


???? शाहबगंज के नाम पर कलंक बना ये ‘हॉस्पिटल’, जहां जिंदगी नहीं… सिर्फ मौत मिलती है!
✍️ खबरी न्यूज़ विशेष रिपोर्ट | शहाबगंज ‚चंदाैली।
????️ कहानी एक बुखार की नहीं… एक पूरे सिस्टम की मौत की है!
शाहबगंज, चंदौली – एक ऐसा कस्बा जहां गांव की आम ज़िंदगी में न डॉक्टर का विकल्प होता है, न इलाज का दूसरा रास्ता। लोग भरोसे में आते हैं और लौटते हैं तो या शव बनकर, या इंसाफ की भीख मांगते हुए।
25 वर्षीय बिनु चौहान का केस इस सिस्टम के नंगे सच को चीख-चीख कर बयां करता है।


????️ “बस हल्का बुखार था… हम नहीं जानते थे कि बिनु अब कभी लौटकर नहीं आएगी” – पति ओमप्रकाश की टूटती आवाज़
शुक्रवार की दोपहर जब बिनु को हल्का बुखार महसूस हुआ, तो पति ओमप्रकाश उसे ले गए पास के स्थानीय हॉस्पिटल में, जो डॉ. शिव कुमार मौर्य नाम के व्यक्ति द्वारा संचालित किया जाता है।
न ECG, न ब्लड टेस्ट, न रिपोर्ट…
डायरेक्ट एक ‘ड्रिप’ लगाई गई और फिर इंजेक्शन।
कुछ ही मिनटों में बिनु की हालत बिगड़ गई। हाथ-पैर ठंडे पड़ने लगे, सांसें लड़खड़ाईं और…
बस… बिनु की दुनिया हमेशा के लिए ख़ामोश हो गई।
⚰️ सिर्फ एक इंसान नहीं मरी… दो मासूम बच्चों की ममता, एक पति की दुनिया और एक परिवार की उम्मीद दफ्न हो गई
बिनु के दो छोटे बच्चे –
???? डुग्गू (2 साल)
???? 3 महीने की एक नन्हीं बच्ची, जो मां की गोद में दूध पी रही थी, अब सूनी आंखों से हर वक्त दरवाजे की तरफ देखती रहती है।
“मेरी मां किधर गई…?”
“अब मुझे कौन सुलाएगा…?”
इन सवालों के जवाब डॉ. शिव कुमार मौर्य के पास नहीं हैं। उनके पास सिर्फ सुलह समझौते की चुपचाप बोली है।

???? डॉक्टर या कातिल…? – लोगों का आरोप: “पहले भी कई मौतें हो चुकी हैं इस हॉस्पिटल में”
ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर खबरी न्यूज़ को बताया –
“यह कोई पहली मौत नहीं है। यहां तो हर साल एक-दो मामले दबा दिए जाते हैं। ड्रिप के नाम पर जहर देते हैं और फिर पैसे से परिवार को चुप करवा देते हैं।”
“न कोई रजिस्ट्रेशन, न लाइसेंस, न अनुभवी स्टाफ – बस पैसा कमाने का धंधा है।”
???? पैसे का खेल: इंसाफ नहीं, समझौते का दबाव!
बिनु के शव के पास बैठकर जब उसका पति रो रहा था, तभी डॉक्टर और क्लिनिक के लोग धीरे से फुसफुसा रहे थे –

“कुछ ले-देकर बात खत्म कर लो… पुलिस केस मत करो… अस्पताल बंद हो जाएगा, बच्चों का क्या होगा?”
क्या इंसाफ भी अब ‘बाजार’ में मिलने वाली चीज़ बन चुका है?

