“Exam se pehle syllabus nahi, student ka confidence complete kijiye”
डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल के संस्थापक डॉ. विनय प्रकाश तिवारी की ओर से
चंदौली जिले के सभी शिक्षकों के नाम एक सीधा, सख़्त और दिल से निकला संदेश
सीबीएसई 10वीं–12वीं की बोर्ड परीक्षाएं अब कैलेंडर पर नहीं, छात्रों के दिमाग और दिल में दस्तक देने लगी हैं।
यह वही समय है जब क्लासरूम सिर्फ़ पढ़ाने की जगह नहीं रहता, बल्कि वह सुरक्षा कवच, मनोवैज्ञानिक सहारा और आत्मविश्वास की प्रयोगशाला बन जाता है।

डॉ. विनय प्रकाश तिवारी साफ़ शब्दों में कहते हैं—
“Teacher sirf syllabus ka carrier nahi hota,
Teacher student ke darr aur sapne ka bhi guardian hota hai।”
यह आख़िरी महीना
एक average student को extraordinary बना सकता है,
और एक डरे हुए बच्चे को fearless performer।
🔴 COMPLETE THE SYLLABUS, DON’T JUST COVER IT
“Covering syllabus is mechanical, completing it is emotional.”
अंतिम महीने में नया टॉपिक शुरू करना
कई बार छात्रों के मन में यह संदेश देता है—
“हम पीछे रह गए हैं।”
डॉ. तिवारी की स्पष्ट सलाह—
- नया विषय थोपने से बचें
- पहले से पढ़ी चीज़ों को दोहराएं
- Concept को सरल भाषा में दुबारा समझाएं
- छोटे-छोटे प्रश्न पूछकर आत्मविश्वास जगाएं
छात्र को हर दिन यह एहसास होना चाहिए—
“हाँ… यह मुझे आता है।”
याद रखिए,
📌 Confidence is the fastest revision tool.

✍️ WRITING PRACTICE IS NON-NEGOTIABLE
*“Board exam is not about what you know,
it is about what you WRITE.”*
सीबीएसई बोर्ड यह नहीं पूछता कि
कौन सबसे अच्छा बोलता है,
वह देखता है—
कौन सबसे साफ़, सटीक और संरचित लिखता है।
डॉ. तिवारी का स्पष्ट फ़ॉर्मूला—
- रोज़ाना 2–3 उत्तर ज़रूर लिखवाएं
- Headings, sub-headings का अभ्यास
- Diagram, flowchart, underline करना सिखाएं
- समय सीमा में लिखने की आदत डालें
और शिक्षकों के लिए सबसे अहम लाइन—
“Jo likha nahi gaya,
wo examiner ke liye exist hi nahi karta.”
📚 PREVIOUS YEAR PAPERS = SECRET WEAPON
*“Past papers don’t predict questions,
they reveal the board’s mindset.”*
पिछले 10–15 वर्षों के प्रश्न पत्र
सिर्फ़ प्रैक्टिस मटीरियल नहीं,
बल्कि CBSE की सोच का नक्शा हैं।
शिक्षकों को चाहिए—
- Repeated concepts पहचानें
- Students को बताएं कि
CBSE concept repeat karta hai,
sentence nahi - Question ko analyse karna सिखाएं, ratna नहीं
📌 Smart preparation beats hard panic.


🧠 BUILD TRUST, NOT TERROR
“Fear paralyses, trust mobilises.”
अंतिम महीने में
छात्र किताबों से नहीं,
डर से थक जाते हैं।
इस समय शिक्षक के शब्द
सबसे ताक़तवर हथियार होते हैं।
कक्षा में ये वाक्य ज़रूर गूंजने चाहिए—
- “गलतियाँ सीखने का हिस्सा हैं।”
- “बोर्ड कोई दुश्मन नहीं है।”
- “तुम सिर्फ़ पास नहीं होगे, तुम अच्छा करोगे।”
डॉ. तिवारी कहते हैं—
“Teacher ka ek sentence
student ki poori exam journey badal sakta hai.”
🚫 STOP COMPARISON, START CAPACITY BUILDING
*“Every child is different.
Uniform pressure creates uneven damage.”*
टॉप करने का दबाव
और फेल होने का डर—
दोनों ही विनाशकारी हैं।
शिक्षक का असली रोल—
- यह समझाना कि
हर बच्चा अलग है - हर student का best अलग होता है
- Comparison नहीं, progress देखना सिखाएं
छात्र को यह एहसास दिलाइए—
“Main jo kar sakta hoon,
wo kaafi hai.”
🧘 TEACHER CALM = STUDENT CONFIDENCE
“Classroom emotion flows from the teacher.”
अगर शिक्षक घबराया हुआ है,
तो छात्र दोगुना घबराएगा।
इसलिए—
✔️ शांत रहें
✔️ सकारात्मक भाषा बोलें
✔️ समस्या नहीं, समाधान पर बात करें
डॉ. तिवारी साफ़ कहते हैं—
“Exam stress teacher se student tak transfer hota hai.”
🎯 MESSAGE FOR EVERY TEACHER OF CHANDAULI
बोर्ड परीक्षाएं
जीवन का अंत नहीं हैं,
लेकिन इस समय शिक्षक का व्यवहार
जीवन की दिशा तय कर सकता है।
एक—
- पीठ पर हल्की सी थपकी
- विश्वास से भरा एक वाक्य
- “मैं आपके साथ हूँ” का एहसास
किसी छात्र को
ज़िंदगी भर के लिए मजबूत बना सकता है।

🔔 FINAL WORDS | FROM THE FOUNDER
डॉ. विनय प्रकाश तिवारी का भावुक लेकिन स्पष्ट संदेश—
“Aaj aap teacher kam,
mentor zyada hain.
Coach hain.
Psychologist hain.
Aur sabse badhkar—
student ke bharose ka naam hain.”
चंदौली के सभी शिक्षकों से
यह अपील नहीं, जिम्मेदारी है—
📌 इस आख़िरी महीने में
सिलेबस से पहले
छात्र के मन को पास कराइए।
✍️ लेखक: डॉ. विनय प्रकाश तिवारी
संस्थापक – डैडीज़ इंटरनेशनल स्कूल
📍 बिशुनपुरा कांटा, चंदौली, उत्तर प्रदेश
प्रस्तुति: ख़बरी न्यूज़ | Education with Emotion


