खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चंदौली। चकिया के बाजार में इन दिनों कुछ बदला-बदला सा माहौल है। वही दुकानें, वही गलियां, वही ग्राहक… लेकिन व्यापारियों की आंखों में अब अलग चमक है। यह चमक किसी छूट या सेल की नहीं, बल्कि संगठन से जुड़ने की, एकजुट होने की और अपनी आवाज को मजबूत करने की है।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल की नियुक्त कमेटी ने जिस सक्रियता के साथ सदस्यता अभियान को जमीन पर उतारा है, उसने वर्षों से जमी निष्क्रियता की परतों को हिलाना शुरू कर दिया है।


7 जनवरी से शुरू हुआ अभियान, 9 जनवरी तक 250 से अधिक रसीदें
व्यापार मंडल की नियुक्त कमेटी द्वारा 7 जनवरी से लगातार रसीद काटने का कार्य किया जा रहा है।
खास बात यह है कि यह काम केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहा।
9 जनवरी तक लगभग 250 रसीदें काटी जा चुकी हैं, जो अपने आप में यह संकेत है कि व्यापारी अब सिर्फ बातें नहीं कर रहा, बल्कि खुद आगे बढ़कर संगठन से जुड़ रहा है।
कमेटी की ओर से स्पष्ट किया गया है कि यह रसीद काटने का सिलसिला 15 जनवरी तक लगातार जारी रहेगा। यानी अभी और व्यापारी जुड़ने वाले हैं, अभी यह कारवां और आगे बढ़ेगा।

जमीन पर दिखी टीमवर्क की तस्वीर
इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत यह रही कि इसमें सिर्फ एक-दो चेहरे नहीं, बल्कि पूरी टीम मैदान में उतरी।
रसीद काटने के कार्य में मोहन सेठ, आलोक जायसवाल, कैलाश जायसवाल, राकेश मोदनवाल और सुजीत जायसवाल लगातार सक्रिय रूप से मौजूद रहे।
कोई दुकान-दुकान पहुंच रहा था,
कोई व्यापारियों को संगठन की भूमिका समझा रहा था,
तो कोई रसीद काटते हुए उन्हें चुनाव और सदस्यता की प्रक्रिया से अवगत करा रहा था।
यह दृश्य उन व्यापारियों के लिए भी संदेश बन गया, जो अब तक दूर से देखते रहे थे—
“जब नेतृत्व खुद मैदान में है, तो अब पीछे रहने का कोई कारण नहीं।”

व्यापारियों की बदलती सोच, टूटती निष्क्रियता
चकिया में पहले भी संगठन थे, समितियां थीं, पदाधिकारी थे।
लेकिन वर्षों तक सबसे बड़ी कमी रही—व्यापारी की सक्रिय भागीदारी।
इस बार तस्वीर अलग दिख रही है।
रसीद कटवाने पहुंचे व्यापारी खुलकर सवाल कर रहे हैं—
- संगठन हमारे लिए क्या करेगा?
- चुनाव पारदर्शी होंगे या नहीं?
- हमारी समस्याएं कहां तक पहुंचेंगी?
और सबसे अहम बात—
अब ये सवाल पूछे जा रहे हैं, दबे स्वर में नहीं, आत्मविश्वास के साथ।

वरिष्ठ सदस्य अजय कुमार उर्फ शिव जी का बड़ा बयान
इस पूरे अभियान को लेकर कमेटी के वरिष्ठ सदस्य अजय कुमार उर्फ शिव जी ने जानकारी देते हुए कहा—
“यह पहली बार है जब व्यापारी इतने उत्साह के साथ खुद आगे आ रहा है।
9 जनवरी तक 250 से अधिक रसीदें कट चुकी हैं और रोज संख्या बढ़ रही है।
यह साफ संकेत है कि व्यापारी अब संगठन को गंभीरता से ले रहा है।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रसीद काटने की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और 15 जनवरी तक हर इच्छुक व्यापारी को संगठन से जुड़ने का अवसर दिया जाएगा।
सिर्फ रसीद नहीं, एक सोच का निर्माण
खबरी न्यूज़ मानता है कि यह अभियान केवल रसीद काटने तक सीमित नहीं है।
यह व्यापारी सोच के बदलाव की शुरुआत है।
आज व्यापारी यह समझने लगा है कि—
- अकेले लड़ने से आवाज कमजोर रहती है।
- संगठन से जुड़ने पर ही प्रशासन और व्यवस्था तक बात पहुंचती है।
- चुनाव में भागीदारी ही नेतृत्व को जवाबदेह बनाती है।
यही कारण है कि सदस्यता अभियान में सिर्फ पुराने चेहरे ही नहीं, बल्कि युवा व्यापारी और छोटे दुकानदार भी तेजी से जुड़ रहे हैं।
15 जनवरी तक चलेगा अभियान, फिर चुनावी रण
कमेटी द्वारा स्पष्ट किया गया है कि 15 जनवरी तक सदस्यता अभियान चलेगा।
इसके बाद चुनाव की प्रक्रिया अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ेगी।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि—
- क्या यह संख्या 250 से बढ़कर 400-500 तक पहुंचेगी?
- क्या व्यापारी सिर्फ सदस्य बनेगा या चुनावी प्रक्रिया में भी सक्रिय रहेगा?
- और क्या यह उत्साह मतदान के दिन भी नजर आएगा?
खबरी न्यूज़ का विश्लेषण
चकिया के व्यापारिक इतिहास में यह दौर इसलिए खास है, क्योंकि
यह पहली बार है जब सक्रियता नीचे से ऊपर की ओर बढ़ती दिख रही है।
न कोई दबाव,
न कोई मजबूरी,
बल्कि स्वेच्छा से संगठन से जुड़ाव।
अगर यह रफ्तार बनी रही, तो आने वाला चुनाव सिर्फ पदों का चयन नहीं होगा,
बल्कि व्यापारी आत्मसम्मान और एकजुटता का प्रतीक बन सकता है।
अंत में एक सीधा सवाल
अब सवाल यही है—
क्या यह सक्रियता 15 जनवरी के बाद भी कायम रहेगी?
या फिर चुनाव के बाद सब कुछ फिर शांत हो जाएगा?
खबरी न्यूज़ इस पूरे घटनाक्रम को सिर्फ खबर नहीं, बल्कि
चकिया के व्यापारी समाज के जागरण की दस्तक मानता है।
क्योंकि जब व्यापारी खुद आगे आता है,
तब संगठन सिर्फ कागजों में नहीं,
जमीन पर ताकत बनकर खड़ा होता है।

