Chandauli News
Chandauli News: चंदौली में महिला सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावों के बीच पुलिस विभाग के भीतर से ही एक चिंताजनक मामला सामने आया है। डीडीयू नगर स्थित सदर कोतवाली में तैनात एक महिला कांस्टेबल ने अपने ही सहकर्मी सिपाही पर गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। यह घटना न केवल विभागीय अनुशासन पर सवाल खड़े करती है, बल्कि महिला सुरक्षा के दावों की भी पोल खोलती नजर आ रही है।

घटना बुधवार दोपहर करीब 2 बजे की बताई जा रही है। जानकारी के अनुसार, महिला सिपाही अपनी छोटी बच्ची को दूध पिलाने के लिए सीसीटीएनएस कक्ष में गई थी। इसी दौरान क्वार्टर गार्ड पर तैनात सिपाही अमित कुमार वहां पहुंच गया। आरोप है कि उसने कमरे में घुसकर महिला के साथ अभद्र व्यवहार किया और विरोध करने पर आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करते हुए बदसलूकी की।
इस अप्रत्याशित घटना से आहत महिला सिपाही ने अपने ही विभाग में न्याय की गुहार लगाने का फैसला किया और सीधे पुलिस अधीक्षक के पास पहुंच गई। हालांकि, वहां भी उसे तत्काल राहत नहीं मिली। पीड़िता के अनुसार, एसपी कार्यालय के बाहर मौजूद कुछ पुलिस अधिकारियों ने उसे मामला दबाने और शिकायत न करने की सलाह दी। यह स्थिति उस व्यवस्था की ओर इशारा करती है, जहां कभी-कभी पीड़ित को ही न्याय पाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
बताया जा रहा है कि इस दौरान मानसिक रूप से आहत महिला सिपाही भावुक हो गई, लेकिन उसने हार नहीं मानी और अपनी शिकायत पर अडिग रही। आखिरकार जब मामला पुलिस अधीक्षक के संज्ञान में पहुंचा, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए।
वरिष्ठ अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद सदर कोतवाली में आरोपी सिपाही अमित कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। यह मुकदमा अपराध संख्या 0112/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में दर्ज किया गया है। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और आरोपी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की प्रक्रिया जारी है।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए ‘मिशन शक्ति’ जैसे अभियान चलाए जा रहे हैं। इन अभियानों के तहत महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक किया जा रहा है और सुरक्षा का भरोसा दिलाया जा रहा है। लेकिन जब पुलिस विभाग के भीतर ही महिला कर्मचारी असुरक्षित महसूस करे, तो यह पूरे सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाएं केवल व्यक्तिगत आचरण का मामला नहीं होतीं, बल्कि यह संस्थागत सुधार की आवश्यकता की ओर भी संकेत करती हैं। विभाग के भीतर सुरक्षित और सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित करना उतना ही जरूरी है, जितना आम नागरिकों की सुरक्षा।
इस मामले ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और संवेदनशील बनाने की जरूरत है, ताकि पीड़ित बिना किसी दबाव या डर के अपनी बात रख सकें।
फिलहाल पुलिस प्रशासन इस पूरे प्रकरण की जांच में जुटा हुआ है। अधिकारियों का कहना है कि दोषी पाए जाने पर आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं, इस घटना के बाद विभाग के भीतर भी आंतरिक व्यवस्था और अनुशासन को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
यह मामला एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करता है कि महिला सुरक्षा केवल नारों और अभियानों तक सीमित न रहे, बल्कि इसे जमीनी स्तर पर प्रभावी तरीके से लागू किया जाए—चाहे वह समाज हो या स्वयं सुरक्षा देने वाला तंत्र।






