खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया ‚चन्दौली।
चकिया के शैक्षणिक परिवेश में आज एक ऐसा आयोजन देखने को मिला जिसने प्रतिभा, संस्कृति और नेतृत्व—तीनों का अद्भुत संगम पेश कर दिया। महाविद्यालय परिसर आज सुरों से गूंज उठा, जब सांस्कृतिक परिषद के पदाधिकारी चयन हेतु गायन प्रतियोगिता का भव्य आयोजन किया गया। यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि युवा प्रतिभाओं के आत्मविश्वास, कला और नेतृत्व क्षमता की परीक्षा थी।
इस गरिमामय कार्यक्रम की अध्यक्षता महाविद्यालय की प्राचार्य प्रोफेसर संगीता सिन्हा ने की, जिनकी प्रेरणादायक उपस्थिति ने पूरे माहौल को ऊर्जा से भर दिया। वहीं कार्यक्रम का कुशल संचालन सांस्कृतिक परिषद की प्रभारी डॉ. अमिता सिंह के निर्देशन में किया गया, जिन्होंने आयोजन को बेहद व्यवस्थित और प्रभावशाली बनाया।
निर्णायक मंडल की निष्पक्ष भूमिका ने बढ़ाया कार्यक्रम का स्तर
इस प्रतियोगिता की सबसे खास बात रही इसका मजबूत और अनुभवी निर्णायक मंडल। संस्कृत विभाग के विभागाध्यक्ष संतोष कुमार, अर्थशास्त्र विभाग के सहायक प्रोफेसर विश्व प्रकाश शुक्ल और हिंदी विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. रोहित कुमार यादव ने अपनी विशेषज्ञता के आधार पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया। उनके निर्णय ने यह सुनिश्चित किया कि चयन पूरी तरह पारदर्शी और योग्यता आधारित हो।
जब सुरों में झलकी प्रतिभा और जुनून…
महाविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने इस प्रतियोगिता में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। किसी ने देशभक्ति गीत गाकर माहौल को जोश से भर दिया, तो किसी ने भावनात्मक गीतों से श्रोताओं की आंखें नम कर दीं। हर प्रस्तुति में आत्मविश्वास, अभ्यास और जुनून साफ नजर आया।
पूरा सभागार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंजता रहा। यह साफ दिख रहा था कि चकिया का यह महाविद्यालय सिर्फ पढ़ाई ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक विकास का भी एक मजबूत केंद्र बन चुका है।
ये रहे नए सांस्कृतिक परिषद के चमकते चेहरे
प्रतियोगिता के बाद घोषित परिणामों ने कई प्रतिभाशाली छात्रों को नई जिम्मेदारियों से नवाजा—
👉 अध्यक्ष – परास्नातक द्वितीय वर्ष के हरीश
👉 उपाध्यक्ष – परास्नातक प्रथम वर्ष की अर्पिता सिंह
👉 सचिव – स्नातक तृतीय वर्ष की सुप्रिया सिंह
👉 संयुक्त सचिव – स्नातक द्वितीय वर्ष की सृष्टि पांडे
👉 कोषाध्यक्ष – स्नातक प्रथम वर्ष की दीक्षा द्विवेदी
✨ सदस्य के रूप में चयनित – पुष्पांजलि, मानसी, गंगा एवं गायत्री
इन सभी चयनित विद्यार्थियों के चेहरे पर खुशी और जिम्मेदारी दोनों साफ झलक रही थी। यह जीत सिर्फ एक पद की नहीं, बल्कि उनके हुनर और मेहनत की पहचान है।
प्राचार्य का संदेश – “संस्कृति से ही बनता है सम्पूर्ण व्यक्तित्व”
कार्यक्रम के अंत में प्राचार्य प्रो. संगीता सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री हासिल करना नहीं, बल्कि व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास है। उन्होंने कहा कि ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रम विद्यार्थियों को मंच प्रदान करते हैं, जहां वे अपनी छिपी प्रतिभा को दुनिया के सामने ला सकते हैं।

खबरी न्यूज का नजरिया – चकिया में प्रतिभा की कोई कमी नहीं
इस आयोजन ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि चकिया और आसपास के क्षेत्र में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो बस ऐसे मंचों की, जो इन युवाओं को आगे बढ़ने का अवसर दें।
यह कार्यक्रम न सिर्फ मनोरंजन का माध्यम बना, बल्कि युवाओं के अंदर नेतृत्व और जिम्मेदारी की भावना भी जागृत कर गया। आने वाले समय में यही छात्र महाविद्यालय और समाज का नाम रोशन करेंगे।
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