

खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चंदौली।
बसंत पंचमी की अलसुबह जैसे ही पूर्वांचल की धरती पर सूरज की पहली किरणें उतरीं, शिकारगंज क्षेत्र स्थित बाबा जागेश्वर नाथ धाम, हेतिमपुर की गलियों में “हर-हर महादेव” के जयघोष गूंज उठे। ठंडे मौसम में आस्था की गर्माहट लिए हजारों श्रद्धालु सुबह 4 बजे से ही कतारबद्ध होकर बाबा भोलेनाथ के दर्शन-पूजन में जुट गए। यह दृश्य केवल एक मेला नहीं, बल्कि विश्वास, व्यवस्था और उत्सव का जीवंत प्रमाण था।
कपाट खुलते ही उमड़ी श्रद्धा की लहर
मंदिर प्रांगण में जैसे ही कपाट खुले, दूध, जल, बेलपत्र, धतूरा और पुष्प अर्पित करते श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। मंदिर प्रबंधक व महंत श्री अनूप गिरी जी ने बताया कि कपाट समय से खोले गए ताकि किसी भी श्रद्धालु को असुविधा न हो। उन्होंने स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि स्वच्छता, अनुशासन और सुगम दर्शन—तीनों पर विशेष ध्यान दिया गया।
सुरक्षा और व्यवस्था: प्रशासन की सटीक प्लानिंग
बसंत पंचमी मेले को देखते हुए मेला प्रशासन और मंदिर समिति ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए।
- सीसीटीवी कैमरों से 24×7 निगरानी
- बैरिकेडिंग के माध्यम से बड़े व छोटे वाहनों का नियंत्रित प्रवेश
- स्वयंसेवकों और कर्मियों की चौकस तैनाती
- ऑटो शौचालय, जल-व्यवस्था और प्रकाश की समुचित व्यवस्था
हर मोर्चे पर प्रशासन की तैयारी नजर आई, जिससे दर्शनार्थियों को सुरक्षित और सुव्यवस्थित अनुभव मिला।

ग्राम प्रधान की सक्रिय भूमिका
ग्राम प्रधान राजेश कुमार भारती स्वयं मेले की व्यवस्थाओं का जायजा लेते दिखे। साफ-सफाई, वाहन स्टैंड, बैरिकेडिंग और रोशनी—हर बिंदु पर उनकी निगरानी रही। स्थानीय स्तर पर समन्वय का यह मॉडल श्रद्धालुओं के लिए राहत बना।


विधायक का जनसंवाद
क्षेत्रीय विधायक कैलाश आचार्य ने मेला परिसर का भ्रमण कर श्रद्धालुओं से संवाद किया। उन्होंने व्यवस्थाओं की समीक्षा की और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए ताकि किसी भी श्रद्धालु को परेशानी न हो। जनप्रतिनिधि का यह सीधा संवाद विश्वास को और मजबूत करता दिखा।
चंद्रप्रभा तट पर स्वाद और स्मृतियाँ
दर्शन के बाद चंद्रप्रभा नदी के तट पर उत्सव का रंग और गाढ़ा हो गया। श्रद्धालुओं ने बाटी-चोखा, चावल-दाल, चूरमा जैसे पारंपरिक व्यंजनों का स्वाद लिया। युवा वर्ग ने सेल्फी और रील्स के जरिए इन पलों को यादगार बनाया। परिवारों के साथ आए श्रद्धालुओं के चेहरों पर संतोष और आनंद स्पष्ट दिखा।


मेले की रौनक: लोकजीवन का जीवंत चित्र
मेले में गुड़ की जलेबी, चाट-पकौड़े, माला-फूल, खिलौने और पूजा-सामग्री की दुकानें सजी रहीं। बच्चों की किलकारियों और ढोल-नगाड़ों की थाप ने माहौल को उत्सवी बना दिया। यह मेला केवल व्यापार नहीं, बल्कि लोकसंस्कृति का उत्सव था।
आस्था का त्रिकोण: जागेश्वरनाथ, माँ काली और गायत्री शक्तिपीठ
बसंत पंचमी के अवसर पर श्रद्धालुओं ने बाबा जागेश्वरनाथ के साथ-साथ चकिया की माँ काली मंदिर और गायत्री शक्तिपीठ में भी दर्शन-पूजन किया। आस्था के इस त्रिकोण ने पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।
स्वच्छता और अनुशासन: सफल आयोजन की कुंजी
स्वच्छता अभियान के तहत कूड़ा प्रबंधन, जल निकासी और शौचालयों की नियमित सफाई पर विशेष जोर दिया गया। स्वयंसेवकों की तत्परता और प्रशासन की निगरानी ने अनुशासन को मेले की पहचान बना दिया।

श्रद्धालुओं की जुबानी
श्रद्धालुओं ने कहा कि इस बार दर्शन सुगम, व्यवस्था चुस्त और सुरक्षा भरोसेमंद रही। बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष सहूलियतों ने आयोजन को सराहनीय बनाया।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को संबल
मेले से स्थानीय दुकानदारों, ठेलेवालों और कारीगरों को रोजगार मिला। यह आयोजन आस्था के साथ आजीविका का भी सशक्त माध्यम साबित हुआ।
आस्था का अनुशासित उत्सव
बाबा जागेश्वर नाथ धाम का बसंत पंचमी मेला इस बात का प्रमाण बना कि सुदृढ़ व्यवस्था, जनसहभागिता और प्रशासनिक समन्वय से किसी भी बड़े आयोजन को सफल और स्मरणीय बनाया जा सकता है। श्रद्धालुओं की संतुष्टि, सुरक्षा की पुख्तगी और लोकसंस्कृति की झलक—तीनों ने मिलकर इस मेले को जादुई अनुभव में बदल दिया।
खबरी न्यूज इस सफल आयोजन के लिए मंदिर समिति, मेला प्रशासन, स्वयंसेवकों और स्थानीय प्रशासन को साधुवाद देता है—और श्रद्धालुओं की आस्था को नमन करता है।




