- “डिलिवरी के बाद डेथ!” — चकिया में अस्पताल बना मौत का अड्डा!
- ऑपरेशन थिएटर या ‘ओपन डेथ चैंबर’? प्रसूता की मौत से फूटा गुस्सा!
- मां बनी, फिर लाश बनी! चकिया के अवैध अस्पताल का काला सच!
- ऑक्सीजन नहीं, जिम्मेदारी नहीं — और चली गई एक जान!
- ‘नीम हकीम’ का खेल खत्म? डिलिवरी के बाद मौत, संचालक फरार!
- जन्म की जगह जनाजा! चकिया में स्वास्थ्य माफिया बेनकाब!
- रेफर के नाम पर मौत की डील? सवालों के घेरे में पूरा सिस्टम!
- मां की चीख, बच्चे की किलकारी… और अस्पताल की खामोशी!
- सील हुआ अस्पताल, लेकिन क्या सील होगा भ्रष्ट तंत्र?
डिलिवरी के बाद प्रसूता की संदिग्ध मौत, अवैध अस्पतालों पर फिर खड़े हुए सवाल
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया | जनपद: चंदौली
चकिया की धरती, जहां हर नवजात के रोने की आवाज़ खुशियों का संदेश मानी जाती है… वहीं इस बार एक मासूम किलकारी के साथ उठी ऐसी सिसकी, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया। दुबेपुर स्थित एक निजी सर्जिकल सेंटर में प्रसव के बाद एक प्रसूता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जड़ों तक सवाल खड़े कर दिए हैं।
बरौझी गाँव की रहने वाली रिंका कुमारी को सोमवार को प्रसव पीड़ा होने पर परिजन दुबेपुर स्थित एक निजी चिकित्सालय में लेकर पहुंचे। परिवार की उम्मीद थी कि मां और बच्चा दोनों सुरक्षित घर लौटेंगे। सर्जिकल सेंटर में ऑपरेशन के जरिए बच्चे का जन्म तो हो गया… लेकिन शाम होते-होते हालात ने भयावह मोड़ ले लिया।


❗ हालत बिगड़ी, ऑक्सीजन नहीं… और रेफर कर दिया गया?
परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद प्रसूता की हालत लगातार बिगड़ रही थी। सांस लेने में दिक्कत, अत्यधिक कमजोरी और रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दे रहे थे। लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से कोई प्रभावी उपचार नहीं किया गया।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होने लगी, तब अस्पताल ने बिना पर्याप्त ऑक्सीजन सपोर्ट और बिना किसी विशेषज्ञ डॉक्टर की निगरानी के महिला को वाराणसी रेफर कर दिया।
परिजनों का कहना है —
“अगर समय रहते सही इलाज और ऑक्सीजन सपोर्ट मिलता तो शायद हमारी बहन/पत्नी आज ज़िंदा होती।”
वाराणसी पहुंचते ही डॉक्टरों ने महिला को मृत घोषित कर दिया। इसके बाद जो हुआ, वह किसी फिल्मी दृश्य से कम नहीं था।
🔥 अस्पताल में हंगामा, संचालक फरार
मौत की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण दुबेपुर स्थित अस्पताल पहुंच गए। आक्रोश फूट पड़ा। चीख-पुकार, सवालों की बौछार और न्याय की मांग ने माहौल को गरमा दिया। लेकिन जब जवाब देने का समय आया — अस्पताल संचालक मौके से फरार हो गया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह अस्पताल लंबे समय से “नीम हकीमों” के जरिए संचालित हो रहा था। योग्य सर्जन और एनेस्थेटिस्ट की अनुपस्थिति में बड़े-बड़े ऑपरेशन किए जा रहे थे।
⚖ स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल
यह कोई पहला मामला नहीं है जब चकिया क्षेत्र में अवैध या अर्ध-अवैध चिकित्सालयों पर उंगलियां उठी हों। सवाल यह है कि:
- क्या इस अस्पताल के पास वैध पंजीकरण था?
- क्या यहां योग्य MBBS/MD डॉक्टर तैनात थे?
- क्या ऑपरेशन थिएटर मानकों के अनुरूप था?
- क्या एम्बुलेंस में ऑक्सीजन और ICU सपोर्ट उपलब्ध था?
सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद चकिया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के चिकित्साधिकारी ने अस्पताल को सील कर दिया। उन्होंने बताया कि उन्हें CMO स्तर से सूचना प्राप्त हुई थी, जिसके बाद कार्रवाई की गई।
लेकिन बड़ा सवाल यह है —
जब शिकायतें पहले से थीं, तो कार्रवाई पहले क्यों नहीं हुई?
🏥 अवैध अस्पतालों और जांच केंद्रों का जाल
चकिया और आसपास के ग्रामीण इलाकों में दर्जनों निजी क्लीनिक और सर्जिकल सेंटर संचालित हो रहे हैं। कई के पास:
- वैध लाइसेंस नहीं
- योग्य विशेषज्ञ नहीं
- आपातकालीन उपकरणों की कमी
- और न ही नियमित निरीक्षण
फिर भी खुलेआम सर्जरी, डिलिवरी और गंभीर रोगों का इलाज किया जा रहा है।
स्वास्थ्य विभाग की “कागजी जांच” और “औपचारिक निरीक्षण” पर अब आम जनता सवाल उठा रही है।

💔 एक परिवार उजड़ा… जवाबदेह कौन?
रिंका कुमारी अब इस दुनिया में नहीं हैं। पीछे रह गया है एक नवजात शिशु… जिसकी पहली सांस के साथ ही उसकी मां की सांसें थम गईं। पति अमन कुमार और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
यह सिर्फ एक परिवार का दर्द नहीं है —
यह पूरे सिस्टम की नाकामी का आईना है।
📢 जनता की मांग: एफआईआर, गिरफ्तारी और कड़ी कार्रवाई
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों की मांग है कि:
- अस्पताल संचालक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज हो।
- पूरे मामले की मजिस्ट्रियल जांच हो।
- चकिया क्षेत्र के सभी निजी अस्पतालों और जांच केंद्रों की विशेष जांच हो।
- दोषी अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो, जिन्होंने लापरवाही बरती।
🛑 सवाल जो जवाब मांगते हैं
- क्या गरीब और ग्रामीण महिलाओं की जान इतनी सस्ती है?
- क्या स्वास्थ्य विभाग की आंखें सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?
- क्या बिना संसाधन के सर्जरी करना अपराध नहीं है?
अगर समय रहते सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो ऐसे “मौत के अस्पताल” और कितनी जिंदगियां लीलेंगे?
🔎 प्रशासन के लिए चेतावनी
चकिया की जनता अब चुप नहीं बैठेगी। यह मामला केवल एक अस्पताल का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की जवाबदेही का है।
यदि अवैध अस्पतालों और जांच केंद्रों पर तत्काल व्यापक अभियान नहीं चलाया गया, तो यह आग और भड़केगी।
✍खबरी न्यूज कहता है –
एक नवजात की पहली किलकारी… और उसी क्षण मां की अंतिम सांस।
यह त्रासदी किसी एक परिवार की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की है जो समय रहते जागी नहीं।
अब देखना यह है कि यह खबर भी “कुछ दिन की सुर्खी” बनकर रह जाएगी…
या फिर सच में स्वास्थ्य माफियाओं पर नकेल कसेगी।
चकिया की यह घटना सिर्फ एक समाचार नहीं —
यह चेतावनी है।







