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बुढ़वा मंगल पर रंग, रस और राग का महासंगम

डॉ. विनय प्रकाश तिवारी के भव्य होली मिलन में गुलाल-अबीर से सराबोर हुआ मुगलसराय, फाग गीतों पर झूम उठा पूरा सभागार

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खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क मुगलसराय‚चंदौली।
फागुन का महीना… हवा में घुली अबीर-गुलाल की खुशबू… ढोलक-मंजीरे की थाप… और चेहरों पर खिली आत्मीय मुस्कान। ऐसा लग रहा था मानो पूरा शहर एक ही रंग में रंग गया हो। बुढ़वा मंगल के पावन अवसर पर जब डॉ. विनय प्रकाश तिवारी, प्रबंधक – डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल, बिशुनपुरा ने मुगलसराय स्थित स्प्रिंग स्काई होटल में भव्य होली मिलन समारोह का आयोजन किया, तो यह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि संस्कृति, परंपरा और सामाजिक सौहार्द का जीवंत उत्सव बन गया।

कार्यक्रम की शुरुआत से लेकर समापन तक हर पल ऐसा लगा जैसे फागुन खुद उतरकर सभागार में नाच रहा हो।
जहाँ देखिए वहाँ लाल, गुलाबी, हरे और पीले रंगों की उड़ती अबीर, और उन रंगों के बीच खिलती मुस्कानें – यह दृश्य अपने आप में अद्भुत था।

SRVS Sikanderpur

जब फाग गीतों ने जगाई फागुन की मस्ती

जैसे ही मंच पर अरुण तिवारी और उनकी टीम ने पारंपरिक फाग गीतों की शुरुआत की, पूरा माहौल अचानक बदल गया। ढोलक की थाप गूंजी तो लगा मानो गांव की चौपाल शहर में उतर आई हो।

“
होरी खेले रघुवीरा अवध में…
”

गीत की यह पहली पंक्ति जैसे ही गूंजी, सभागार में बैठे लोग खुद को रोक नहीं पाए।
गुलाल उड़ने लगा, तालियाँ गूंजने लगीं और लोग नाचते-गाते एक-दूसरे को रंग लगाने लगे।

कुछ बुजुर्ग मुस्कुराते हुए बोले –
“ई त सच्चे में पुरनका फागुन के याद दिला देहलस… मन गदगद हो गइल।”

Dalimss Sunbeam Chakia

वहीं युवा पीढ़ी भी पूरे जोश के साथ नाचती दिखी।
ऐसा लग रहा था मानो पीढ़ियों के बीच का अंतर भी रंगों में घुल गया हो।

आध्यात्मिक आभा से जगमगाया समारोह

इस भव्य आयोजन की सबसे बड़ी विशेषता रही
श्री श्री 1008 श्री महामंडलेश्वर कृपानंद जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति।

Silver Bells Chakia

जैसे ही महाराज जी मंच पर पहुंचे, वातावरण में एक अलग ही आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस होने लगी।

महाराज जी ने जब अपने मधुर स्वर में भक्ति और फाग के गीत गाए, तो पूरा सभागार मंत्रमुग्ध हो गया।

उनकी आवाज में ऐसा आकर्षण था कि लोग कुछ क्षणों के लिए रंग-गुलाल की मस्ती से निकलकर भक्ति के रंग में डूब गए।

महाराज जी ने अपने आशीर्वचन में कहा—

“होली केवल रंगों का उत्सव नहीं है। यह मन के मैल को मिटाने और समाज में प्रेम तथा सद्भाव को बढ़ाने का पर्व है। जब दिल साफ हो जाए, तब ही असली होली होती है।”

उनके इन शब्दों ने उपस्थित लोगों के मन में आध्यात्मिक चेतना की नई लहर पैदा कर दी।

सम्मान और आत्मीयता की परंपरा

कार्यक्रम के दौरान डॉ. विनय प्रकाश तिवारी ने सभी अतिथियों का गुलाल लगाकर स्वागत किया और उन्हें अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

