जब सड़क पर तड़पती साँसों को किसी फरिश्ते ने समय पर थाम लिया
मण्डलायुक्त वाराणसी ने किया सम्मानित, अब मिलेगा ₹25,000 का पुरस्कार

खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चंदौली।
कभी-कभी सड़क सिर्फ़ रास्ता नहीं होती…
कभी-कभी वही सड़क ज़िंदगी और मौत के बीच की सबसे खामोश जंग का मैदान बन जाती है।
तेज़ रफ्तार, एक पल की लापरवाही और फिर—
खून से सना डामर, टूटती साँसें, मदद को उठे हाथ…
और चारों ओर खामोशी।
लेकिन इसी खामोशी को चीरते हुए अगर कोई आगे बढ़ जाए,
तो वही आम नागरिक ‘राह-वीर’ बन जाता है।
जनपद चन्दौली के छह ऐसे ही नेकदिल नागरिकों ने यह साबित कर दिया कि
हीरो बनने के लिए न वर्दी चाहिए, न पद—
बस दिल में इंसानियत ज़िंदा होनी चाहिए।

🚑 राह-वीर योजना: डर से नहीं, ज़िम्मेदारी से चलती पहल
भारत सरकार द्वारा शुरू की गई “राह-वीर योजना” का उद्देश्य बेहद स्पष्ट है—
👉 सड़क दुर्घटना के बाद गोल्डन ऑवर (पहला एक घंटा) में घायल को अस्पताल पहुँचाकर उसकी जान बचाना।
इस योजना की सबसे बड़ी ताकत यह है कि—
- मदद करने वाले को पुलिस या अस्पताल द्वारा परेशान नहीं किया जाएगा
- गवाही के लिए बाध्य नहीं किया जाएगा
- और चयन होने पर मिलेगा
₹25,000 की नकद राशि + प्रशस्ति पत्र
यानी अब डर नहीं, सिर्फ़ इंसानियत बोलेगी।


📅 | जब इंसानियत को मिला मंच
आयोजित मण्डलीय सड़क सुरक्षा बैठक में
मण्डलायुक्त, वाराणसी मण्डल द्वारा
जनपद चन्दौली के छह ‘राह-वीरों’ को
प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
ये वे नाम हैं, जिन्होंने किसी के बेटे, बेटी, भाई या पिता की साँसें वापस लौटाईं।
1. श्रीमती सोनी देवी | माँ की ममता ने बचाई जान
निवासी – खानजहांनचक, चन्दौली
पचफेड़वा के पास—
एक युवक को मार्शल (जीप) ने ज़ोरदार टक्कर मारी।
युवक सड़क पर गिरा, लहूलुहान…
लोग देखते रहे, कोई आगे नहीं आया।
तभी सोनी देवी आगे बढ़ीं।
घबराईं नहीं।
डरीं नहीं।
तुरंत एम्बुलेंस कॉल की
और गोल्डन ऑवर के भीतर युवक को अस्पताल पहुँचाया।
आज वह युवक ज़िंदा है।
और यह सिर्फ़ एक काम नहीं—
माँ की ममता का प्रमाण है।
2. राजकुमार पटेल | जब सड़क पर पड़ी थी एक अनजान बहन
निवासी – वार्ड नं. 4, नेहरूनगर, चन्दौली
करवत रोड पर—
कुण्डाखुर्द से आ रही एक महिला
गंभीर हालत में सड़क किनारे पड़ी थी।
लोग गुज़र रहे थे…
लेकिन कोई रुक नहीं रहा था।
तभी राजकुमार पटेल रुके।
उन्होंने उस महिला को उठाया,
समय गंवाए बिना अस्पताल पहुँचाया।
उस महिला की आँखों में आज भी एक सवाल होगा—
“अगर वह नहीं रुकते, तो क्या मैं बचती?”
3. हिमांशु विश्वकर्मा | एक नहीं, तीन ज़िंदगियाँ
निवासी – जखनियां, गाजीपुर
चन्दौली पुलिस के पास—
एक पिकअप ने बाइक को टक्कर मार दी।
परिणाम—
एक बाइक सवार और दो बच्चे
गंभीर रूप से घायल।
मौके पर अफरा-तफरी थी।
लेकिन हिमांशु विश्वकर्मा ने
तीनों को तुरंत अस्पताल पहुँचाया।
तीन साँसें…
तीन परिवार…
और एक इंसान।
4. संतोष कुमार | समय पर फोन, समय पर जीवन
निवासी – वार्ड नं. 14, लोहियानगर, चन्दौली
बबुरी के पास—
कार्य करते समय एक युवक को गंभीर चोट लगी।
खून बह रहा था।
दर्द असहनीय था।
संतोष कुमार ने
एक पल भी नहीं गंवाया।
तुरंत एम्बुलेंस को कॉल किया
और घायल को अस्पताल पहुँचाया।
कभी-कभी
एक फोन कॉल
पूरी ज़िंदगी बचा लेती है।
5. धनश्याम प्रसाद | जब सबने मुँह मोड़ा, उन्होंने हाथ बढ़ाया
निवासी – वार्ड नं. 3, नेहरूनगर, चन्दौली
चकिया में—
बाइक और पिकअप की टक्कर।
बाइक सवार गंभीर रूप से घायल।
राहगीर देख रहे थे…
कोई नहीं रुका।
तभी धनश्याम प्रसाद की नज़र पड़ी।
उन्होंने बिना सोचे-समझे
घायल को उठाया
और अस्पताल पहुँचाया।
यही होता है
असल साहस।
6. राजकुमार यादव | दो बाइकों की टक्कर, दो ज़िंदगियाँ
निवासी – उतड़ी समुदपुर, चन्दौली
मजिदहा पुल के पास—
दो बाइकों की आमने-सामने भिड़ंत।
दोनों बाइक सवार गंभीर रूप से घायल।
काम से लौट रहे राजकुमार यादव
रुके…
और दोनों को अस्पताल पहुँचाया।
घर पहुँचने में देर हुई—
लेकिन किसी के घर का चिराग बुझने से बच गया।
🏆 सम्मान के बाद उम्मीद
इन सभी राह-वीरों के नाम मुख्यालय को भेजे जा चुके हैं।
समिति द्वारा चयन के उपरांत
इन्हें ₹25,000 की राशि से पुरस्कृत किया जाएगा।
लेकिन सच कहें तो—
इनका सबसे बड़ा पुरस्कार
किसी की ज़िंदगी का बच जाना है।
✍️ Khabari News का सवाल समाज से
क्या हम अगली बार रुकेंगे?
क्या हम डर छोड़कर मदद करेंगे?
अगर जवाब हाँ है—
तो यह खबर सफल है।
क्योंकि सड़क पर पड़ा हर घायल
किसी न किसी का सब कुछ होता है।
✨ Khabari News
सच, साहस और समाज की ज़िम्मेदारी की आवाज़


