जहां 90 की क्षमता, वहां 140 गौ माताएं—अस्थायी गौशाला से लेकर 1.65 करोड़ की कान्हा गौशाला योजना तक, चकिया की सबसे संवेदनशील कहानी

खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया (चंदौली):
पुत्रदा एकादशी…एक ऐसा दिन, जब धर्म सिर्फ पूजा नहीं रहा,
जब आस्था सिर्फ मंत्रों में नहीं बंधी,
और जब गौ माता सिर्फ प्रतीक नहीं, बल्कि सवाल बनकर सामने खड़ी हो गई।
नगर पंचायत चकिया के गौ सेवा केंद्र पर उस दिन जो दृश्य दिखा, उसने पूरे क्षेत्र को भीतर तक झकझोर दिया।
रासेश्वरी कुंज द्वारा आयोजित गौ सेवा कार्यक्रम में श्रद्धा थी, संस्कार थे, लेकिन साथ ही एक कड़वी सच्चाई भी—जिसे अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।
🐄 जहां जगह 90 की, वहां रह रहीं 140 गौ माताएं
आज ब्लॉक क्षेत्र में संचालित अस्थायी नगर पंचायत गौशाला की वास्तविक स्थिति ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया।
इस गौशाला की स्वीकृत क्षमता मात्र 90 गौवंश की है,
लेकिन वर्तमान में यहां करीब 140 गौ माताएं आश्रय ले रही हैं।
संख्या सुनने में भले सामान्य लगे, लेकिन ज़रा कल्पना कीजिए—
एक सीमित स्थान, जहां सांस लेने की जगह भी कम पड़ रही हो,
और फिर भी गौ माता चुपचाप सह रही हों।
👉 हालांकि यह भी सच है कि
नगर पंचायत की ओर से चारा, पानी, दवा और देखभाल की व्यवस्था भरपूर की गई है।
किसी गौ माता को भूखा नहीं रखा गया,
किसी को बीमार छोड़ नहीं दिया गया।
लेकिन सवाल व्यवस्था का नहीं,
क्षमता और भविष्य का है।
पुत्रदा एकादशी पर झुका चकिया गौ माता के चरणों में
इसी पृष्ठभूमि में पुत्रदा एकादशी के अवसर पर गौ सेवा केंद्र पर आयोजित कार्यक्रम ने माहौल को भावनात्मक बना दिया।
रासेस्वरी कुंज के शुभांकृष्ण दास,
नगर पंचायत अध्यक्ष गौरव श्रीवास्तव,
और कई गणमान्य नागरिक—सभी ने गौ माता का विधिवत पूजन किया।
चरण प्रक्षालन, पुष्प अर्पण, मंत्रोच्चार और फिर चारा वितरण—
यह कोई औपचारिकता नहीं थी,
यह मौन स्वीकारोक्ति थी कि
“हमसे कहीं न कहीं चूक हो रही है।”
आस्था, परंपरा और संवेदनशीलता से भरा यह दृश्य पूरे चकिया में चर्चा का विषय बन गया।
✨ शुभांकृष्ण दास: सेवा जो मंच नहीं मांगती
रासेस्वरी कुंज के शुभांकृष्ण दास ने इस दिन फिर साबित कर दिया कि
सेवा का असली स्वरूप शांत होता है, लेकिन गहरा होता है।
गौ सेवा के साथ-साथ वे वर्षों से
ज्योतिष विद्या के माध्यम से निःशुल्क परामर्श दे रहे हैं—
बिना प्रचार, बिना शुल्क, बिना शोर।
स्थानीय लोगों का कहना है—
“जब सिस्टम जवाब नहीं देता, तब शुभांकृष्ण दास मार्ग दिखाते हैं।”

🏛️ कान्हा गौशाला: अब मजबूरी बन चुकी जरूरत
इसी भावनात्मक माहौल में खबरी न्यूज इडिटर इन चीफ के सी श्रीवास्तव एड० से बातचीत के दौरान
नगर पंचायत चकिया अध्यक्ष ने कान्हा गौशाला को लेकर बड़ा खुलासा किया।
उन्होंने बताया कि—
👉 सरकार द्वारा प्रस्तावित कान्हा गौशाला योजना
👉 के लिए ₹1,65,72,000 (एक करोड़ पैंसठ लाख बहत्तर हजार रुपये)
👉 फरवरी 2024 में ही शासन से अवमुक्त हो चुके हैं।
यह जानकारी सिर्फ आंकड़ा नहीं थी—
यह उस भीड़भाड़ वाली गौशाला के लिए उम्मीद की सांस थी।
जमीन की कमी, लेकिन इरादों की नहीं
नगर पंचायत अध्यक्ष ने साफ स्वीकार किया कि
उपयुक्त भूमि उपलब्ध न होने के कारण
कान्हा गौशाला का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
लेकिन उन्होंने यह भी कहा—
“जमीन को लेकर प्रक्रिया अंतिम चरण में है। जैसे ही भूमि चिन्हित होगी, निर्माण कार्य तुरंत शुरू कराया जाएगा।”
आज जब अस्थायी गौशाला में 90 की जगह 140 गौ माताएं रह रही हों, यह सिर्फ प्रशासनिक देरी नहीं,
संवेदनशीलता की परीक्षा है।
क्यों अब और इंतजार नहीं कर सकती चकिया?
- निराश्रित गौवंश सड़कों पर
- दुर्घटनाओं का बढ़ता खतरा
- किसानों की फसलें बर्बाद
- और गौ माता की पीड़ा
कान्हा गौशाला अब विकल्प नहीं, अनिवार्यता है।
असली धर्म की परिभाषा यहीं लिखी जा रही है
पुत्रदा एकादशी के दिन चकिया ने यह साफ कर दिया कि—
धर्म सिर्फ दीप जलाने में नहीं,
धर्म है भीड़ में फंसी गौ माता के लिए जगह बनाने में।
जहां
✔️ आस्था है
✔️ स्वीकार है
✔️ और अब समाधान की मांग है
गौ सेवा के साथ समाज को सकारात्मक दिशा देने का संकल्प—
यही असली धर्म है।


📌 यह खबर क्यों सिर्फ खबर नहीं है?
क्योंकि यह कहानी है—
- एक अस्थायी गौशाला की
- 140 मौन आंखों की
- और एक ऐसे कस्बे की, जो अब चुप नहीं रहना चाहता
चकिया आज पूछ रहा है—जब पैसा है, भावना है,तो फिर देरी क्यों?
और यही सवाल इस खबर को
सिर्फ न्यूज नहीं, आंदोलन बनाता है।


