खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क
चकिया‚चंदौली। Bharatmala Project -विकास की रफ्तार के नाम पर दौड़ती परियोजनाओं के बीच एक और जिंदगी कुचल गई… और पीछे छोड़ गई सवाल, आंसू और सिस्टम की खामोशी। देर रात चंदौली जनपद के फिरोजपुर गांव के पास हुआ एक दर्दनाक हादसा अब सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि मजदूरों की असुरक्षित जिंदगी का आईना बन चुका है।

भारत सरकार की महत्वाकांक्षी भारतमाला परियोजना के तहत चल रहे मिट्टी खुदाई कार्य के दौरान एक ट्रैक्टर अचानक पलट गया… और उसी के नीचे दबकर चालक रोहित यादव ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
रात की खामोशी को चीरती चीखें और अफरा-तफरी का वह मंजर आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर रहा है।
रोज़ी-रोटी की जंग बनी आखिरी सफर
मृतक की पहचान मैनपुरी जिले के कुर्रा थाना क्षेत्र के पृथ्वीपुर निवासी रोहित यादव (पुत्र महिपाल यादव) के रूप में हुई है। वह अपने परिवार की जिम्मेदारियों को निभाने के लिए सैकड़ों किलोमीटर दूर चंदौली आया था। लेकिन किसे पता था कि यह कमाने निकला बेटा अब कभी घर नहीं लौटेगा…
रोहित सिर्फ एक मजदूर नहीं था… वह अपने बूढ़े मां-बाप की उम्मीद था, परिवार का सहारा था… और अब वही सहारा हमेशा के लिए टूट चुका है।

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कैसे हुआ वो खौफनाक हादसा?
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रोहित यादव ट्रैक्टर पर लेवलर लादकर खुदाई स्थल की ओर जा रहा था। रास्ता बेहद उबड़-खाबड़ और असंतुलित था। अचानक ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ा… और देखते ही देखते वह पलट गया।

भारी ट्रैक्टर के नीचे दबते ही रोहित की दर्दनाक चीख निकली… लेकिन कुछ ही पलों में सब कुछ खत्म हो गया।
मौके पर मौजूद मजदूरों और स्थानीय लोगों ने जान बचाने की पूरी कोशिश की। किसी तरह ट्रैक्टर हटाया गया और रोहित को तत्काल जिला संयुक्त चिकित्सालय चकिया ले जाया गया… लेकिन वहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
अस्पताल परिसर में जो मंजर था, वह किसी को भी अंदर तक झकझोर देने वाला था—रोते-बिलखते साथी, बेसुध परिजन और हर आंख में एक ही सवाल… “क्या उसकी मौत टाली नहीं जा सकती थी?”
परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
रोहित की मौत की खबर जैसे ही उसके गांव पहुंची, पूरे इलाके में मातम छा गया। मां की चीखें, पिता की खामोशी और घर के कोने-कोने में पसरा सन्नाटा… यह किसी भी शब्द से परे दर्द है।
जिस बेटे के सहारे घर चल रहा था, आज उसी की अर्थी उठाने की नौबत आ गई। यह सिर्फ एक मौत नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार का भविष्य खत्म होने जैसा है।
पुलिस जांच में जुटी, लेकिन सवाल कायम
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में ट्रैक्टर के अनियंत्रित होकर पलटने को कारण बताया जा रहा है।
लेकिन बड़ा सवाल यह है—
👉 क्या यह सिर्फ एक हादसा है?
👉 या फिर सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी का नतीजा?
सिस्टम की लापरवाही या मजदूरों की मजबूरी ?
यह पहली बार नहीं है जब किसी बड़े प्रोजेक्ट में इस तरह की मौत हुई हो। हर बार जांच होती है, कागजों में रिपोर्ट बनती है… और फिर सब कुछ वैसे ही चलता रहता है।
क्या मजदूरों को सुरक्षा उपकरण दिए जाते हैं?
क्या मशीनों की नियमित जांच होती है?
क्या खतरनाक रास्तों को सुरक्षित बनाया जाता है?
अगर इन सवालों का जवाब “हां” है, तो फिर हर बार मौत क्यों होती है?
“Development vs Life” – आखिर कब बदलेगा यह समीकरण?
देश विकास कर रहा है… सड़कें बन रही हैं… परियोजनाएं पूरी हो रही हैं… लेकिन इन सबके बीच मजदूरों की जान इतनी सस्ती क्यों हो गई है?
हर बार एक गरीब मजदूर ही क्यों कुर्बान होता है?
क्या विकास की कीमत हमेशा किसी की जिंदगी ही होगी?
📢 खबरी की अपील
खबरी न्यूज़ प्रशासन और संबंधित विभागों से मांग करता है कि—
✔️ इस मामले की निष्पक्ष जांच हो
✔️ दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए
✔️ मृतक के परिवार को उचित मुआवजा और सरकारी सहायता दी जाए
एक चेतावनी, जिसे नजरअंदाज करना भारी पड़ेगा…
Bharatmala Project यह हादसा सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है… यह एक चेतावनी है। अगर अब भी सुरक्षा को प्राथमिकता नहीं दी गई, तो ऐसे हादसे यूं ही गरीब मजदूरों की जिंदगियां निगलते रहेंगे।
आज रोहित गया है… कल कौन?
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