
नौगढ ब्लॉक संसाधन केंद्र में शिक्षक-लेखाकार भिड़ंत ने खोली सिस्टम की पोल, जिम्मेदार खामोश**
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क नौगढ़ (चंदौली) | ग्राउंड रिपोर्ट
शिक्षा… जिसे समाज का आधार माना जाता है… जहां से भविष्य गढ़ा जाता है… उसी शिक्षा व्यवस्था के केंद्र में जब “अव्यवस्था, आरोप और अहंकार” का टकराव खुलेआम देखने को मिले, तो सवाल सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम पर उठते हैं।
गुरुवार का दिन… ब्लॉक संसाधन केंद्र नौगढ़… और वहां का माहौल… किसी कार्यालय जैसा नहीं, बल्कि एक “संघर्ष का अखाड़ा” बन चुका था।
जहां एक ओर शिक्षक थे… तो दूसरी ओर लेखाकार… और बीच में खड़ा था — पूरी व्यवस्था का सच!
क्या हुआ उस दिन? 10 मिनट में खुल गई हकीकत
गुरुवार को प्राथमिक विद्यालय गहिला के सहायक अध्यापक अमित कुमार पाण्डेय ब्लॉक संसाधन केंद्र पहुंचे। उद्देश्य था — एक तकनीकी समस्या का समाधान।
लेकिन जैसे ही बातचीत शुरू हुई, माहौल गरम होने लगा।
कुछ ही मिनटों में बहस इतनी तीखी हो गई कि पूरा परिसर हड़कंप में आ गया।
गाली-गलौज, आरोप-प्रत्यारोप, और कथित धमकियां — यह सब कुछ उस जगह हो रहा था, जहां से बच्चों के भविष्य की योजनाएं बनाई जाती हैं।
करीब 10 मिनट तक चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे ने वहां मौजूद हर कर्मचारी को स्तब्ध कर दिया।


लेखाकार का आरोप: “14 दिन से गायब थे शिक्षक, फोन तक नहीं उठाया”
लेखाकार की तरफ से जो कहानी सामने आई, वह भी कम चौंकाने वाली नहीं है।
उनका कहना है कि सहायक अध्यापक अमित कुमार पाण्डेय पिछले 14 दिनों से विद्यालय से अनुपस्थित थे।
👉 कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई
👉 फोन कॉल्स किए गए
👉 लेकिन कोई जवाब नहीं मिला
और जब शिक्षक अचानक कार्यालय पहुंचे, तो उन्होंने आक्रामक रुख अपनाते हुए अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया और धमकी दी।
यह आरोप सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि “ड्यूटी और जिम्मेदारी” के सवाल पर भी खड़ा होता है।
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शिक्षक का पलटवार: “PFMS सिस्टम बना ‘कंट्रोल का हथियार’!”
अब सुनिए दूसरी तरफ की कहानी… जो इस पूरे मामले को और भी गंभीर बना देती है।
अमित कुमार पाण्डेय का आरोप है कि पीएफएमएस (Public Financial Management System) के तहत विद्यालयों को मिलने वाली धनराशि की आईडी और पासवर्ड पर लेखाकार ने नियंत्रण कर रखा है।
👉 कई स्कूलों की आईडी में अपना मोबाइल नंबर फीड
👉 ओटीपी सीधे लेखाकार के फोन पर जाता है
👉 शिक्षक और प्रधानाध्यापक “निर्भर” हो जाते हैं
ऐसे में अगर कोई कार्य करना हो — चाहे मरम्मत का भुगतान हो या अन्य जरूरी खर्च — तो ओटीपी के लिए लेखाकार पर निर्भर रहना पड़ता है।
और जब लेखाकार फोन नहीं उठाते…
👉 काम रुक जाता है
👉 भुगतान अटक जाता है
👉 और सबसे बड़ा नुकसान — बच्चों के हित का होता है
सवाल बड़ा है: क्या सिस्टम ‘सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल’ में फंसा है?
