7 जनवरी से शुरू सदस्यता अभियान, सोमवार तक 750 व्यापारियों ने कटवाई रसीदें
वरिष्ठ सदस्य अजय उर्फ शिवजी का दावा—अभी 150 और सदस्य बनने को तैयार
खबरी न्यूज़ नेशनल नेटवर्क चकिया (चंदौली)। चकिया नगर इन दिनों सिर्फ बाजार नहीं, बल्कि व्यापारियों की चेतना, संगठन और ताकत का केंद्र बन चुका है। 7 जनवरी से शुरू हुआ व्यापार मंडल का सदस्यता अभियान अब आंदोलन का रूप ले चुका है। सोमवार तक अभियान के तहत 750 से अधिक व्यापारियों ने सदस्यता रसीद कटवाकर यह साफ संदेश दे दिया है कि अब चकिया का व्यापारी बिखरा हुआ नहीं, बल्कि संगठित, जागरूक और निर्णायक भूमिका में है।
नगर के मुख्य बाजार से लेकर गली-मोहल्लों तक, हर दुकान, हर प्रतिष्ठान पर इन दिनों सिर्फ एक ही चर्चा है— “व्यापार मंडल की सदस्यता” और यह चर्चा अब आंकड़ों में तब्दील हो चुकी है।
7 जनवरी से शुरू हुआ अभियान, हर दिन बढ़ता गया कारवां
व्यापार मंडल चकिया द्वारा 7 जनवरी को शुरू किया गया यह सदस्यता अभियान महज औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि इसे व्यापारियों के अधिकार, सम्मान और सुरक्षा से जोड़कर जमीन पर उतारा गया। अभियान के पहले ही दिन से व्यापारियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला।
सुबह दुकान खुलते ही व्यापार मंडल के पदाधिकारी बाजार में निकल पड़े— कहीं सदस्यता फार्म भरे जा रहे थे, तो कहीं व्यापारियों से सीधा संवाद हो रहा था, तो कहीं संगठन की जरूरत और उसकी ताकत को लेकर खुली चर्चा।
हर दिन के साथ सदस्यता रसीदों की संख्या बढ़ती चली गई, और सोमवार तक यह आंकड़ा 750 पार कर गया।
जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत अग्रहरि की मौजूदगी से अभियान को मिली रफ्तार
सदस्यता अभियान को नई ऊर्जा तब मिली, जब व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत अग्रहरि स्वयं पदाधिकारियों के साथ चकिया बाजार पहुंचे। उन्होंने किसी मंच या सभागार में बैठकर भाषण देने के बजाय दुकान-दुकान जाकर व्यापारियों से सीधा संपर्क किया।
उनकी मौजूदगी ने व्यापारियों में यह भरोसा पैदा किया कि संगठन सिर्फ कागजों में नहीं, मैदान में है।
जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत अग्रहरि ने स्पष्ट शब्दों में कहा—
“जहां व्यापार मंडल मजबूत होता है, वहां का व्यापारी न डरता है, न झुकता है। संगठन ही व्यापारी की असली ढाल है।”
उनकी इस बात ने व्यापारियों के मन में वर्षों से दबी असुरक्षा और असंतोष को आवाज दी।
प्रमुख व्यापारी प्रदीप गुप्ता बने सदस्य, हुआ सम्मान
अभियान के दौरान नगर के प्रमुख व्यापारी प्रदीप गुप्ता को विधिवत सदस्य बनाया गया। इस अवसर पर व्यापारियों ने जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत अग्रहरि का अंगवस्त्र भेंट कर भव्य स्वागत किया।
यह दृश्य सिर्फ स्वागत का नहीं था, यह दृश्य था सम्मान, एकजुटता और भरोसे का।
वरिष्ठ सदस्य अजय उर्फ शिवजी का बड़ा बयान
व्यापार मंडल के वरिष्ठ सदस्य अजय उर्फ शिवजी ने अभियान को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया—
“सोमवार तक करीब 750 व्यापारियों ने सदस्यता रसीद कटवा ली है। इसके अलावा अभी भी करीब 150 व्यापारी ऐसे हैं, जो अगले चरण में सदस्यता लेने के लिए तैयार हैं।”
उनके अनुसार, यह अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है और आने वाले दिनों में सदस्यता संख्या और बढ़ने की पूरी संभावना है।
25 जनवरी का चुनाव और बढ़ती राजनीतिक-संगठनात्मक चेतना
सदस्यता अभियान के साथ-साथ 25 जनवरी को होने वाले व्यापार मंडल चुनाव की चर्चा भी बाजार में जोरों पर है। व्यापारियों के बीच यह साफ भावना उभरकर सामने आ रही है कि—
अब सिर्फ नाम के लिए नहीं,
बल्कि ईमानदार, कर्मठ और संघर्षशील व्यापारी सेवक को चुना जाएगा।
जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत अग्रहरि ने भी व्यापारियों से अपील की—
“ऐसे प्रतिनिधि को चुनिए, जो व्यापारियों की आवाज प्रशासन तक पहुंचाए, सौदेबाजी नहीं, संघर्ष करे।”
प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों की सक्रिय भूमिका
अभियान को सफल बनाने में प्रदेश और जिला स्तर के पदाधिकारियों की भूमिका भी सराहनीय रही। इस दौरान—
प्रदेश संगठन मंत्री अशोक केशरी,
वरिष्ठ जिला महामंत्री राकेश मोदनवाल,
नगर अध्यक्ष मोहन सेठ,
महामंत्री शुभम जायसवाल
सहित बड़ी संख्या में व्यापारी और संगठन पदाधिकारी मौजूद रहे।
इन सभी ने मिलकर यह दिखा दिया कि व्यापार मंडल सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक सामूहिक शक्ति है।
चकिया का बाजार, अब केवल व्यापार का नहीं—ताकत का प्रतीक
चकिया का बाजार अब सिर्फ खरीद-फरोख्त का स्थान नहीं रहा। यह बाजार अब—
व्यापारियों की आवाज,
उनकी एकजुटता,
और उनके भविष्य के फैसलों का केंद्र बन चुका है।
750 सदस्यता रसीदें इस बात का प्रमाण हैं कि चकिया का व्यापारी अब जाग चुका है।
Khabari News की टिप्पणी
चकिया में चला यह सदस्यता अभियान साफ संकेत देता है कि आने वाले समय में व्यापार मंडल न सिर्फ मजबूत होगा, बल्कि प्रशासनिक और राजनीतिक निर्णयों में भी प्रभावी भूमिका निभाएगा। संगठन की यह मजबूती ही व्यापारियों की असली सुरक्षा है।
अब सवाल सिर्फ सदस्यता का नहीं, बल्कि नेतृत्व, ईमानदारी और संघर्ष का है।