???? पुलिस आई, भीड़ समझाई… पर सवाल अभी भी खड़ा है – कार्रवाई कब?
शहाबगंज थाने की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर भीड़ को शांत किया, बिनु के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया… लेकिन FIR की कॉपी अब तक परिजनों के हाथ में नहीं है।
“कागज़ी खानापूर्ति कर दी गई है… लेकिन केस रफा-दफा करने की पूरी तैयारी है।”
???? अस्पताल या मौत का टापू? – रजिस्ट्रेशन नहीं, सिस्टम नहीं, सुरक्षा नहीं
खबरी न्यूज़ की टीम ने जब अस्पताल की पड़ताल की, तो पाया कि—
✅ कोई मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड नहीं
✅ डॉक्टर की डिग्री संदेह के घेरे में
✅ कोई लाइसेंस या नर्सिंग स्टाफ की वैध जानकारी नहीं
✅ ऑक्सीजन या इमरजेंसी सेवा तक नहीं
तो फिर सवाल उठता है —
???? यह अस्पताल कैसे चल रहा है?
???? CMO और स्वास्थ्य विभाग सो क्यों रहे हैं?
???? क्या सब कुछ “मंथली बंधी” पर चल रहा है?
???? परिजनों का फूटा ग़ुस्सा: “अब नहीं झुकेंगे… FIR लिखे बिना शव नहीं उठेगा!”
गांव वालों ने साफ कहा कि –
“अगर आज हमने आवाज़ नहीं उठाई, तो कल हमारी बहन, बेटी, मां की लाशें इसी तरह इसी हॉस्पिटल से आएंगी। अब बिनु के लिए लड़ना होगा!”
???? EXCLUSIVE: डुग्गू की तस्वीर वायरल – सोशल मीडिया पर उठी न्याय की मांग
खबरी न्यूज़ ने जब डुग्गू की मां के शव के पास बैठी मासूम तस्वीर पोस्ट की, तो सोशल मीडिया पर ग़ुस्से का सैलाब आ गया:
???? #JusticeForBinu
???? #ArrestDrShivMaurya
???? #BanIllegalHospitals
???? #WhereIsCMO
???? क्या ये मौत अब भी “लापरवाही” कही जाएगी? या इसे “हत्या” माना जाएगा?
IPC की धारा 304 के तहत गैर इरादतन हत्या का मुकदमा बनता है, लेकिन अभी तक ना तो डॉक्टर की गिरफ्तारी हुई, ना अस्पताल सील किया गया।
???? खबरी न्यूज़ की चार बड़ी मांगें – अब नहीं रुकेगी आवाज़
- डॉ. शिव कुमार मौर्य की तत्काल गिरफ्तारी हो।
- अस्पताल को सील किया जाए और सभी फर्जी क्लीनिकों पर एक्शन लिया जाए।
- बिनु के बच्चों को 25 लाख रुपये की सरकारी मुआवजा योजना मिले।
- CMO चंदौली और स्थानीय स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय हो।
????️ बिनु चली गई… लेकिन वो चीख बन गई है – अब हर दीवार तोड़ी जाएगी
बिनु की मौत एक केस नहीं, एक चेतावनी है।
अगर आज आपने आंखें मूंद लीं, तो कल ये सिस्टम आपके दरवाजे भी दस्तक देगा – “अब आपकी बारी है…”
???? “सिर्फ एक मां नहीं मरी… एक समाज की इंसानियत मरी है।”
अब हम चुप नहीं बैठेंगे।
अब हर गली, हर मंच, हर सोशल मीडिया पोस्ट पर बिनु का नाम लिया जाएगा।
जब तक न्याय नहीं, तब तक चैन नहीं।
???? खबरी न्यूज़ की मुहिम से जुड़िए – आवाज़ बनिए बिनु की मासूम बच्ची की, जो अब भी इंतज़ार कर रही है… मां के लौटने का!
????️ रिपोर्ट: खबरी न्यूज़ टीम – धर्मवीर सिंह ‚सुधांशु जायसवाल‚सरदार गौतम सिह‚ लाइव
????️????️ संपादन: के.सी. श्रीवास्तव (एडवोकेट), प्रधान संपादक, खबरी न्यूज़























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