हरियाणा के फरीदाबाद से जुड़े एक बड़े जासूसी नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें पाकिस्तान के लिए काम करने वाले एक गैंग के सदस्य को गाजियाबाद पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस मामले ने सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है और देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। गिरफ्तार आरोपी की पहचान नौशाद अली उर्फ लालू के रूप में हुई है, जो पिछले कुछ महीनों से आम नागरिक की तरह जीवन जीते हुए गुप्त गतिविधियों में शामिल था।
आरोपी की पहचान और गिरफ्तारी
गाजियाबाद पुलिस ने नौशाद अली उर्फ लालू को एक विशेष अभियान के तहत गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार, वह पिछले तीन महीनों से एक पेट्रोल पंप के पास पंचर बनाने की दुकान चला रहा था। बाहर से देखने पर वह एक साधारण मजदूर या छोटा व्यापारी लगता था, लेकिन उसकी गतिविधियां बेहद संदिग्ध थीं।
डीसीपी सिटी धवल जायसवाल के मुताबिक, नौशाद एक संगठित जासूसी गिरोह का हिस्सा था, जो देश के संवेदनशील स्थानों की जानकारी पाकिस्तान तक पहुंचा रहा था। पुलिस को उसके खिलाफ पुख्ता सबूत मिलने के बाद ही कार्रवाई की गई।
कैसे करता था जासूसी का काम
पुलिस जांच में सामने आया है कि नौशाद रेलवे स्टेशनों, सुरक्षा बलों के कैंप और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों की फोटो और वीडियो बनाता था। वह इन संवेदनशील जानकारियों को व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स को भेजता था।
जांच में यह भी पता चला है कि उसे हर फोटो या वीडियो के बदले 4 से 6 हजार रुपये तक मिलते थे। इस तरह वह कम समय में अच्छा पैसा कमा रहा था, जिससे वह इस अवैध गतिविधि में लगातार सक्रिय बना रहा।
गैंग का नेटवर्क और सरगना
पुलिस के अनुसार, इस जासूसी नेटवर्क का सरगना मेरठ का रहने वाला सुहेल है। वह ही पूरे गिरोह को संचालित करता था और नए लोगों को जोड़ने का काम करता था।
अब तक इस मामले में 22 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जो अलग-अलग राज्यों से जुड़े हुए हैं। यह नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम कर रहा था और हर सदस्य को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई थी।
नौशाद और अन्य आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि उन्हें इस नेटवर्क में सुहेल ने ही जोड़ा था और उन्हें काम के बदले पैसे का लालच दिया गया था।
अन्य गिरफ्तार आरोपी
इस मामले में पुलिस ने नौशाद के अलावा औरंगाबाद की रहने वाली मीरा को भी गिरफ्तार किया है। इसके अलावा एक नाबालिग को भी हिरासत में लिया गया है, जिसकी भूमिका की जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, ये सभी आरोपी एक ही व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़े हुए थे, जहां से उन्हें निर्देश मिलते थे। यह ग्रुप ही उनके लिए कम्युनिकेशन का मुख्य माध्यम था।
पुलिस की आगे की कार्रवाई
गाजियाबाद पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गैंग के और कितने सदस्य अभी सक्रिय हैं और उन्होंने अब तक कितनी संवेदनशील जानकारी लीक की है।
इसके साथ ही, पुलिस डिजिटल सबूतों को भी खंगाल रही है, जिसमें मोबाइल फोन, व्हाट्सएप चैट और बैंक ट्रांजैक्शन शामिल हैं। इनसे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि पैसे का लेन-देन कैसे होता था और इसके पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
आम लोगों के लिए चेतावनी
इस घटना के बाद पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों ने आम जनता से सतर्क रहने की अपील की है। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को देने के लिए कहा गया है।
अधिकारियों का कहना है कि यदि कोई व्यक्ति असामान्य तरीके से फोटो या वीडियो बना रहा हो, खासकर संवेदनशील स्थानों पर, तो उसकी सूचना देना बेहद जरूरी है।
Pakistan spying gang India
