
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चंदौली।
ऑशु पंडित की रिर्पोट
4 से 11 दिसंबर तक चलेगा भारतीय भाषा उत्सव 2025
“Many Languages, One Emotion” — बच्चों के दिलों को छूने वाला महाउत्सव
शुरू हो रहा है वो हफ्ता… जब कक्षाओं में किताबों से ज्यादा भावनाएँ बोली जाएँगी, जब दीवारों पर सिर्फ रंग नहीं—अपनी भाषा का गर्व लिखा जाएगा।
चकिया के हर स्कूल में गूंजेगी—कविता, कथा, संस्कृति और भारतीय अस्मिता की झंकार।**
इस बार दिसंबर सिर्फ सर्दियाँ नहीं लाएगा…
यह बच्चों के चेहरों पर भाषा की रोशनी के दीप जलाएगा।
बुनियादी शिक्षा विभाग ने कमर कस ली है—
पूरा प्रदेश, 1.32 लाख स्कूल, 1.48 करोड़ बच्चे…
और उनके बीच भारत की भाषाई विरासत का सबसे बड़ा महाउत्सव!
जानिए क्यों खास है “भारतीय भाषा उत्सव 2025”?
क्योंकि इस बार सिर्फ कार्यक्रम नहीं…
एक संकल्प बोया जा रहा है —
“मातृभाषा में गर्व, भारतीय भाषा में सम्मान, और बहुभाषीयता में भारत”
बीएसए सचिन कुमार का कहना है—
“बच्चे चाहे किसी भी भाषा के हों, उनके दिल की भाषा इमोशन है।
इस उत्सव का मकसद है—उन्हें यह समझाना कि भारत की ताकत उसकी भाषाओं में है।”
चकिया के बीईओ रामटहल जी कहते हैं—
“ये सिर्फ कार्यक्रम नहीं…
ये बच्चों को भारतीय संस्कृति की जड़ से जोड़ने वाली पहल है।”
🌈 4 दिसंबर से 11 दिसंबर — हर दिन एक रंग, हर दिन एक कहानी
एक हफ्ता… सात भावनाएँ… सात अनुभव…
और एक भारत!**
📌 4 दिसंबर — भाषा वृक्ष और भाषाई विरासत दीवार
👉 पूरे जिले के स्कूलों में उगेगा ‘भाषा का पेड़’
👉 बच्चे अपनी-अपनी मातृभाषा के पत्तों से इसे सजाएँगे
👉 हर दीवार बोलेगी— “हम सबकी अपनी कहानी है”**
दीवारें सिर्फ ईंट नहीं होतीं,
आज वो बच्चों के शब्दों से जीवित हो उठेंगी—
कहीं भोजपुरी की महक, कहीं अवधी की मिठास,
कहीं उर्दू की नज़ाकत, कहीं संस्कृत की शुद्धता…
चकिया ऐसे पहले कभी नहीं सजा!
📌 5 दिसंबर — कविता–गीत उत्सव
आज कक्षाएँ मंच बन जाएँगी…
बच्चे बनेंगे कवि, गायक, कहानीकार।**
किसी को जबान मिलेगी अपनी भाषा की,
किसी को हिम्मत मिलेगी भीड़ के सामने बोलने की।
आज बच्चे बोलेंगे—
“भाषा बंधन नहीं, भाषा हमारा उत्साह है।”
📌 6 दिसंबर — भारतीय त्योहार और सांस्कृतिक झंकार
गणेशोत्सव से ईद तक,
छठ से क्रिसमस तक…
आज भारत एकता की जैसी तस्वीर बनेगी—वह दिलों में हमेशा के लिए छप जाएगी।**
कक्षाओं में ढोलक बजेगी,
मंच पर लोकगीत खनकेंगे,
और बच्चों की आंखों में चमकेगा—
“हम अलग नहीं, एक हैं।”
📌 8 दिसंबर — कहावतों में एकता एवं भाषा मित्र गतिविधि
“जैसी करनी वैसी भरनी”—
आज बच्चे समझेंगे भारतीय अनुभवों का खजाना।**
विभिन्न भाषाओं की कहावतें, मुहावरे—
हर शब्द में छिपी सदियों की बुद्धि।
भाषा मित्र कार्यक्रम में—
एक बच्चा दूसरी भाषा का दोस्त बनेगा।
दो भाषाएँ… दो दिल… एक भारत।
📌 9 दिसंबर — भाषा बंधु पत्र और बहुभाषीय कहानी श्रृंखला
आज बच्चे कागज पर लिखेंगे—
“तुम मेरी भाषा के साथी हो।”**
बच्चे एक-दूसरे को पत्र लिखेंगे
कभी भोजपुरी में
कभी बंगाली में
कभी पंजाबी में
कभी तेलुगू में…
और जब कहानियाँ शुरू होंगी—
तो पूरा स्कूल रूपांतरण का गवाह बनेगा।
📌 10 दिसंबर — भाषा अन्वेषण क्लब: खेल–कहानी–संवाद
आज बच्चे सीखेंगे… खेलेंगे… और खोजेंगे।**
भाषाई पहेलियाँ
शब्द खोज अभियान
लघु संवाद प्रतियोगिताएँ
देश भर की बोलियों का रंगारंग परिचय
आज स्कूल सिर्फ स्कूल नहीं—
एक भाषा प्रयोगशाला बन जाएगा!

