- “₹100 के नोट से चल रहा था करोड़ों का खेल!” —
चंदौली | खबरी न्यूज़ नेशनल नेटवर्क
कभी आपने सोचा है कि आपके जेब में रखा ₹100 का नोट असली है या नकली? 🤯
चंदौली के अलीनगर में जो खुलासा हुआ है, उसने हर आम आदमी की नींद उड़ा दी है… क्योंकि यहां एक ऐसा गिरोह पकड़ा गया है जो घर के कमरे को ही “जाली नोट फैक्ट्री” बना चुका था!
“कमरे में छप रहा था देश की अर्थव्यवस्था पर हमला”
थाना अलीनगर और स्वाट/सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए एक बड़े जाली नोट गिरोह का पर्दाफाश किया है।
इस ऑपरेशन में 1 शातिर आरोपी गिरफ्तार हुआ, जबकि 2 बाल अपचारी पुलिस अभिरक्षा में लिए गए।
पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि मानसनगर गेट के पास एक मकान की पहली मंजिल पर जाली नोट छापे जा रहे हैं।
बस फिर क्या था… पुलिस टीम ने बिना देर किए दबिश दी — और जो सामने आया, वो चौंकाने वाला था!
“YouTube और Instagram बना अपराध का गुरुकुल!”
पूछताछ में आरोपी ने जो बताया, वो और भी खतरनाक है…
👉 उसने जाली नोट बनाना YouTube और Google से सीखा
👉 Instagram के जरिए उसकी मुलाकात एक सप्लायर से हुई
👉 उसी नेटवर्क से मशीनें और सामग्री मिली
👉 ₹3500 के नकली नोट देकर ₹1000 असली वसूलता था!
💥 यानी सोशल मीडिया अब सिर्फ मनोरंजन नहीं… बल्कि अपराध की नई “टेक्नोलॉजी लैब” बनता जा रहा है!

बरामदगी ने खोले होश उड़ा देने वाले राज
जब पुलिस ने कमरे की तलाशी ली तो ऐसा लगा जैसे कोई मिनी प्रिंटिंग प्रेस चल रही हो…
🔻 55 जाली नोट (₹100 के)
🔻 452 अर्धनिर्मित नोट
🔻 वाटरमार्क पेपर (₹100, ₹200, ₹500)
🔻 3 हाईटेक प्रिंटर (Epson, Canon)
🔻 लैमिनेटर, लाइट बॉक्स, हेयर ड्रायर
🔻 300 शीट बॉन्ड पेपर, 10 रोल बटर पेपर
🔻 Dell लैपटॉप जिसमें ₹200 और ₹500 के नोट का डिजाइन मौजूद!
👉 साफ है — ये कोई छोटा मोटा काम नहीं, बल्कि संगठित जालसाजी का पूरा सेटअप था!
पुलिस की सटीक रणनीति और ताबड़तोड़ एक्शन
इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया गया उच्च अधिकारियों के निर्देशन में:
🔹 पुलिस अधीक्षक — आदित्य लांग्हे
🔹 एडीजी वाराणसी जोन — पीयूष मोर्डिया
🔹 डीआईजी — वैभव कृष्ण
और जमीनी स्तर पर टीम का नेतृत्व किया:
👉 प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार पाण्डेय
👉 स्वाट टीम प्रभारी रामजनम यादव
👏 यह ऑपरेशन दिखाता है कि अगर इरादा मजबूत हो तो अपराध कितना भी “डिजिटल” क्यों न हो, पुलिस की पकड़ से बच नहीं सकता!
“खतरे की घंटी: आपकी जेब में भी हो सकता है नकली नोट!”
इस घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल —
👉 क्या हम सुरक्षित हैं?
👉 क्या हर नोट पर भरोसा किया जा सकता है?
📌 विशेषज्ञों के अनुसार:
- नकली नोट अब इतने हाई क्वालिटी में बन रहे हैं कि आम आदमी पहचान नहीं पाता
- छोटे मूल्य (₹100) के नोट का इस्तेमाल इसलिए, ताकि शक कम हो
👉 यानी यह गिरोह “लो-रिस्क, हाई-सर्कुलेशन” मॉडल पर काम कर रहा था!
समाज के लिए बड़ा संदेश
यह सिर्फ एक गिरफ्तारी नहीं… बल्कि एक चेतावनी है
👉 बच्चों और युवाओं का सोशल मीडिया के जरिए अपराध की ओर झुकाव
👉 तकनीक का गलत इस्तेमाल
👉 आसान पैसे की लालच
यह सब मिलकर समाज को अंदर से खोखला कर रहे हैं।

📢 खबरी न्यूज़ की अपील
👉 हर नोट को ध्यान से जांचें
👉 संदिग्ध गतिविधि तुरंत पुलिस को बताएं
👉 बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें
🧾 दर्ज हुआ मुकदमा
इस मामले में थाना अलीनगर में
मु0अ0सं0 182/26 धारा 178/179/180/181 BNS के तहत मुकदमा दर्ज कर आगे की जांच जारी है।
“खुलासा अभी बाकी है…”
पुलिस अब उस Instagram कनेक्शन की तलाश में जुटी है, जिसने इस पूरे नेटवर्क को खड़ा किया।
👉 क्या यह गिरोह सिर्फ चंदौली तक सीमित है?
👉 या इसके तार किसी बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क से जुड़े हैं?
आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे संभव हैं!
खबरी न्यूज़ का बड़ा सवाल
“जब घर-घर में इंटरनेट है, तो क्या अपराध भी अब हर घर तक पहुंच चुका है?”
✍️ Editor Desk
Editor-in-Chief: K.C. Shrivastava (Advocate)







