

खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया (चंदौली)।
तीन साल में रिकॉर्ड फंडिंग: चकिया नगर पंचायत को मिला ऐतिहासिक बजट
चकिया नगर पंचायत के मौजूदा कार्यकाल को लेकर एक तथ्य निर्विवाद रूप से सामने आता है कि नगर पंचायत अध्यक्ष गौरव श्रीवास्तव और विधायक कैलाश आचार्य के संयुक्त प्रयासों से चकिया को जितनी धनराशि प्राप्त हुई है, उतनी पूर्व के कई कार्यकालों को मिलाकर भी नहीं आ सकी।
नगर पंचायत के जानकारों के अनुसार, बीते करीब तीन वर्षों में—
- अमृत 2.0
- 15वां वित्त आयोग
- पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर विकास योजना
- मुख्यमंत्री गोवंश संरक्षण योजना
- अवस्थापना विकास निधि
- निकाय मद
जैसी योजनाओं के तहत लगातार और बड़े पैमाने पर फंड स्वीकृत हुए हैं। यह स्थिति पहले के किसी भी कार्यकाल में देखने को नहीं मिली।
पहली बार योजनाओं की इतनी बड़ी श्रृंखला
पहले जहां नगर पंचायत को सीमित बजट में काम चलाना पड़ता था, वहीं वर्तमान कार्यकाल में एक साथ सड़क, नाली, जलापूर्ति, स्ट्रीट लाइट, गोशाला, मंदिर सौंदर्यीकरण और रोडवेज बस स्टेशन जैसे कार्यों के लिए धनराशि स्वीकृत होना अपने आप में बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।
स्थानीय नागरिकों का भी कहना है कि—
“पहली बार ऐसा हो रहा है कि लगभग हर विभाग की योजना चकिया तक पहुंच रही है।”
विधायक–चेयरमैन समन्वय का असर
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधायक कैलाश आचार्य और नगर पंचायत अध्यक्ष गौरव श्रीवास्तव के बीच बेहतर समन्वय का सीधा लाभ नगर पंचायत को मिला है। इसी का परिणाम है कि चकिया को राज्य और केंद्र पोषित योजनाओं में लगातार प्राथमिकता मिल रही है।
हालांकि, इसके साथ यह अपेक्षा भी जुड़ी हुई है कि—
इतनी बड़ी धनराशि का असर आम नागरिक की रोजमर्रा की सुविधाओं में भी स्पष्ट रूप से दिखे।
नगर पंचायत चकिया के सभागार में मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में नगर पंचायत अध्यक्ष गौरव श्रीवास्तव और चकिया विधानसभा के विधायक कैलाश आचार्य ने संयुक्त रूप से नगर क्षेत्र में कराए जा रहे और प्रस्तावित विकास कार्यों की लंबी फेहरिस्त मीडिया के सामने रखी। मंच से आंकड़े बोले—करोड़ों रुपये, दर्जनों योजनाएं, कई विभाग, कई मदें—लेकिन सभागार से बाहर निकलते ही एक सवाल हवा में तैरता रहा कि क्या यह विकास आम नागरिक की बुनियादी जरूरतों तक पहुंच पा रहा है?
नगर पंचायत सभागार में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस
प्रेस वार्ता नगर पंचायत चकिया के सभागार में आयोजित की गई, जहां विधायक कैलाश आचार्य और नगर पंचायत अध्यक्ष गौरव श्रीवास्तव ने कहा कि चकिया नगर पंचायत क्षेत्र में बीते समय में भी कई विकास कार्य कराए गए हैं और अब एक साथ कई “मेगा प्रोजेक्ट” धरातल पर उतारने की तैयारी है।
नगर पंचायत अध्यक्ष ने कहा कि नगर का स्वरूप बदलने के लिए योजनाबद्ध तरीके से काम किया जा रहा है, जबकि विधायक ने भरोसा दिलाया कि चकिया को विकास के मामले में किसी भी स्तर पर पीछे नहीं रहने दिया जाएगा।
योजनाओं की लंबी सूची: करोड़ों का हिसाब
प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिन योजनाओं की जानकारी दी गई, उनके आंकड़े अपने आप में बड़े हैं—
हनुमान मंदिर सौंदर्यीकरण
वंदन योजना के अंतर्गत ₹184.65 लाख की लागत से वार्ड संख्या 07, निर्भयदास स्थित हनुमान मंदिर का सौंदर्यीकरण कराया जाएगा। इसमें मंदिर परिसर का विकास, संरचनात्मक सुधार और श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ाने के कार्य शामिल होंगे।

अन्त्येष्ठी स्थल निर्माण
नगर पंचायत सीमा क्षेत्र में जनहित को ध्यान में रखते हुए ₹28.48 लाख की लागत से एक अन्त्येष्ठी स्थल का निर्माण प्रस्तावित बताया गया।
गोशाला निर्माण
मुख्यमंत्री गोवंश संरक्षण एवं गोशाला योजना के तहत ₹165.72 लाख की लागत से नगर पंचायत चकिया में संचालित अस्थायी गोशाला के स्थान पर नई स्थायी गोशाला का निर्माण किया जाएगा। इसे पशु संरक्षण के क्षेत्र में बड़ा कदम बताया गया।
15वां वित्त आयोग और अवस्थापना विकास निधि
15वें वित्त आयोग से प्राप्त ₹216.15 लाख की धनराशि से—
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट
- पेयजल व्यवस्था
- सफाई व्यवस्था
- सड़क निर्माण
- जल निकासी
जैसे कार्य कराए जाने की जानकारी दी गई।
वहीं अवस्थापना विकास निधि व निकाय मद से ₹27.07 लाख की लागत से नगर पंचायत कार्यालय के सभागार का सौंदर्यीकरण और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सिस्टम लगाए जाने की बात कही गई।