इस दौरान उनका व्यक्तित्व केवल एक आयोजक का नहीं बल्कि एक सामाजिक सूत्रधार का प्रतीत हो रहा था।

उन्होंने कहा—

“होली का पर्व हमें सिखाता है कि समाज में संवाद और भाईचारा कितना जरूरी है। ऐसे कार्यक्रम लोगों को जोड़ते हैं और समाज को मजबूत बनाते हैं।”

उनके इस भावपूर्ण वक्तव्य पर पूरे सभागार में तालियों की गूंज सुनाई दी।

जब पत्रकार, डॉक्टर और समाजसेवी एक मंच पर दिखे

इस समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें
जिले के अनेक प्रतिष्ठित लोग शामिल हुए।

उपस्थित प्रमुख लोगों में शामिल रहे—

  • डॉ. के.एन. पांडेय – मैक्सवेल हॉस्पिटल
  • डॉ. गौतम त्रिपाठी – सूर्या हॉस्पिटल
  • शशि शंकर सिंह – एडवोकेट
  • राजेंद्र पांडेय – एडवोकेट
  • जिला पंचायत सदस्य संजय पांडेय
  • चंदौली प्रेस क्लब के सभी सदस्य
  • जिले के अनेक पत्रकार, समाजसेवी और सम्मानित नागरिक

इन सभी की उपस्थिति ने समारोह को सामाजिक एकता का प्रतीक बना दिया।

150 से अधिक लोगों की उपस्थिति, बना ऐतिहासिक आयोजन

इस भव्य आयोजन में 150 से अधिक लोगों की उपस्थिति रही।

हर व्यक्ति के चेहरे पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी।
कहीं लोग सेल्फी ले रहे थे, कहीं फाग गीतों पर नृत्य कर रहे थे, तो कहीं पुराने दोस्त वर्षों बाद गले मिलते नजर आए।

एक बुजुर्ग ने मुस्कुराते हुए कहा—

“आज त लग रहल बा कि पूरा शहर एके परिवार बन गइल बा… ई होली के असली मजा ह।”

शानदार संयोजन और मीडिया की भूमिका

इस आयोजन को सफल बनाने में न्यू मीडिया कॉम, रविनगर के संचालक सत्य प्रकाश तिवारी और प्रसिद्ध हास्य कवि रोहित पांडेय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।

दोनों ने पूरे कार्यक्रम का संयोजन इतने सुंदर ढंग से किया कि
कार्यक्रम का हर पल व्यवस्थित और यादगार बन गया।

वहींखबरी न्यूज‚ पूर्वांचल टाइम्स और UP18 न्यूज़ ने मीडिया पार्टनर के रूप में इस आयोजन को समाज तक पहुँचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया।

फागुन की रात और यादों का रंग

कार्यक्रम के अंतिम चरण में जब ढोलक की थाप धीमी हुई और लोग धीरे-धीरे विदा होने लगे, तब भी उनके चेहरों पर मुस्कान बनी रही।

लोग एक-दूसरे से कहते सुनाई दिए—

“अइसन होली मिलन त बरसों बाद देखे के मिलल…”

वाकई, यह समारोह केवल एक कार्यक्रम नहीं बल्कि फागुन की एक यादगार कहानी बन गया।

सामाजिक सौहार्द का सुंदर संदेश

बुढ़वा मंगल के इस अवसर पर आयोजित यह भव्य होली मिलन समारोह यह संदेश देकर गया कि

रंग केवल चेहरे को नहीं, दिलों को भी रंग देते हैं।

जब समाज के लोग एक मंच पर मिलते हैं,
हँसते हैं, गाते हैं, गले मिलते हैं—
तब समाज मजबूत होता है और रिश्ते गहरे होते हैं।

और सच कहें तो—

“फागुन के रंग में भींजल ई शाम, मुगलसराय के यादों में बरसों तक जिंदा रही।”

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