चाई – हत्या कैसे हुई थी?
23 नवंबर को बाइक साइड को लेकर शुरू हुआ विवाद इतना बढ़ा कि
सवरू और उसके साथियों ने पीड़ित युवक पर
लाठी-डंडों की बरसात कर दी।
घायल युवक तड़प रहा था… चिल्ला रहा था…
लेकिन हमलावरों में बदले का जुनून था।
कुछ मिनट में युवक की सांसें टूट गईं।
परिवार बेसुध…
गांव सन्न।
और इस मौत ने पूरा जनपद हिला दिया।
घायल जवान— पुलिस की असली शहादत
मुठभेड़ के दौरान गोली छूकर निकलने के बावजूद
आरक्षी विष्णुदत्त ने अपनी पोज़िशन नहीं छोड़ी।
उनकी ये बहादुरी
चन्दौली पुलिस की असली पहचान है—
“Duty First… Fear Never.”
उन्हें तुरंत CHC बरहनी भेजा गया।
जहाँ उनका इलाज जारी है।
पूरे जिले से उनके लिए दुआएँ उठ रही हैं।

चन्दौली पुलिस का संदेश— “भागोगे नहीं… पकड़े जाओगे!”
क्षेत्राधिकारी सदर देवेंद्र कुमार का बयान पूरे जिले के दिलों तक पहुँच गया—
“अपराधी चाहे कहीं भी छिपा हो… चन्दौली पुलिस उसे ढूंढकर लाएगी।
कानून का हाथ लंबा है… और आज फिर यह साबित हो गया।”
जनपद की जनता में राहत…
और अपराधियों में खौफ फैल चुका है।
मिशन की सफलता – वो तस्वीर जिसने पुलिस का मान बढ़ा दिया
जब आरोपी एम्बुलेंस में ले जाया जा रहा था,
चन्दौली की जनता के दिलों में सिर्फ एक ही भाव था—
“न्याय मिला है… कानून जिंदा है!”
घटना स्थल से लेकर जिला अस्पताल तक
हर कदम पर पुलिस की सख्ती और ईमानदारी साफ दिख रही थी।
अपराधी का अतीत— सिर्फ 19 साल और इतने केस!
- मुकदमा संख्या 201/2024
धाराएँ – 115(2)/352/351(2)/117(2) BNS - मुकदमा संख्या 354/2025
धाराएँ – 103(1)/191(2)/191(3)/115(2)/352/109 BNS + 3/25 Arms Act
यह कोई साधारण लड़का नहीं था—
ये एक बनता हुआ अपराधी था… जिसे रोकना जरूरी था।
जनता का संदेश— “UP पुलिस सच में बदल गई है!”
सोशल मीडिया पर लोग लिख रहे हैं—
- “अब अपराधी सोचेंगे 100 बार…”
- “सैयदराजा पुलिस की जय हो!”
- “न्याय मिला, दिल जीत लिया पुलिस ने।”
इस ऑपरेशन ने
UP पुलिस की छवि को एक बार फिर
बुलंद किया है।
Khabari News की राय— “ये मुठभेड़ नहीं… एक चेतावनी है!”
यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं—
यह एक संदेश है उन सबके लिए
जो कानून को चुनौती देने के लिए सड़क पर निकलते हैं।
चन्दौली की रात ने साबित कर दिया कि—
कानून सोता नहीं… जागता है।
और जब जागता है, तो फिर अपराधी कहीं नहीं बचते।
🌟 न्याय की जीत, चन्दौली की राहत
एक हत्या…
एक डरी हुई जनता…
एक सख्त पुलिस…
और एक निर्णायक मुठभेड़—
इन चारों ने मिलकर चन्दौली में
न्याय की लौ फिर से जला दी।
यह ऑपरेशन आने वाले महीनों तक
जनपद की सुरक्षा चर्चा में रहेगा।
Khabari News इस ऐतिहासिक पुलिस एक्शन को
सलाम करता है।

