Khabari News | एक्सपोज़ सम्पादकीय
(Editor-in-Chief: K.C. Shrivastava, Advocate)
भूमिका: एक तारीख नहीं, यह धर्म के अपहरण की कहानी है
हर साल जनवरी आते ही एक सुनियोजित साजिश शुरू हो जाती है।
नाम दिया जाता है — “धार्मिक भ्रम”
असलियत होती है — धर्म का अपहरण।
2026 में मकर संक्रांति आते ही फिर वही ड्रामा:
- कोई कह रहा है 14 जनवरी
- कोई चिल्ला रहा है 15 जनवरी
- टीवी पर बैठे ज्योतिषी TRP के हिसाब से तिथि तय कर रहे हैं
- कैलेंडर छापने वाले अपनी सुविधा से धर्म बदल रहे हैं
और आम आदमी?
वह पूछ रहा है —
“बताइए, आज मनाएँ या कल?”
❌ सवाल गलत है
✔ असली सवाल यह है —
क्या अब शास्त्र भी वोट से तय होंगे?
पहला बड़ा एक्सपोज़: मकर संक्रांति तिथि नहीं है, फिर तिथि पर क्यों लड़ा जा रहा है?
यह समझ लीजिए —
मकर संक्रांति कोई चंद्र पर्व नहीं है।
न अमावस्या
न पूर्णिमा
न एकादशी
न द्वादशी
👉 यह शुद्ध रूप से सौर घटना है।
जिस क्षण सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है,
उसी क्षण संक्रांति होती है।
📌 2026 में वह क्षण है:
➡ 14 जनवरी, दोपहर 03:13 बजे
बस।
यहीं मामला खत्म हो जाना चाहिए।
लेकिन नहीं होता, क्योंकि…
दूसरा बड़ा एक्सपोज़: एकादशी का डर दिखाकर धर्म को ब्लैकमेल किया जा रहा है
अब मैदान में उतारे जाते हैं “डर के हथियार”—
“एकादशी है, कैसे मनाओगे?”
“खिचड़ी बनेगी तो पाप लगेगा”
“दान रुकेगा तो फल नहीं मिलेगा”
सवाल पूछिए:
- क्या सूर्य ने पंचांग से पूछकर राशि बदली?
- क्या उत्तरायण ने एकादशी देखकर कदम रोका?
❌ नहीं।
तो फिर सूर्य पर्व पर चंद्र तिथि का दबाव क्यों?
सच कड़वा है:
👉 यह अज्ञान नहीं, जानबूझकर फैलाया गया भ्रम है।
तीसरा एक्सपोज़: खिचड़ी पर्व ने संक्रांति को बंधक बना लिया
उत्तर भारत में खिचड़ी इतनी हावी हो चुकी है कि अब लोग मानते हैं:
“जिस दिन खिचड़ी, वही संक्रांति”
यह सबसे बड़ा सांस्कृतिक अपराध है।
🔴 खिचड़ी = लोक परंपरा
🔴 मकर संक्रांति = खगोलीय सत्य
लोक परंपरा सुंदर होती है,
लेकिन वेदों से ऊपर नहीं।
आज हालत यह है:
- शास्त्र पीछे
- कढ़ाही आगे
धर्म को थाली में परोस दिया गया है।
चौथा एक्सपोज़: कैलेंडर माफिया और टीवी ज्योतिषी
सवाल:
हर साल तारीख बदल कैसे जाती है?
उत्तर:
- कैलेंडर छापने वालों को बाजार चाहिए
- टीवी चैनल को बहस चाहिए
- सोशल मीडिया को क्लिक चाहिए
इसलिए:
- कोई कहता है “अगले दिन मनाओ”
- कोई कहता है “सूर्यास्त वाला नियम”
- कोई नया नियम गढ़ देता है
❌ लेकिन एक भी नियम वेद से नहीं आता
धर्म अब शास्त्र से नहीं,
स्टूडियो से निकल रहा है।
पांचवां एक्सपोज़: पुण्यकाल को भी तोड़ा-मरोड़ा गया
अब एक नया जुमला:
“दोपहर बाद संक्रांति हो तो अगले दिन”
यह नियम कहाँ से आया?
✔ अमावस्या-पूर्णिमा से
❌ संक्रांति से नहीं
2026 में:
- संक्रांति: 03:13 PM
- सूर्यास्त: लगभग 05:45 PM
👉 यानी पूरा पुण्यकाल मौजूद है
फिर अगले दिन क्यों?
क्योंकि —
👉 अगले दिन छुट्टी ज्यादा लोगों को सूट करती है।
धर्म नहीं, ड्यूटी रोस्टर देखा जा रहा है।
छठा एक्सपोज़: सुविधा को शास्त्र बनाने का अपराध
आज का नया सनातन:
- जो आसान, वही धर्म
- जो सुविधाजनक, वही शास्त्र
- जो वायरल, वही सत्य
लेकिन सच यह है:
धर्म सुविधा से नहीं, सिद्धांत से चलता है
अगर सूर्य भी आपकी सुविधा देखे,
तो कभी उदय ही न हो।
तो अंतिम फैसला क्या है? (कोई गोलमोल नहीं)
🔴 मकर संक्रांति 2026 = 14 जनवरी, बुधवार
🔴 संक्रांति क्षण = 03:13 PM
🔴 धार्मिक पुण्यकाल = 14 जनवरी ही
🔴 15 जनवरी = सामाजिक/भोजन/खिचड़ी उत्सव
जो यह कहे:
“संक्रांति 15 को है”
वह या तो:
- शास्त्र नहीं जानता
- या जानबूझकर भ्रम फैला रहा है
Khabari News का खुला सवाल (Open Challenge)
अगर कोई यह सिद्ध कर दे कि:
- सूर्य ने 15 को मकर राशि में प्रवेश किया
तो हम यह लेख वापस ले लेंगे।
लेकिन जब सूर्य 14 को चला गया,
तो धर्म को पीछे क्यों खींचा जा रहा है?
संपादकीय निष्कर्ष (Unfiltered Verdict)
🛑 मकर संक्रांति कोई तारीख नहीं,
यह सत्य की परीक्षा है।
या तो:
- आप सूर्य के साथ चलेंगे
या: - भीड़ के पीछे
इतिहास याद रखेगा —
किसने शास्त्र पकड़ा
और किसने थाली।
Khabari News यह स्पष्ट करता है कि:
- यह लेख केवल एक सम्पादकीय राय (Editorial Opinion) है
- इसे अंतिम धार्मिक आदेश, शास्त्रीय निर्णय या आधिकारिक पंचांग घोषणा न माना जाए
- पाठक अपनी सुविधा, आस्था और परंपरा के अनुसार जिस दिन चाहें, उसी दिन मकर संक्रांति अथवा उससे जुड़े पर्व मनाने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र हैं
इस लेख के आधार पर उत्पन्न किसी भी प्रकार की धार्मिक असहमति, व्यक्तिगत निर्णय, सामाजिक प्रतिक्रिया या आस्था-आधारित मतभेद के लिए Khabari News या सम्पादकीय टीम उत्तरदायी नहीं होगी।
