350 बीघा में हरियाली का महाअभियान, 20 हजार हाथों ने रचा ग्रीन रेवोल्यूशन
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क वाराणसी ।
गंगा की धारा के किनारे, इतिहास और अध्यात्म की धरती पर… एक मार्च की सुबह कुछ ऐसा हुआ, जिसने सिर्फ उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे देश का सीना चौड़ा कर दिया।
प्रधानमंत्री के पूर्व में गोद लिए गए गांव डोमरी में 20 हजार लोगों ने एक साथ पौधरोपण कर दिया — और देखते ही देखते 350 बीघा जमीन पर हरियाली का सागर उमड़ पड़ा।
तीन लाख से अधिक पौधे…सिर्फ एक घंटे में…
और चीन का पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड ध्वस्त!
यह सिर्फ पौधरोपण नहीं था, यह एक भावनात्मक क्रांति थी।
🌿 “एक पेड़ मां के नाम” – भावनाओं का महाअभियान
जब नरेंद्र मोदी ने “एक पेड़ मां के नाम” का आह्वान किया था, तब शायद किसी ने नहीं सोचा था कि वाराणसी इस अभियान को विश्व रिकॉर्ड में बदल देगा।
मेयर अशोक तिवारी ने बताया कि यह रिकॉर्ड उसी आह्वान की बानगी है।
हर सेक्टर का नाम काशी के घाटों के नाम पर रखा गया।
कहीं “दशाश्वमेध सेक्टर”, कहीं “अस्सी सेक्टर”…
यह पौधरोपण सिर्फ प्रशासनिक कार्यक्रम नहीं था — यह काशी की आत्मा का विस्तार था।
🌱 सुबह 8 बजे… और शुरू हुआ इतिहास
सुबह की हल्की धूप…
गंगा की ठंडी हवा…
और 20 हजार लोग हाथों में पौधे लेकर एक साथ झुकते हुए।
करीब एक घंटे तक चला यह महाअभियान।
खबर लिखे जाने तक 2,35,000 पौधे रोपे जा चुके थे, और अंतिम संख्या 3,17,120 तक पहुंच गई।
यह आंकड़ा नहीं, यह संकल्प था।

🌳 मियावाकी फॉरेस्ट: 27 देशी प्रजातियों का संगम
इस पूरे प्रोजेक्ट में मियावाकी तकनीक अपनाई गई है — यानी घना, तेजी से विकसित होने वाला शहरी वन।
यहां लगाए गए प्रमुख पौधे:
- शीशम
- अर्जुन
- बांस
- कचनार
- महुआ
- हरसिंगार
शीशम और अर्जुन को प्राथमिकता इसलिए दी गई क्योंकि ये नदी किनारे के वातावरण और अस्थायी जलभराव को सहन कर सकते हैं।
यह कोई साधारण बगीचा नहीं…
यह भविष्य का आत्मनिर्भर इको-सिस्टम है।
🌺 फल, फूल और औषधीय खेती से आत्मनिर्भरता
यहां सिर्फ पेड़ नहीं लगाए गए हैं, बल्कि आर्थिक मॉडल भी तैयार किया गया है।
तीसरे वर्ष से ही आम, अमरूद, पपीता, अनार जैसे फलदार वृक्ष आय देने लगेंगे।
औषधीय पौधों में:
- अश्वगंधा
- शतावरी
- गिलोय
- एलोवेरा
फूलों में:
- गुलाब
- चमेली
- पारिजात
नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने बताया कि मध्यप्रदेश की एमबीके संस्था से समझौता हुआ है।
राजस्व अनुमान:
- तीसरे वर्ष: ₹2 करोड़
- पांचवें वर्ष: ₹5 करोड़
- छठे वर्ष: ₹6 करोड़
- सातवें वर्ष: ₹7 करोड़ प्रतिवर्ष
पांच वर्षों में कुल अनुमानित आय: ₹19.80 करोड़
सोचिए…
जहां कभी बंजर जमीन थी, वहां अब करोड़ों की हरियाली उगेगी।
💧 सिंचाई की आधुनिक व्यवस्था

