Biogas Plant in Chandauli-“अब गोबर देगा उजाला, चूल्हे से निकलेगी आत्मनिर्भरता की लौ!”
“LPG नहीं… अब गांव में ‘गोबर गैस’ का जलवा!”
खबरी नेशनल न्यूज नेटवर्क चंदौली
Editor-in-Chief
Adv. K.C. Shrivastava | Khabari News
Biogas Plant in Chandauli-जहां एक तरफ देश के कई हिस्सों में महंगे LPG सिलेंडर आम आदमी की जेब पर बोझ बने हुए हैं, वहीं चंदौली के एक छोटे से गांव एकौनी से निकली एक बड़ी कहानी अब पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणा बन रही है।

यह कहानी है एक ऐसे किसान की, जिसने “गोबर” को कचरा नहीं, बल्कि “ऊर्जा का खजाना” बना दिया… और आज उसी गोबर से सैकड़ों घरों के चूल्हे जल रहे हैं।
एकौनी गाँव के किसान चंद्रप्रकाश सिंह: गांव के असली ‘एनर्जी हीरो’
पीडीडीयू नगर तहसील के ग्राम एकौनी में रहने वाले किसान चंद्रप्रकाश सिंह ने वो कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े प्रोजेक्ट भी नहीं कर पाते।
👉 करीब 200 गायों के साथ संचालित उनकी गौशाला
👉 रोजाना निकलने वाला 3000 किलो गोबर
👉 और उसी से तैयार होता है 350 क्यूबिक मीटर क्षमता का बायोगैस प्लांट
यही प्लांट आज 120 से 125 घरों तक पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचा रहा है।

₹500 में गैस – आधी कीमत, दोगुना सुकून!
जहां एक तरफ LPG सिलेंडर की कीमत ₹1000 के पार जा चुकी है, वहीं यहां के ग्रामीणों को—
✔️ सिर्फ ₹500 महीने में गैस
✔️ सुबह-शाम नियमित सप्लाई
✔️ कोई सिलेंडर का झंझट नहीं, कोई ब्लैक मार्केटिंग नहीं

Biogas Plant in Chandauli से गांव की गृहिणियों के चेहरे पर अब सुकून है… चूल्हा भी जल रहा है और जेब भी बच रही है।
Biogas Plant in Chandauli–
गोबर से गैस ही नहीं… खेतों के लिए सोना भी!
इस बायोगैस प्लांट का एक और बड़ा फायदा सामने आया है—
👉 बचा हुआ अवशेष बन रहा है ऑर्गेनिक फर्टिलाइजर
👉 जिससे मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ रही है
👉 और किसानों की फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हो रही है
यानि…
ऊर्जा भी, खेती भी और पर्यावरण भी—तीनों का एक साथ समाधान!

Biogas Plant in Chandauli-जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग भी हुए प्रभावित
जब जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग इस मॉडल को देखने पहुंचे, तो वो खुद इस पहल से काफी प्रभावित नजर आए।
उन्होंने मौके पर ही—
✔️ नाबार्ड और उद्योग विभाग को निर्देश दिए
✔️ इस प्रोजेक्ट को सरकारी योजनाओं से जोड़ने की बात कही
✔️ और इसे पूरे जनपद में रिप्लिकेट करने का प्लान तैयार करने को कहा
DM चन्द्रमोहन गर्ग ने साफ कहा:
“यह आत्मनिर्भर भारत का बेहतरीन उदाहरण है… इसे हर गांव तक पहुंचाना होगा।”
Biogas Plant in Chandauli-रोजगार का नया रास्ता – गांव में ही काम, गांव में ही विकास
इस परियोजना का सबसे बड़ा असर अब रोजगार पर दिख रहा है—
✔️ गौशाला संचालन में स्थानीय लोगों को काम
✔️ बायोगैस प्लांट के रखरखाव में रोजगार
✔️ दूध उत्पादन और सप्लाई से आय
यानि…
अब गांव छोड़कर शहर जाने की मजबूरी कम होगी।
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Biogas Plant in Chandauli-आत्मनिर्भर भारत का असली मॉडल – जमीन पर उतरती तस्वीर
केंद्र सरकार के “आत्मनिर्भर भारत” का जो सपना कागजों पर दिखता है,
वो चंदौली के इस गांव में हकीकत बन चुका है।
👉 कचरे से ऊर्जा
👉 ऊर्जा से रोजगार
👉 और रोजगार से समृद्धि
यह मॉडल सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं…
बल्कि पूरे देश के लिए एक रोडमैप है।