📌 11 दिसंबर — इंटरैक्टिव भाषा मेला और रंगमंच
आज उत्सव अपनी ऊंचाई पर होगा।**
रंगमंच, अभिनय, स्टोरी प्ले,
भाषीय स्टॉल, शब्द–लोक,
बच्चों का हुनर, उनकी संस्कृति,
उनकी आवाज़… उनका आत्मविश्वास—
सब चमक उठेगा।
और जब समापन होगा—
तो सिर्फ कार्यक्रम खत्म नहीं होगा…
एक नया संस्कार जन्म ले चुका होगा।
चकिया—इस बार इतिहास लिखने जा रहा है!
यहाँ के स्कूल पहले भी कई उदाहरण पेश कर चुके हैं,
लेकिन ‘भारतीय भाषा उत्सव’
चकिया में भाषाओं की नई क्रांति ले आएगा।
गाँव की गलियाँ…
कक्षाओं के बोर्ड…
बच्चों की नोटबुक…
हर जगह सिर्फ एक ही बात लिखी होगी—
“हमें अपनी भाषा पर गर्व है।”
💫 KHABARI NEWS SPECIAL — क्यों ये आयोजन बच्चों की जिंदगी बदल देगा?
✔ क्योंकि बच्चा महसूस करेगा कि उसकी बोली, उसकी भाषा, उसकी पहचान है।
✔ क्योंकि भारतीयता की जड़ें तभी मजबूत होती हैं जब भाषा सम्मान पाए।
✔ क्योंकि किताबों में लिखी बातें ही शिक्षा नहीं—
कला, साहित्य, गीत, कथा… भी जीवन के गुरुमंत्र हैं।
✔ क्योंकि जब बच्चा कई भाषाओं को अपनाता है—
उसका व्यक्तित्व विशाल हो जाता है।
KHABARI NEWS की कलम से — एक भावुक अपील
बच्चे सिर्फ अंक नहीं होते…
वे सपने होते हैं।
और भाषा—उनका पंख।
जब एक बच्चा अपनी मातृभाषा में कविता सुनाता है,
तो सिर्फ शब्द नहीं निकलते—
उसकी आत्मा बोलती है।
जब एक बच्चा दूसरी भाषा सीखने को आगे आता है,
तो सिर्फ पुस्तक नहीं पढ़ता—
भारत को पढ़ता है।
ये उत्सव सिर्फ एक आयोजन नहीं—
यह नई पीढ़ी को भारतीयता में ढालने का संस्कार है।
अंत में — KHABARI NEWS का वादा
हम इस महाउत्सव की हर धड़कन, हर कहानी,
हर कविता, हर प्रस्तुति—
आप तक पहुँचाएँगे।
चकिया बोलेगा…
तो खबरी न्यूज उसे देशभर तक गूँजाएगा!
⚡️KHABARI NEWS —
जहाँ खबर नहीं, भावना बोलती है।

