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एडिटर-इन-चीफ: के.सी. श्रीवास्तव (एडवोकेट)

75 जिलों में वोट कटने का महाभूकंप: लोकतंत्र की जड़ों में हलचल
उत्तर प्रदेश में चल रहा Special Intensive Revision (SIR) सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं रह गया है, बल्कि यह लोकतंत्र की रीढ़—मतदाता सूची—पर सबसे बड़ा ऑपरेशन बन चुका है।
प्रदेश के 75 जिलों में लाखों नाम मतदाता सूची से हटाए गए, कहीं 10% तो कहीं 30% तक वोट कटे। यह आंकड़े सिर्फ संख्या नहीं हैं, यह राजनीति, समाज और आने वाले चुनावों की दिशा तय करने वाले संकेत हैं।
यह रिपोर्ट उन सभी जिलों की पूरी तस्वीर, भावनात्मक असर, राजनीतिक निहितार्थ और जन-चिंताओं को सामने लाती है।
📊 पश्चिमी यूपी: सबसे बड़ा झटका, सबसे गहरी चोट
पश्चिमी उत्तर प्रदेश—जहां शहरीकरण, पलायन और डुप्लीकेसी सबसे ज्यादा है—वहीं वोट कटौती का ग्राफ भी सबसे ऊंचा नजर आया।
- लखनऊ – 12,00,138 वोट कटे (30.04%)
राजधानी में हर तीसरा वोटर सूची से बाहर। सवाल उठता है—क्या शहरी वोटर सिस्टम से कटता जा रहा है? - गाजियाबाद – 8,18,139 (28.83%)
- बलरामपुर – 25.98%
- मेरठ – 6,65,635 (24.65%)
- प्रयागराज – 11,56,305 (24.64%)
- गौतम बुद्ध नगर – 23.98%
👉 राजनीतिक संकेत:
शहरी सीटों पर समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं। पार्टियों के कोर वोट बैंक में सेंध की आशंका।
🧭 अवध और मध्य यूपी: चुपचाप लेकिन भारी असर
अवध क्षेत्र में वोट कटौती शांत लेकिन निर्णायक मानी जा रही है।
- सीतापुर – 6,23,772 (19.55%)
- हरदोई – 5,44,682 (18.04%)
- बाराबंकी – 3,73,154 (16%)
- अयोध्या – 3,35,742 (17.69%)
- सुल्तानपुर – 3,16,947 (17.19%)
यहां सवाल यह नहीं कि वोट क्यों कटे, सवाल यह है कि
👉 क्या आम मतदाता को इसकी जानकारी समय पर मिली?

🌾 पूर्वांचल: गांव, गरीब और पहचान का संकट
पूर्वांचल में वोट कटौती सिर्फ आंकड़ा नहीं, पहचान का सवाल बन चुकी है।
- वाराणसी – 5,73,203 (18.18%)
- जौनपुर – 5,89,543 (16.51%)
- गोरखपुर – 6,45,625 (17.61%)
- आजमगढ़ – 5,66,606 (15.25%)
- बलिया – 4,55,976 (18.16%)
- चंदौली – 2,30,086 (15.45%)
ग्रामीण इलाकों में यह चिंता गहराती जा रही है—
“नाम कट गया तो योजना, राशन, पहचान सब खतरे में?”
🏭 कानपुर मंडल और बुंदेलखंड: पलायन का असर साफ
- कानपुर नगर – 9,02,148 (25.50%)
- फर्रुखाबाद – 20.80%
- कन्नौज – 21.57%
बुंदेलखंड में प्रतिशत कम है, लेकिन असर गहरा—
- ललितपुर – 9.95%
- हमीरपुर – 10.78%
- महोबा – 12.42%
यहां पलायन + मृत्यु + दोहरी एंट्री बड़ा कारण माने जा रहे हैं।
⚠️ प्रशासन का पक्ष बनाम जनता की आशंका
प्रशासन का कहना है—
✔ फर्जी वोटर हटे
✔ डुप्लीकेट नाम खत्म
✔ लोकतंत्र मजबूत
लेकिन जनता पूछ रही है—
❓ क्या सभी को आपत्ति का मौका मिला?
❓ क्या गरीब, मजदूर, प्रवासी छूट गए?
❓ क्या यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी थी?


🔥 राजनीतिक तापमान: 2027 से पहले बड़ा संकेत
इतने बड़े पैमाने पर वोट कटौती का सीधा असर—
- विधानसभा चुनाव
- लोकसभा रणनीति
- बूथ मैनेजमेंट
- जातीय व शहरी-ग्रामीण समीकरण
पर पड़ेगा।
राजनीतिक दल अब नए सिरे से वोटर जोड़ो अभियान में जुटेंगे।
🗣️ Khabari News की अपील
अगर आपका नाम वोटर लिस्ट से कट गया है—तो चुप मत रहिए।
BLO, तहसील, निर्वाचन कार्यालय तक आवाज़ पहुंचाइए।
मतदान आपका अधिकार है, इसे कटने न दें।
✍️ अंतिम शब्द
UP SIR 2025–26
✔ प्रशासन के लिए “रिकॉर्ड सुधार अभियान”
❌ जनता के लिए “पहचान का इम्तिहान”
यह सिर्फ वोट कटने की खबर नहीं है,
यह लोकतंत्र की धड़कन की रिपोर्ट है।
Khabari News इस मुद्दे पर लगातार नजर बनाए रखेगा—
क्योंकि
🗳️ एक वोट सिर्फ संख्या नहीं, एक आवाज़ है।