Biogas Plant in Chandauli-अब अगला लक्ष्य – हर गांव में बायोगैस प्लांट
जिलाधिकारी ने मुख्य विकास अधिकारी को निर्देश दिए हैं कि—
📌 जिले की सभी गौशालाओं में ऐसे प्लांट लगाए जाएं
📌 अधिक से अधिक ग्रामीणों को इसका लाभ मिले
📌 और चंदौली को “बायोगैस मॉडल जिला” बनाया जाए
“B.Tech छोड़ी नौकरी… गांव चुना, और अब 125 घरों के चूल्हे जला रहा है गोबर!”
जब दुनिया की नजर इजरायल–अमेरिका–ईरान जैसे तनावपूर्ण हालात पर टिकी है…
जब LPG संकट धीरे-धीरे आम आदमी की रसोई तक दस्तक दे रहा है…
तब उत्तर प्रदेश के चंदौली का एक छोटा सा गांव एकौनी एक बड़ा जवाब बनकर उभरा है।
“जहां गैस के लिए लाइन लगती है… वहां यहां पाइपलाइन से आती है राहत!”
देश के कई हिस्सों में लोग सिलेंडर के लिए—
❌ घंटों लाइन में खड़े हैं
❌ बढ़ती कीमतों से परेशान हैं
लेकिन एकौनी में—
✔️ 125 घरों में बिना LPG चूल्हे जल रहे हैं
✔️ ₹500 महीने में गैस मिल रही है
✔️ ना बुकिंग, ना वेटिंग, ना टेंशन!
जाने असली हीरो कौन ? एक B.Tech युवक, जिसने ‘जॉब’ नहीं… ‘जमीन’ चुनी”
इस कहानी का असली चेहरा हैं चंद्र प्रकाश सिंह—
👉 B.Tech करने के बाद शहर में नौकरी की राह आसान थी…
👉 लेकिन उन्होंने चुना गांव, खेती और गौशाला का रास्ता
और आज—
💥 वही फैसला बन गया 125 परिवारों की जिंदगी का आधार
“गोबर बना गोल्ड: 200 गायों से निकल रहा है ऊर्जा का खजाना”
👉 200 गायों की गौशाला
👉 रोज़ 3000 किलो गोबर
👉 350 क्यूबिक मीटर का बायोगैस प्लांट
और परिणाम—
🔥 पूरे गांव के चूल्हे जल रहे हैं
🌾 खेतों को मिल रहा है ऑर्गेनिक खाद
💼 गांव में पैदा हो रहे हैं रोजगार
“Global Crisis के बीच Local Solution”
जहां एक तरफ अंतरराष्ट्रीय हालात ऊर्जा संकट की ओर इशारा कर रहे हैं…
वहीं चंदौली का यह मॉडल साबित कर रहा है कि—
👉 “अगर सोच बदल जाए, तो समाधान गांव से भी निकल सकता है।”
“DM भी बोले – यही है आत्मनिर्भर भारत का रास्ता”
जिलाधिकारी चन्द्र मोहन गर्ग खुद इस मॉडल को देखकर प्रभावित हुए और साफ कहा
👉 “इस तरह के बायोगैस प्लांट हर गांव में लगने चाहिए”
Khabari News Punchline
“जब दुनिया संकट में है… तब चंदौली का एक गांव समाधान लिख रहा है!”
👉 ये सिर्फ एक खबर नहीं…
👉 ये एक रूरल रिवोल्यूशन की शुरुआत है।
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✍️ Khabari News के सम्पादक के सी श्रीवास्तव एड० का ब्यू
आज जब देश ऊर्जा संकट, महंगाई और पर्यावरण जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है…
तब चंदौली का यह छोटा सा गांव एक बड़ा संदेश दे रहा है—
Biogas Plant in Chandauli-
“समाधान हमारे पास ही है… बस सोच बदलने की जरूरत है।”
गोबर… जो कभी बेकार समझा जाता था,
आज वही गांव की ऊर्जा, रोजगार और समृद्धि का आधार बन गया है।
Biogas Plant in Chandauli-
“जब गांव जागेगा… तभी देश आगे बढ़ेगा!”
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