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सिलेंडर के लिए तरसती जनता… सियासत की आग में झुलसता देश!”ॽ

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खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क की ग्राउंड रिपोर्ट

चंदौली—एक तरफ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव की आंच, तो दूसरी तरफ देश के रसोई घरों में ठंडा पड़ा चूल्हा…! यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि उस दर्द की तस्वीर है, जिसे आज हर आम आदमी महसूस कर रहा है।

SRVS Sikanderpur

मंगलवार का दिन चंदौली कलेक्ट्रेट परिसर में सिर्फ एक धरना नहीं, बल्कि जनआक्रोश का विस्फोट बनकर सामने आया। समाजवादी पार्टी के जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर की अगुवाई में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने सड़क से लेकर प्रशासनिक दफ्तर तक सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद की। हर हाथ में गुस्सा था, हर आंख में सवाल—“आखिर गैस सिलेंडर कहां है?”

“लाइन में फिर खड़ी हो गई जनता… क्या बदल गया?”

धरना स्थल पर माहौल बेहद भावनात्मक और उग्र था। जिलाध्यक्ष सत्यनारायण राजभर ने सीधे-सीधे सरकार की नीतियों पर हमला बोलते हुए कहा—

“देश की जनता को एक बार फिर उसी दौर में धकेल दिया गया है, जहां उसे अपने ही अधिकार के लिए लाइन में खड़ा होना पड़ रहा है।”

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन और सरकार इस संकट के समय पूरी तरह विफल साबित हो रहे हैं। एलपीजी सिलेंडर जैसी बुनियादी जरूरत को भी लोग तरस रहे हैं।

“नाले से गैस का फार्मूला बताइए!”—राजनीति में उठा पुराना बयान

धरने के दौरान सैयदराजा के पूर्व विधायक मनोज सिंह ‘डब्लू’ ने ऐसा बयान दिया जिसने पूरे माहौल को और ज्यादा गर्मा दिया। उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री Narendra Modi के पुराने बयान को लेकर सवाल खड़ा कर दिया—

Dalimss Sunbeam Chakia

“आज देश जानना चाहता है कि नाले से गैस निकालने का जो फार्मूला बताया गया था, वो आखिर है क्या?”

यह बयान भीड़ में गूंजता रहा और लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया। उनका कहना था कि जब देश में एलपीजी संकट इतना गहरा गया है, तो ऐसे समय में सरकार को जवाब देना चाहिए।

“ब्लैक में बिक रहा सिलेंडर… प्रशासन मौन क्यों?”

धरना स्थल पर मौजूद नेताओं ने एक और गंभीर आरोप लगाया—
गैस सिलेंडर की कालाबाजारी!

Silver Bells Chakia

बताया गया कि कई जगहों पर तय रेट से ज्यादा कीमत वसूली जा रही है। गरीब और मध्यम वर्ग के लोग मजबूरी में महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर हैं।

ग्रामीण इलाकों की स्थिति और भी चिंताजनक बताई गई—
जहां गैस रिफिल की समय सीमा 45 दिन कर दी गई है।

“क्या गरीब परिवार 45 दिन तक बिना चूल्हा जलाए रह सकता है?”
यह सवाल धरने में बार-बार उठता रहा।

“विदेश नीति की चूक या किस्मत का खेल?”

सकलडीहा विधायक प्रभु नारायण सिंह यादव ने इस संकट को अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जोड़ते हुए बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा—

“सरकार की गलत विदेश नीति के कारण समुद्र में फंसे गैस और पेट्रोलियम के जहाज स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अटक गए हैं।”

यह बयान सीधे तौर पर केंद्र सरकार की रणनीति पर सवाल खड़ा करता है।
अगर यह सच है, तो यह सिर्फ चंदौली नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक गंभीर चेतावनी है।

“चूल्हा नहीं जला… बच्चों ने भूखे पेट सोया”

धरना स्थल पर कुछ ऐसे भी लोग थे, जिनकी आंखों में आंसू थे।
उनकी कहानी किसी राजनीतिक बयान से ज्यादा असरदार थी।

एक महिला ने रोते हुए कहा—

“तीन दिन से गैस नहीं है… लकड़ी भी नहीं मिल रही… बच्चे भूखे सो रहे हैं।”

यह सिर्फ एक घर की कहानी नहीं, बल्कि हजारों परिवारों की हकीकत बन चुकी है।

“140 करोड़ जनता भुगत रही है सजा”—सपा का बड़ा हमला

सपा प्रवक्ता मनोज सिंह ‘काका’ ने सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा—

“आज देश की 140 करोड़ जनता भाजपा सरकार की गलत नीतियों का दंश झेल रही है।”

उन्होंने कहा कि अगर समय रहते सही निर्णय लिए गए होते, तो आज यह स्थिति नहीं होती।

“सब कुछ ठीक है”—प्रशासन का दावा

धरना स्थल पर पहुंचे जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने स्थिति को नियंत्रण में बताया।
उन्होंने कहा—

“गैस की सप्लाई पूरी तरह सुचारू है। डिमांड बढ़ने से थोड़ी दिक्कत हो सकती है, लेकिन प्रशासन पूरी निगरानी कर रहा है।”

साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कहीं कालाबाजारी या ओवररेटिंग हो रही है, तो तुरंत शिकायत करें—
कार्रवाई की जाएगी।

“जमीन पर सच्चाई बनाम कागजों का दावा”

यहां सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा होता है—
क्या प्रशासन की बात सच है या जनता का दर्द?

एक तरफ अधिकारी कह रहे हैं कि सप्लाई ठीक है…
दूसरी तरफ लोग लाइन में खड़े हैं, ब्लैक में सिलेंडर खरीद रहे हैं और चूल्हा नहीं जल रहा।

“संकट सिर्फ गैस का नहीं… भरोसे का भी है”

यह पूरा मामला अब सिर्फ एलपीजी सिलेंडर तक सीमित नहीं रह गया है।
यह सवाल बन गया है—
सरकार और प्रशासन पर भरोसे का।

जब एक आम आदमी अपनी बुनियादी जरूरत के लिए संघर्ष करता है, तो उसके अंदर गुस्सा, निराशा और अविश्वास पैदा होना तय है।

“आगे क्या?”—बढ़ सकता है आंदोलन

धरना खत्म हुआ, लेकिन गुस्सा खत्म नहीं हुआ।
समाजवादी पार्टी के नेताओं ने साफ संकेत दे दिया है कि अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है।


????धरने में शामिल प्रमुख लोग

इस दौरान संजय सोनकर, चंद्रभानु यादव, मुसाफिर चौहान, चंद्रशेखर यादव, अशोक त्रिपाठी, तसलीम अंसारी, संतोष यादव, सुदामा यादव, इंद्रेश यादव समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

⚡खबरी न्यूज का कहना है-

यह सिर्फ चंदौली की खबर नहीं…
यह पूरे देश की स्थिति का आईना है।

जब रसोई का चूल्हा ठंडा पड़ता है, तो सिर्फ खाना नहीं रुकता—
रुक जाती है उम्मीद, टूट जाता है भरोसा, और भड़क उठती है व्यवस्था के खिलाफ आग।

अब देखना यह है—
क्या सरकार इस आग को बुझा पाती है,
या यह चिंगारी एक बड़े आंदोलन में बदल जाती है…

???? जुड़े रहिए खबरी न्यूज वेव पोर्टल के साथ—जहां खबर नहीं, सच बोलता है!

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