- 20 दिन बाद बीमारी से लौटे इकलौते बेटे को गोलियों से भूना, कैंपस बना रणक्षेत्र!
“क्लासरूम के बाहर मौत खड़ी थी…” – एक मां की दुनिया उजड़ गई, काशी कांप उठी!
वाराणसी | Khabari News Special Report
धर्मनगरी काशी… जहां गंगा बहती है, जहां शिक्षा और संस्कार की परंपरा सदियों से जीवित है… वहीं आज खून की ऐसी होली खेली गई कि पूरा शहर सन्न रह गया।
Uday Pratap College आज गोलियों की गूंज से थर्रा उठा… और एक मां का इकलौता सहारा हमेशा के लिए छिन गया।
दिनदहाड़े मौत का तांडव – 4 गोलियां, और सब खत्म!
शुक्रवार दोपहर…
कॉलेज का ‘कला एवं सामाजिक विज्ञान संकाय’…
क्लास चल रही थी… छात्र अपने भविष्य के सपनों में खोए थे…
तभी अचानक—
“धांय… धांय… धांय…”
गोलियों की आवाज ने पूरे कैंपस को दहला दिया।
23 वर्षीय सूर्य प्रताप सिंह… बीएससी का छात्र…
गाजीपुर का रहने वाला…
घर का इकलौता बेटा…
उसे उसके ही कॉलेज में, क्लासरूम के बाहर, बेहद करीब से 4 गोलियां मार दी गईं।
चश्मदीदों के अनुसार—
हमलावर मंजीत (बीए सेकंड ईयर) ने बिना किसी हिचकिचाहट के ताबड़तोड़ फायरिंग की…

बचाने दौड़े दोस्त… लेकिन कातिल ने उन पर भी तान दी बंदूक!
जब साथी छात्र अपने दोस्त को बचाने दौड़े, तो कातिल का खौफ और भी बढ़ गया…
👉 उसने पिस्टल घुमाकर बाकी छात्रों पर भी तान दी
👉 पूरा कैंपस दहशत में जम गया
👉 कोई आगे बढ़ने की हिम्मत नहीं जुटा सका
यह सिर्फ हत्या नहीं थी… यह खुलेआम कानून और इंसानियत को चुनौती थी।
आखिरी उम्मीद भी टूटी – BHU ट्रॉमा सेंटर ने किया मृत घोषित
गंभीर हालत में छात्रों ने सूर्य प्रताप को तुरंत
BHU Trauma Center पहुंचाया…
लेकिन…
डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
👉 अस्पताल के बाहर सन्नाटा
👉 दोस्तों की आंखों में आंसू
👉 और एक सवाल – “हमारा दोस्त अब कभी वापस नहीं आएगा?”
20 दिन तक बीमारी से लड़ा… लेकिन मौत से हार गया!
इस कहानी का सबसे दर्दनाक पहलू…
सूर्य प्रताप पिछले 20 दिनों से ‘चेचक (Smallpox)’ जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहा था।
वह बिस्तर पर पड़ा था…
परिवार दिन-रात उसकी सेवा कर रहा था…
👉 आखिरकार वह ठीक हुआ
👉 आज पहली बार कॉलेज लौटा
👉 सपनों के साथ, उम्मीदों के साथ…
लेकिन उसे क्या पता था—
जिस कॉलेज में वह भविष्य बनाने आया है, वहीं उसकी मौत इंतजार कर रही है!
“हमके हमार भाई चाही…” – कैंपस में गूंजती रही चीखें
कॉलेज गेट के बाहर…
छात्रों की भीड़…
रोते हुए दोस्त…
एक छात्र की चीख ने हर किसी का दिल चीर दिया—
👉 “हमके हमार भाई चाही…”
यह सिर्फ एक वाक्य नहीं था…
यह उस दर्द की आवाज थी, जो पूरे कैंपस में गूंज रही थी।
छात्रों का गुस्सा फूटा – कॉलेज बना रणभूमि!
