
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क
चकिया (चंदौली)। हवा में मिठास, आँखों में चमक और मन में उल्लास — सिल्वर बेल्स स्कूल का प्रांगण इस दीपावली के दिन पूरी तरह जीवंत हो गया। सुबह-सुबह स्कूल परिसर में हलचल, बच्चों की छोटी-छोटी खुशियों की गूँज और रंग-बिरंगी रोशनी ने माहौल को जैसे जादुई बना दिया।
दीप प्रज्वलन और मां सरस्वती की वंदना से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत हुई मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से। छोटे-छोटे हाथों से जब बच्चे दीपक जला रहे थे, तो ऐसा लगा जैसे हर दीपक में उनके उज्ज्वल भविष्य की किरणें समाहित हों। प्राचार्या श्रीमती अनुपमा अग्रवाल ने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा, “दीपावली केवल प्रकाश का त्यौहार नहीं, यह अच्छाई की बुराई पर जीत और ज्ञान के प्रसार का पर्व है। हर दीपक एक नई शुरुआत का प्रतीक है।”
विद्यालय के चेयरमैन प्रभात जायसवाल, निदेशिका श्रीमती सुषमा जायसवाल, सहायक प्रबंध निदेशक सिद्धार्थ जायसवाल और कार्यकारी निदेशक वेदांत जायसवाल भी उपस्थित रहे। उन्होंने बच्चों के उत्साह और रचनात्मकता की सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएँ दी।

रंग-बिरंगी रोशनी और प्रतियोगिताओं में झलकती प्रतिभा
विद्यालय प्रांगण में इस साल दीयों, रंगोलियों और तोरणों की सजावट में बच्चों ने अपनी रचनात्मकता का लोहा मनवाया। दीया सजावट प्रतियोगिता में छोटे-छोटे हाथों से तैयार किए गए दीयों की चमक ने सभी का ध्यान खींचा। रंगोली प्रतियोगिता में रंगों की विविधता और डिजाइन की बारीकी देखकर दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। तोरण निर्माण में भी बच्चों ने अपनी कल्पनाशक्ति का अद्भुत प्रदर्शन किया।
प्रतियोगिताओं में विजयी बच्चों को प्रबंधन ने पुरस्कृत किया। बच्चों की खुशी का ठिकाना न था। जैसे ही उनका नाम पुकारा गया, चेहरे पर मुस्कान और आंखों में चमक ने पूरे हॉल को उत्साह से भर दिया।
रामायण के पात्रों ने किया कार्यक्रम में चार चाँद
सिर्फ सजावट और प्रतियोगिताएँ ही नहीं, बल्कि बच्चों के अभिनय ने इस उत्सव को और भी जीवंत बना दिया। नन्हे-मुन्ने छात्र-छात्राओं ने रामायण के पात्रों की वेशभूषा धारण की और मंच पर आकर सबका मन मोह लिया।
विशेष प्रस्तुति में ‘अशोक वाटिका’ का दृश्य प्रस्तुत किया गया। सीता हरण और हनुमानजी की लंका यात्रा को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत करते हुए बच्चों ने दर्शकों को एक अलग ही दुनिया में ले जाया। छोटे बच्चों का अभिनय इतना स्वाभाविक और प्रभावशाली था कि हर दर्शक की आँखें नम हो गईं।



