“रेरूआ पम्प नहर परियोजना” में घटिया ईंटों की गूंज से हिला चंदौली प्रशासन!

📍 स्थान: बरहनी ब्लॉक, चंदौली
🕵️♂️ जांच: जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने स्वयं की निगरानी
💰 लागत: ₹460.51 लाख
🧱 मुद्दा: घटिया ईंटों की आपूर्ति और निर्माण कार्य की गुणवत्ता
👷♂️ ठेकेदार: मैसर्स पूजा इंटरप्राइजेज व मैसर्स धीरेन्द्र विक्रम सिंह
खबरी न्यूज़ नेशनल नेट वर्क चंदौली
🔍 क्या है पूरा मामला?
2024 के अक्टूबर माह में बड़े जोर-शोर से शुरू की गई “रेरूआ पम्प नहर आधुनिकीकरण परियोजना”—जिसे ग्रामीण क्षेत्रों में सिंचाई क्रांति की नई दिशा माना जा रहा था—अब सवालों के घेरे में है। ₹460.51 लाख की लागत से यह परियोजना 20 क्यूसेक क्षमता वाली नहर को आधुनिक बनाने के लिए शुरू की गई थी। लेकिन अब इस परियोजना की ईंटों में ही दरारें दिखने लगी हैं!
📹 एक वीडियो ने खोल दी पोल!
8 मई 2025 को एक वीडियो सामने आया जिसने इस पूरे मामले को सस्पेंस से भर दिया। वीडियो में कथित तौर पर दोयम दर्जे की ईंटों की आपूर्ति को उजागर किया गया। यह वीडियो जैसे ही सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, प्रशासन में हड़कंप मच गया।
क्या करोड़ों की योजना में घटिया सामग्री खपाई जा रही है?
क्या जिम्मेदार लोग आँख मूंदकर भुगतान कर रहे हैं?
🧪 प्रशासन हुआ सख्त, ईंटों की भेजी गई लैब रिपोर्ट!
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए न केवल साइट का निरीक्षण कराया, बल्कि ईंटों के सैंपल जांच हेतु प्रयोगशाला भी भिजवाए। प्रारंभिक जांच में प्रथम श्रेणी की ईंटें मिलने का दावा जरूर किया गया, लेकिन वायरल वीडियो ने संदेह की लकीरें गहरी कर दी हैं।
👉 अब सबकी निगाहें रिपोर्ट पर टिकी हैं।
⚖️ ठेकेदारों पर कसा शिकंजा – जवाब दो या भुगतो!
दो प्रमुख ठेकेदार—मैसर्स पूजा इंटरप्राइजेज और मैसर्स धीरेन्द्र विक्रम सिंह—से तत्काल स्पष्टीकरण मांगा गया है। प्रशासन ने साफ चेतावनी दी है:
“यदि कार्यस्थल पर घटिया ईंटों की पुष्टि हुई, तो न केवल भुगतान में 1% की पेनाल्टी लगेगी, बल्कि ठेका रद्द कर ब्लैकलिस्ट करने तक की कार्रवाई की जाएगी!”
💥 बड़ा सवाल – क्या यह केवल लापरवाही है या अंदरखाने चल रहा खेल?
ग्रामीणों में नाराजगी है, जनता के पैसे से चल रही परियोजना में इस तरह की संभावित गड़बड़ी पर गुस्सा फूट पड़ा है।
“ईंट की नींव अगर कमजोर होगी, तो किसानों का भविष्य कैसे मजबूत होगा?”
यह सवाल अब हर जनप्रतिनिधि और अफसर से पूछा जा रहा है।


🧑🌾 ग्रामीणों की पीड़ा – “हमें पानी नहीं, घोटाले मिल रहे हैं”
ग्राम रेरूआ और आसपास के किसान इस परियोजना से बड़ी उम्मीद लगाए बैठे हैं।
लेकिन अब वे कहते हैं –
“अगर निर्माण में ही धोखा हो रहा है, तो कल नहर टूटेगी, खेत सूखेंगे और फिर हमें दोष मिलेगा।”
एक बुजुर्ग किसान ने भावुक होते हुए कहा:
“बचपन से देखा है—सरकारी काम बस दिखावे के लिए होता है, लेकिन अब DM साहब से उम्मीद है कि कुछ सख्त कदम होंगे।”
📢 प्रशासन का संदेश – अब लापरवाही नहीं, जवाबदेही तय होगी!
जिलाधिकारी ने दो टूक कहा है –
“गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। यदि जांच में कोई गड़बड़ी मिलती है तो संबंधित ठेकेदारों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई की जाएगी।”
📸 सोशल मीडिया की ताकत – जनता की निगरानी अब लाइव!
इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सोशल मीडिया अब सिर्फ खबर फैलाने का नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का मंच बन चुका है।
वीडियो वायरल हुआ, DM हरकत में आए और ठेकेदारों की पेशी तय हो गई!:
🧱 पूर्व विधायक मनोज सिंह ने भी बजाई थी ईंट से ईंट!
इस पूरे मामले में पूर्व विधायक मनोज सिंह का नाम भी सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, जब इस परियोजना में घटिया सामग्री की भनक उन्हें लगी, तो उन्होंने ठेकेदारों और अधिकारियों को चेताते हुए सार्वजनिक रूप से “ईंट से ईंट बजा देने” की चेतावनी दे दी थी।
“जनता के पैसे से लूट नहीं होने दूँगा, चाहे किसी की भी सांठगांठ हो।” – मनोज सिंह (पूर्व विधायक)
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिससे प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव और भी बढ़ गया।
👊 अब सवाल साफ है —
क्या यह सिर्फ ठेकेदार की गलती है या सिस्टम में कहीं बड़ी सांठगांठ छिपी है?
🔚 अंतिम शब्द – ये सिर्फ ईंटों की बात नहीं, ये भरोसे की नींव है! 🧱
रेरूआ नहर परियोजना की जांच केवल ईंटों की गुणवत्ता तक सीमित नहीं है। यह हमारे प्रशासनिक तंत्र, पारदर्शिता और आमजन की भागीदारी की कसौटी भी है।
👁️ अब सबकी निगाहें उस रिपोर्ट पर हैं जो तय करेगी—
क्या ये सिर्फ एक चूक थी या फिर एक बड़ा खेल?