जैसे ही मौत की खबर फैली—
👉 छात्रों का गुस्सा ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ा
👉 कॉलेज के अंदर कुर्सियां तोड़ी गईं
👉 बाहर की दुकानों में तोड़फोड़ शुरू
स्थिति इतनी बिगड़ गई कि—
🚔 पुलिस को कॉलेज के गेट बंद करने पड़े
🚔 आसपास की 150+ दुकानें बंद कराई गईं
🚔 7 थानों की फोर्स तैनात कर दी गई
पूरा इलाका छावनी में तब्दील हो गया।
कातिल फरार – पिस्टल कूड़े में फेंककर भागा आरोपी
वारदात के बाद आरोपी मंजीत—
👉 अपनी पिस्टल पास के कूड़े के ढेर में फेंकता है
👉 और मौके से फरार हो जाता है
अब सवाल उठता है—
❓ कॉलेज के अंदर हथियार कैसे पहुंचा?
❓ सुरक्षा व्यवस्था कहां थी?
❓ क्या यह पूर्व नियोजित हत्या थी?
सिस्टम पर बड़ा सवाल – क्या कॉलेज अब सुरक्षित नहीं?
यह घटना सिर्फ एक हत्या नहीं…
यह सिस्टम पर एक करारा तमाचा है।
👉 कॉलेज परिसर, जहां शिक्षा होनी चाहिए
👉 वहां खुलेआम गोलीबारी हो रही है
👉 छात्र पढ़ाई करने जाएं या जान बचाने?
Khabari News सीधा सवाल पूछता है—
👉 क्या UP के कॉलेज अब ‘नो सेफ जोन’ बन चुके हैं?
👉 प्रशासन कब जागेगा?
मां की चीख – जिसने सब कुछ खो दिया!
गाजीपुर में…
एक घर में मातम पसरा है…
👉 मां बार-बार बेहोश हो रही है
👉 पिता की आंखें सूख चुकी हैं
👉 घर का चिराग बुझ गया
इकलौता बेटा…
जिसके सहारे बुढ़ापा कटना था…
आज वही कंधों पर उठाकर ले जाया जाएगा।
विश्लेषण: यह सिर्फ हत्या नहीं, एक ‘सिस्टम फेल्योर’ है
इस घटना के कई गंभीर पहलू हैं—
1️⃣ कैंपस सिक्योरिटी की पोल खुली
अगर हथियार अंदर आया, तो चेकिंग कहां थी?
2️⃣ स्टूडेंट वायलेंस का बढ़ता ट्रेंड
छोटे-छोटे विवाद अब सीधे गोली तक पहुंच रहे हैं
3️⃣ प्रशासन की प्रतिक्रिया – देर से या मजबूरी में?
घटना के बाद एक्शन… लेकिन पहले रोकथाम क्यों नहीं?
📢 Khabari News की मांग – अब सिर्फ बयान नहीं, एक्शन चाहिए!
👉 आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी
👉 कॉलेजों में हाई-लेवल सिक्योरिटी चेक
👉 हथियारों की एंट्री पर सख्त प्रतिबंध
👉 छात्र सुरक्षा के लिए नई पॉलिसी
✍️ Editor’s Note – K.C. Shrivastava (Advocate)
“जब शिक्षा के मंदिर में खून बहता है, तो यह सिर्फ एक परिवार की नहीं, पूरे समाज की हार होती है।
अगर अब भी सिस्टम नहीं जागा, तो अगला नंबर किसी और का हो सकता है…”
🕯️ अंतिम शब्द – एक अधूरी कहानी…
सूर्य प्रताप…
जिसने 20 दिन बीमारी से लड़कर जिंदगी जीती…
लेकिन 20 मिनट में गोलियों ने सब खत्म कर दिया।
👉 उसके सपने अधूरे रह गए
👉 मां की गोद सूनी हो गई
👉 और काशी एक बार फिर शर्मसार हो गई
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