यह विवाद सिर्फ एक बहस नहीं…
यह एक गहरी समस्या की ओर इशारा करता है।
क्या सरकारी योजनाओं का डिजिटल सिस्टम वास्तव में पारदर्शिता ला रहा है…
या फिर “कंट्रोल और पावर” का नया जरिया बन गया है?
जब एक लेखाकार के मोबाइल पर कई विद्यालयों का ओटीपी जाता है…
तो यह सीधे-सीधे “सिस्टम की पारदर्शिता” पर सवाल खड़ा करता है।फोन करने पर उठा ही नही ।
सबसे बड़ा सवाल: अधिकारी क्यों रहे खामोश?
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि यह विवाद खण्ड शिक्षा अधिकारी लालमणि कनौजिया की मौजूदगी में हुआ।
👉 10 मिनट तक हंगामा
👉 आरोप-प्रत्यारोप
👉 कार्यालय में अफरा-तफरी
लेकिन…
👉 कोई ठोस हस्तक्षेप नहीं
👉 कोई तत्काल कार्रवाई नहीं
क्या यह “प्रशासनिक उदासीनता” नहीं है?
क्या एक जिम्मेदार अधिकारी की भूमिका सिर्फ “मूक दर्शक” बनने तक सीमित रह गई है?
मामला पहुंचा जिला स्तर तक — अब क्या होगा?
जब स्थानीय स्तर पर समाधान नहीं निकला, तो मामला जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तक पहुंच गया।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि:
👉 क्या निष्पक्ष जांच होगी?
👉 क्या दोनों पक्षों की जिम्मेदारी तय होगी?
👉 या फिर यह मामला भी “फाइलों में दबकर” रह जाएगा?
📢 KHABARI NEWS का सवाल — जवाब कौन देगा?
👉 अगर शिक्षक 14 दिन अनुपस्थित थे — तो कार्रवाई क्यों नहीं?
👉 अगर PFMS में गड़बड़ी है — तो सुधार क्यों नहीं?
👉 अगर अधिकारी मौजूद थे — तो हस्तक्षेप क्यों नहीं?
यह सवाल सिर्फ नौगढ़ का नहीं है…
यह पूरे शिक्षा सिस्टम का आईना है।
“शिक्षा का सिस्टम या शक्ति का खेल?”
आज जरूरत है सिर्फ जांच की नहीं…
बल्कि सिस्टम को रीसेट करने की।
👉 डिजिटल व्यवस्था को पारदर्शी बनाना होगा
👉 जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह बनाना होगा
👉 और सबसे जरूरी — शिक्षा को “व्यवस्था के झगड़ों” से मुक्त करना होगा
क्योंकि जब शिक्षा के केंद्र में ही संघर्ष होगा…
तो भविष्य कैसे सुरक्षित होगा?
: एक घटना, कई सबक
नौगढ़ ब्लॉक संसाधन केंद्र की यह घटना सिर्फ एक विवाद नहीं…
बल्कि एक चेतावनी है।
⚠️ यह बताती है कि सिस्टम के भीतर कितनी खामियां हैं
⚠️ यह दिखाती है कि जिम्मेदार लोग कितने निष्क्रिय हो सकते हैं
⚠️ और यह भी कि अगर समय रहते सुधार नहीं हुआ…
तो “शिक्षा” सिर्फ कागजों में रह जाएगी
🔴 KHABARI NEWS की अपील
“सिस्टम को आइना दिखाना ही पत्रकारिता का धर्म है”
हम मांग करते हैं:
👉 पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच हो
👉 PFMS सिस्टम की पारदर्शिता सुनिश्चित हो
👉 दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो
✍️ KHABARI NEWS | Editor-in-Chief: के.सी. श्रीवास्तव (Advocate)
“सच वही… जो सिस्टम को झकझोर दे!”