- 60 पावन गंगा घाटों की प्रतिकृति बना ‘शहरी वन’
- इस ‘शहरी वन’ की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बनावट और वैचारिक पृष्ठभूमि है। पूरे वन क्षेत्र को 60 अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के सुप्रसिद्ध गंगा घाटों जैसे -दशाश्वमेध, ललिता घाट, नया घाट, मणिकर्णिका घाट, केदार घाट, चौशट्टी घाट, मानमंदिर घाट और शीतला घाट के नाम पर रखा गया है। यह बनावट ऐसी है कि भविष्य में जब ये पौधे वृक्ष बनेंगे, तो गंगा किनारे एक हरा-भरा ‘मिनी काशी’ का स्वरूप नजर आएगा। प्रत्येक सेक्टर में लगभग 4,000 से अधिक पौधे लगाए गए हैं। इनमें शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों के साथ-साथ आम, अमरूद और पपीता जैसे फलदार वृक्षों और अश्वगंधा, शतावरी व गिलोय जैसी औषधियों को प्राथमिकता दी गई है।

गर्मी की प्रचंड लू से पौधों को बचाने के लिए:
- 10,827 मीटर पाइपलाइन
- 10 बोरवेल
- 360 रेन गन स्प्रिंकलर सिस्टम
मार्च से जून तक सप्ताह में तीन बार 45 मिनट का विशेष सिंचाई शेड्यूल तय किया गया है।
यह योजना सिर्फ पौधे लगाने की नहीं, उन्हें जीवित रखने की भी है।
🛤 चार किलोमीटर पाथवे – ग्रीन टूरिज्म की नई पहचान
पूरे वन क्षेत्र में चार किलोमीटर का पाथवे विकसित किया जा रहा है।
कल तक जो जमीन वीरान थी,
कल वहां बच्चे साइकिल चलाएंगे,
परिवार सुबह की सैर करेंगे,
और काशी का नया “ग्रीन स्पॉट” दुनिया के सामने होगा।
🏛 सर्किट हाउस में होगा सम्मान
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सर्किट हाउस में इस ऐतिहासिक कार्यक्रम का प्रस्तुतिकरण देखेंगे और प्रमाण पत्र प्रदान करेंगे।
जिला प्रभारी मंत्री सुरेश खन्ना ने पहले ही निरीक्षण कर तैयारियां देखी थीं।
यह सिर्फ प्रशासनिक फाइल नहीं…
यह उत्तर प्रदेश की उपलब्धि है।
🌍 चीन को चुनौती, दुनिया को संदेश
अक्सर विश्व रिकॉर्ड की चर्चा चीन के नाम से जुड़ती है।
लेकिन इस बार काशी ने बता दिया —
जब 20 हजार लोग एक साथ संकल्प लेते हैं,
तो रिकॉर्ड खुद झुक जाता है।
यह पर्यावरण की लड़ाई है।
यह ग्लोबल वार्मिंग के खिलाफ काशी का जवाब है।
मार्च का पहला सप्ताह क्यों महत्वपूर्ण?
विशेषज्ञों के अनुसार:
- जड़ें मानसून से पहले मजबूत हो जाएंगी
- मिट्टी का कटाव रुकेगा
- अप्रैल-मई की गर्मी से पहले पौधे ढल जाएंगे
यह वैज्ञानिक दृष्टि से भी परफेक्ट टाइमिंग थी।
यह सिर्फ पौधरोपण नहीं… यह भावनाओं का महासंग्राम
किसी मां ने अपने बेटे के नाम पेड़ लगाया…किसी छात्र ने अपने भविष्य के नाम…
किसी किसान ने अपनी मिट्टी के नाम…जब 20 हजार लोग एक साथ झुकते हैं, तो धरती भी आशीर्वाद देती है।
काशी ने दिखा दिया —
विकास और पर्यावरण साथ-साथ चल सकते हैं।
📊 परियोजना एक नजर में
- कुल पौधे: 3,17,120
- भूमि: 350 बीघा
- पाइपलाइन: 10,827 मीटर
- बोरवेल: 10
- रेन गन: 360
- अनुमानित आय (5 वर्ष): ₹19.80 करोड़
- पाथवे: 4 किलोमीटर
🔥 खबरी न्यूज का संदेश
डोमरी की यह हरियाली सिर्फ रिकॉर्ड नहीं है —यह आने वाली पीढ़ियों के लिए ऑक्सीजन बैंक है।
आज अगर हर शहर, हर गांव यह संकल्प ले ले,तो भारत दुनिया को पर्यावरण नेतृत्व सिखा सकता है।
काशी ने पहला कदम उठा लिया है।अब बारी पूरे देश की है।
🌳 एक पेड़… एक परिवार… एक भविष्य।

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