

— स्टीकर विवाद, हंगामा, प्रशासन की सख्ती, नतीजों के बाद नाराज़गी और निष्पक्षता पर सवाल —
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चन्दौली।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल का चुनाव…
यह सिर्फ पदों की लड़ाई नहीं थी, यह व्यापारियों की ताकत, वर्चस्व और संगठन की राजनीति का खुला मैदान था। इस बार का चुनाव जैसे-जैसे आगे बढ़ा, वैसे-वैसे यह थ्रिलर फिल्म की तरह बदलता चला गया—कहीं सस्पेंस, कहीं एक्शन, कहीं हंगामा और आखिर में ऐसा ट्विस्ट, जिसने पूरे माहौल को गर्म कर दिया।

सुबह से ही माहौल गरम, चुनाव से पहले ही गहमागहमी
मतदान स्थल पर सुबह से ही भारी भीड़ उमड़ पड़ी। छोटे-बड़े व्यापारी, समर्थक, प्रत्याशी और उनके रणनीतिकार—हर किसी की नजर सिर्फ एक चीज पर थी,
“आज फैसला होगा।”
चेहरों पर मुस्कान कम, गणित ज्यादा था।
हर कोने में फुसफुसाहट—
“किसका पलड़ा भारी है?”
“कहां से कितने वोट जाएंगे?”
लेकिन असली ड्रामा तो अभी बाकी था।


पहला धमाका: रसीद के पीछे स्टीकर और अचानक बवाल
जैसे ही चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई, मतदान की रसीद के पीछे स्टीकर चिपकाने को लेकर अचानक माहौल बदल गया।
कुछ ही मिनटों में सवाल उठने लगे—
- “स्टीकर क्यों?”
- “कहीं इससे वोट की पहचान तो नहीं?”
- “निष्पक्षता से खिलवाड़ तो नहीं हो रहा?”
देखते-देखते आवाजें तेज हुईं, समर्थक आमने-सामने आ गए और मतदान स्थल पर बवाल की स्थिति बन गई। अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों के समर्थक सबसे ज्यादा मुखर नजर आए।
कुछ देर के लिए ऐसा लगा मानो मतदान रुक जाएगा।


चुनाव अधिकारी मैदान में उतरे, प्रशासन अलर्ट मोड पर
हालात बिगड़ते देख चुनाव अधिकारी चंदेश्वर जायसवाल ने खुद कमान संभाली। माइक पर आकर उन्होंने नियमों की व्याख्या की, प्रत्याशियों से आमने-सामने बात की और स्टीकर को लेकर स्थिति स्पष्ट की।
प्रशासनिक महकमा भी तुरंत हरकत में आ गया।
पुलिस बल सतर्क, अधिकारी मुस्तैद—
किसी भी कीमत पर अव्यवस्था नहीं होने दी गई।
करीब आधे घंटे की समझाइश के बाद मामला शांत हुआ और मतदान फिर से शुरू हुआ।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई…
जैसे-जैसे मतदान आगे बढ़ा, स्टीकर का मुद्दा बार-बार जिंदा होता रहा।
कभी लाइन में खड़े व्यापारियों के बीच बहस,
कभी प्रत्याशियों के समर्थकों का हंगामा,
तो कभी चुनाव अधिकारियों पर सवाल।
खासतौर पर अध्यक्ष पद के प्रत्याशियों ने कई बार इस मुद्दे को लेकर विरोध जताया। हालांकि हर बार प्रशासन और चुनाव अधिकारी ने स्थिति संभाली और मतदान चलता रहा।
मतदान समाप्त… अब शुरू हुआ असली सस्पेंस
जब अंतिम वोट पड़ा, तो माहौल अचानक शांत हो गया।
अब सबकी निगाहें मतगणना पर टिक गईं।
कमरे के बाहर समर्थकों की भीड़,
अंदर प्रत्याशियों की धड़कनें तेज—
हर राउंड के साथ चेहरे बदलते जा रहे थे।





नतीजे घोषित… और फिर आया सबसे बड़ा ट्विस्ट
अध्यक्ष पद
अध्यक्ष पद पर विष्णु कुमार ने 8 मतों के बेहद मामूली अंतर से जीत दर्ज की।
घोषणा होते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई।
लेकिन इसी पल चुनाव ने लिया सबसे बड़ा मोड़।
घोषणा के बाद नाराज़गी, निष्पक्षता पर सीधा सवाल
अध्यक्ष पद के एक प्रत्याशी ने नतीजों के तुरंत बाद खुलकर नाराज़गी व्यक्त की।
उन्होंने न सिर्फ चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए, बल्कि निष्पक्षता को लेकर उंगली भी उठा दी।
उनका कहना था कि—
- स्टीकर विवाद को हल्के में लिया गया
- कुछ प्रक्रियाओं को स्पष्ट नहीं किया गया
- चुनाव में पारदर्शिता पर संदेह है
उनकी नाराज़गी साफ दिख रही थी। समर्थकों में भी बेचैनी और असंतोष नजर आया। हालांकि प्रशासन और चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया कि चुनाव पूरी तरह नियमों के तहत और निष्पक्ष तरीके से संपन्न हुआ है।


महामंत्री और कोषाध्यक्ष पद पर साफ जनादेश
जहां अध्यक्ष पद पर तनाव और विवाद दिखा, वहीं बाकी पदों पर व्यापारियों का जनादेश बिल्कुल साफ रहा।
महामंत्री पद
मनोज चौहान ने 37 मतों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर मजबूत स्थिति दिखाई।
कोषाध्यक्ष पद
अंकित कुमार ने तो मानो इतिहास रच दिया।
उन्होंने 503 मत हासिल कर अपने प्रतिद्वंद्वी सद्दाम (425 मत) को रिकॉर्ड 78 मतों से पराजित किया।
प्रमाण पत्र वितरण और औपचारिक समापन
अंत में चुनाव अधिकारी चंदेश्वर जायसवाल ने विजयी प्रत्याशियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए। प्रशासन की ओर से यह स्पष्ट किया गया कि चुनाव निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और नियमसम्मत रहा।
खबरी न्यूज का निष्कर्ष
यह चुनाव सिर्फ जीत-हार की कहानी नहीं था।
यह था—
- स्टीकर विवाद का ड्रामा
- समर्थकों का एक्शन
- प्रशासन की सख्ती
- और अंत में नाराज़गी भरा ट्विस्ट
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल का यह चुनाव लंबे समय तक चर्चा में रहेगा।
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