राम-रावण युद्ध का सजीव मंचन
इस उत्सव की सबसे रोमांचक घड़ी तब आई जब राम-रावण युद्ध का मंचन हुआ। राम, रावण, लक्ष्मण और हनुमान की भूमिका निभा रहे बच्चों ने ऐसा सजीव अभिनय किया कि दर्शक अपनी सीट पर मंत्रमुग्ध रह गए। रावण के पुतले के गिरते ही बच्चों और दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा हॉल गूंज उठा दिया।
संगीत और नृत्य ने बढ़ाई रौनक
दीपावली के इस अवसर पर बच्चों के समूह गीत और नृत्य कार्यक्रम ने माहौल को और भी उल्लासपूर्ण बना दिया। ‘दीप जलते रहो’, ‘जयश्रीराम’ और अन्य भक्ति गीतों पर बच्चों ने जो भावनात्मक प्रदर्शन किया, वह हर दर्शक के दिल को छू गया। संगीत शिक्षक श्री आदित्य मिश्रा ने बच्चों के साथ हर प्रस्तुति को संजीदगी और उत्साह के साथ तैयार किया।
प्रबंधन की गरिमामयी उपस्थिति और प्रेरक संदेश
चेयरमैन श्री प्रभात जायसवाल ने बच्चों से कहा, “आप सबके छोटे-छोटे प्रयास और रचनात्मकता हमें गर्व महसूस कराते हैं। दीपावली का यह पर्व न केवल रोशनी का प्रतीक है बल्कि आपकी प्रतिभा और मेहनत की चमक को भी दर्शाता है।”
निदेशिका श्रीमती सुषमा जायसवाल ने दीपावली को बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक बताते हुए बच्चों को सदाचार, संस्कार और आत्मविश्वास का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “हर दीपक एक नई आशा, हर रंगोली एक नई सोच और हर मंचन एक नई प्रेरणा है।”


चंदौली जनपद में दीपावली का उत्सव माहौल
सिल्वर बेल्स स्कूल के दीपावली उत्सव ने न केवल स्कूल परिसर बल्कि पूरे चंदौली जनपद में उत्सव की रौनक बढ़ा दी। स्कूल से लेकर मोहल्लों तक, दीपों की जगमगाहट और रंग-बिरंगी रोशनी ने पूरे क्षेत्र को उत्सव के जादू से भर दिया। स्थानीय लोगों ने भी बच्चों के कार्यक्रम की सराहना की और इस आयोजन को प्रेरणादायक बताया।
बच्चों की मुस्कान और माता-पिता की गर्व भरी आँखें
कार्यक्रम में माता-पिता की भीड़ देखने लायक थी। जैसे ही बच्चों ने अपनी प्रस्तुति दी, उनके चेहरे की चमक और माता-पिता की गर्व भरी आँखें हर दर्शक को भावविभोर कर रही थीं। छोटे-छोटे बच्चों की मासूमियत और प्रतिभा ने पूरे कार्यक्रम को एक यादगार अनुभव बना दिया।
शिक्षा और संस्कृति का संगम
प्राचार्या श्रीमती अनुपमा अग्रवाल ने कहा, “इस तरह के आयोजन न केवल बच्चों में सृजनात्मकता और आत्मविश्वास पैदा करते हैं बल्कि सांस्कृतिक मूल्यों और परंपराओं को भी जीवित रखते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि बच्चों की भावनाओं और प्रतिभा को मंच देना उनके विकास का अहम हिस्सा है।

दीपावली की सांस्कृतिक झलक
सिर्फ स्कूल तक ही नहीं, बल्कि पूरे चंदौली क्षेत्र में दीपावली की खुशियाँ फैल रही थीं। बाजारों में मिठाइयों की खुशबू, घरों में दीपकों की रोशनी और मंदिरों में आरती की गूँज ने माहौल को और भी भावपूर्ण बना दिया। बच्चों के उत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि दीपावली केवल रोशनी का त्यौहार नहीं, बल्कि यह संस्कार, संस्कृति और सामाजिक समरसता का पर्व भी है।
अंतिम संदेश और संपादक की टिप्पणी
Khabari News के संपादक के.सी. श्रीवास्तव (Advocate) कहते हैं: “सिल्वर बेल्स स्कूल का यह दीपावली उत्सव बच्चों की प्रतिभा, संस्कृति की गहराई और उज्ज्वल भविष्य की उम्मीद का प्रतीक है। ऐसे आयोजन न केवल बच्चों को प्रेरित करते हैं बल्कि समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करते हैं। हम सभी को चाहिए कि हम इस दीपावली में अपने घरों, स्कूलों और समाज में अच्छाई और ज्ञान के दीप जलाएँ।”
तो इस दीपावली, आप भी अपने जीवन में उज्ज्वलता, सृजनात्मकता और सदाचार के दीप जलाएँ। और याद रखें — जैसे छोटे-छोटे दीप मिलकर अंधेरे को हराते हैं, वैसे ही हमारी छोटी-छोटी कोशिशें भी समाज को उज्ज्वल बना सकती हैं।
Khabari News | संपादक के.सी. श्रीवास्तव (Advocate) की ओर से दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ!




