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ब्यापार मंडल चुनाव चकिया: अब आर-पार की जंग, अध्यक्ष पद के लिए चार मैदान में

खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चन्दौली।

“यह चुनाव नहीं… हिसाब, हक़ और हिम्मत की लड़ाई

उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल, चकिया का चुनाव अब उस मोड़ पर पहुंच चुका है, जहां चुप्पी टूट चुकी है, सवाल खुलकर पूछे जा रहे हैं और संगठन के भीतर की राजनीति सड़क पर आ चुकी है। यह चुनाव अब सिर्फ पदों का नहीं रह गया है, बल्कि विश्वास, पारदर्शिता और जवाबदेही की अग्निपरीक्षा बन गया है।

SRVS Sikanderpur

बैठक से शुरू हुआ बवाल, सीधे सवालों से हिला मंच

व्यापार मंडल की बैठक उस वक्त पूरी तरह गरमा गई, जब ब्यापारियों और संगठन के शीर्ष पदाधिकारियों—जिला अध्यक्ष, चुनाव अधिकारी और जिला महामंत्री—के बीच सीधी नोकझोंक हो गई।
बैठक में माहौल ऐसा बन गया मानो औपचारिक चर्चा नहीं, बल्कि जनअदालत लग गई हो।

व्यापारियों ने एक सुर में सवाल उठाया—
???? “9 साल से व्यापार मंडल है, लेकिन जमीन पर दिखा क्या?”
???? “व्यापारियों के लिए कब और कहां खड़ा हुआ संगठन?”

इन सवालों ने मंच पर बैठे पदाधिकारियों को सकते में डाल दिया।

⚡ आंसू गुप्ता का तीखा हमला: ‘9 साल का हिसाब कौन देगा?’

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे तीखा और साफ सवाल उठाया भाजपा मंडल अध्यक्ष आंसू गुप्ता ने।
उन्होंने बिना लाग-लपेट कहा—

Dalimss Sunbeam Chakia

“अगर 9 साल में व्यापारियों की समस्याओं का हल नहीं निकला,
तो यह संगठन किस काम का?”

यह सवाल सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं था, बल्कि चकिया के ब्यापारियों की सामूहिक पीड़ा बनकर गूंजा।
यहीं से यह साफ हो गया कि यह चुनाव ‘सेटिंग’ नहीं, ‘सवाल’ से लड़ा जाएगा।

वोटर लिस्ट पर सबसे बड़ा विवाद: पहले पर्चा, बाद में सूची?

बैठक में जैसे ही चुनावी प्रक्रिया पर बात आई, मामला और गंभीर हो गया।
एक बयान ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़ा कर दिया—

Silver Bells Chakia

???? “जिनकी घोषणा हुई है, वही रहेंगे, दूसरा कोई नहीं रहेगा।”

इसके बाद कहा गया कि—
❗ “पर्चा भरने के बाद पैसा वापस नहीं होगा।”

यहीं से ब्यापारियों का गुस्सा फूट पड़ा।
सीधा सवाल पूछा गया—

???? “अगर हमने आपत्ति की, तो क्या हमारी पहचान ही निरस्त कर दी जाएगी?”

???? कानून क्या कहता है, और यहां क्या हो रहा है?

ब्यापारियों ने स्पष्ट शब्दों में कहा—

  • पहले फाइनल वोटर लिस्ट जारी होनी चाहिए
  • उसके बाद नामांकन (पर्चा दाखिल) होना चाहिए

लेकिन यहां स्थिति उलटी दिखी—

❌ फाइनल वोटर लिस्ट अभी तक जारी नहीं
❌ और पर्चा भरने का दबाव

कानूनी जानकारों के अनुसार—
⚖️ नामांकन निरस्तीकरण केवल कागजी कमी पर हो सकता है
⚖️ वोटर लिस्ट में नाम न होने के आधार पर पर्चा निरस्त करना विवादास्पद है

यहीं से ब्यापारियों ने कहना शुरू कर दिया—
“यह प्रक्रिया नहीं, फंडा लग रहा है।”

सदस्यता का पूरा आंकड़ा: 1261 से 1259 तक

चुनाव से पहले कुल 1261 ब्यापारियों ने सदस्यता ग्रहण की थी।
जांच के बाद—

  • 2 नाम निरस्त कर दिए गए
  • अब 1259 वैध सदस्य बचे हैं

???? इन्हीं 1259 ब्यापारियों के बीच यह चुनाव होना है
???? यही मतदाता नए नेतृत्व की किस्मत तय करेंगे

यह आंकड़ा अब चुनाव का केन्द्र बिंदु बन चुका है।

????️ नामांकन की तस्वीर: 29 पर्चे, 10 मैदान में

नामांकन प्रक्रिया में—

  • कुल 29 पर्चे वितरित किए गए
  • जिनमें से 10 प्रत्याशियों ने पर्चा दाखिल किया

जांच के बाद सभी नामांकन वैध पाए गए और सभी प्रत्याशियों की दावेदारी मंजूर कर ली गई।

???? अध्यक्ष पद: चार दावेदार, सीधी टक्कर

अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला सबसे रोचक है—

  1. अनिल केशरी
  2. विष्णु कुमार
  3. रवि गुप्ता
  4. शुभम मोदनवाल

चारों प्रत्याशी अपने-अपने समर्थन और रणनीति के साथ मैदान में हैं।

महामंत्री पद: संगठन की रीढ़ के लिए संघर्ष

महामंत्री पद के लिए—

  • मनोज चौहान
  • सुनील कुमार
  • सेराज अहमद

तीनों ही संगठन पर पकड़ और जमीनी पकड़ का दावा कर रहे हैं।

कोषाध्यक्ष पद: भरोसे की परीक्षा

कोषाध्यक्ष पद पर भी त्रिकोणीय मुकाबला है—

  • अंकित कुमार
  • धनश्याम कसौधन
  • सद्दाम

इस पद को लेकर व्यापारियों में चर्चा है कि
???? “इस बार सिर्फ चेहरा नहीं, नीयत देखी जाएगी।”

चुनाव प्रक्रिया में अधिकारी और कमेटी मौजूद

पूरी नामांकन प्रक्रिया के दौरान—

  • चुनाव अधिकारी चन्द्रेश्वर जायसवाल
  • जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकांत अग्रहरी
  • जिला स्तरीय चुनाव समिति

मौके पर मौजूद रही और प्रक्रिया को नियमों के तहत संपन्न कराने का दावा किया गया।

रील, पोस्ट और प्रचार: बाजार में चुनावी रंग

चकिया का बाजार अब सिर्फ कारोबार का केंद्र नहीं,
बल्कि चुनावी चर्चा का अखाड़ा बन चुका है।

  • हर दुकान पर चुनाव
  • हर चाय की दुकान पर विश्लेषण
  • हर मोबाइल पर रील

???? ख़बरी न्यूज़ का सवाल

ख़बरी न्यूज़ का सीधा सवाल है—

???? क्या यह चुनाव व्यापारियों की आवाज बनेगा?
???? या फिर वही पुरानी राजनीति दोहराई जाएगी?

1259 व्यापारी अब सिर्फ वोटर नहीं, निर्णायक बन चुके हैं।

????️ ख़बरी न्यूज़ निष्कर्ष

“इस बार चुनाव नहीं, इम्तिहान है—
और इम्तिहान में सिर्फ वही पास होगा,
जो हिसाब भी देगा और हक़ भी।”

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