सड़क, नाली और स्ट्रीट लाइट
पं. दीनदयाल उपाध्याय नगर विकास योजना के तहत ₹314.59 लाख की लागत से—
- नगर की मुख्य सड़कों की पटरियों का निर्माण
- जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण
- पोल सहित स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था
किए जाने का दावा किया गया।
सीवरेज एवं जल निकासी योजना के अंतर्गत ₹207.21 लाख की लागत से नगर के जर्जर नालों का निर्माण कर जल निकासी व्यवस्था सुधारने की बात कही गई।
अमृत 2.0: सबसे बड़ा प्रोजेक्ट
प्रेस वार्ता का सबसे बड़ा दावा अमृत 2.0 योजना को लेकर रहा।
₹2431.70 लाख की लागत से—
- नगर पंचायत को दो जोन में विभाजित
- 44 किलोमीटर पाइप लाइन विस्तार
- 6 पंप हाउस
- 2 स्टाफ क्वार्टर
- 3556 नए जल कनेक्शन
दिए जाने की जानकारी दी गई। इसे चकिया के इतिहास की सबसे बड़ी जलापूर्ति योजना बताया गया।


रोडवेज बस स्टेशन: भवन बनेगा, बस कब चलेगी?
विधायक कैलाश आचार्य ने बताया कि उनके प्रयास से ₹195.74 लाख की लागत से चकिया स्थित रोडवेज बस स्टेशन का पुनर्निर्माण कराया जाएगा।
यहीं से सबसे अहम सवाल खड़ा होता है।
खबरी न्यूज़ सवाल पूछता है
- जब बस स्टेशन बनेगा, तो बसें कब चलेंगी?
- चकिया से बनारस, मुगलसराय, प्रयागराज, सोनभद्र के लिए रोडवेज सेवा क्यों बंद है?
- क्या भवन बन जाना ही यात्री सुविधा माना जाएगा?
चकिया वासी जानते हैं कि कभी यहां से कई रूटों पर नियमित बसें चलती थीं। आज हालात यह हैं कि नगर में रोडवेज सेवा लगभग समाप्त हो चुकी है।
तीन साल का कार्यकाल, लेकिन यात्री सुविधा शून्य
नगर पंचायत अध्यक्ष और विधायक—दोनों को पद संभाले करीब तीन साल पूरे होने को हैं।
इन तीन वर्षों में—
- सड़कें बनीं
- योजनाएं आईं
- बजट आया
लेकिन आम नागरिक की रोजमर्रा की सबसे बड़ी जरूरत—सार्वजनिक परिवहन—अब भी बहाल नहीं हो पाई।
“डिपो नहीं है, इसलिए बस नहीं चल पा रही”—यह तर्क अब जनता को संतोषजनक नहीं लगता।
क्योंकि—
- चकिया से मुगलसराय तक बसें चल सकती हैं
- टेंगरा मोड़ तक संचालन संभव है
- छोटे शहरों में बिना डिपो भी बसें चल रही हैं
तो फिर चकिया क्यों नहीं?

विकास हो रहा है, लेकिन असंतुलन क्यों?
खबरी न्यूज़ यह मानता है कि—
✔️ विकास कार्य हो रहे हैं
✔️ योजनाएं कागजों में नहीं, जमीन पर भी उतर रही हैं
लेकिन उतना ही सच यह भी है कि—
❗ विकास का संतुलन बिगड़ा हुआ है
❗ बुनियादी नागरिक सुविधाएं प्राथमिकता में नहीं दिखतीं
अगर—
- पानी है लेकिन बस नहीं
- लाइट है लेकिन आवागमन नहीं
- सड़क है लेकिन रोडवेज नहीं
तो यह विकास अधूरा कहलाएगा।
सभागार में मौजूद रहे ये लोग
प्रेस कॉन्फ्रेंस में—
- मंडल अध्यक्ष संदीप गुप्ता
- जल निगम के अधिशासी अभियंता व अवर अभियंता
- सभासद केशरी नंदन, रवि गुप्ता
- प्रतिनिधि सुरेश सोनकर
- नगर पंचायत एवं तहसील कार्यालय के कर्मचारी

खबरी न्यूज़ की दो टूक
चकिया को—
- घोषणाएं नहीं, सुविधाएं चाहिए
- शिलान्यास नहीं, संचालन चाहिए
- भवन नहीं, बस चाहिए
अगर रोडवेज बस सेवा बहाल नहीं होती,
तो करोड़ों के प्रोजेक्ट भी
आम आदमी की नजर में अधूरे ही रहेंगे।
खबरी न्यूज़ आगे भी पूछता रहेगा…
क्या बस सेवा बहाल होगी?
कब होगी?
कौन जिम्मेदार है?
👉 क्योंकि सवाल पूछना ही पत्रकारिता है।


