चंदौली के डीडीयू नगर (मुगलसराय) की सड़कों पर 18 नवंबर 2025 को चली गोलियों की गूंज आज भी लोगों के दिलों में जिंदा है… लेकिन छह महीने बाद भी न्याय की आवाज कहीं फाइलों में दबती नजर आ रही है। यह सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक जवाबदेही और जनता के भरोसे की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है।
दिन-दहाड़े गोलियों से छलनी… और सिस्टम खामोश!
व्यवसायी रोहितास पाल उर्फ “रोमी” की सरेआम हत्या ने पूरे चंदौली को हिला दिया था। बाइक सवार दो शूटर आए… गोलियां बरसीं… और एक परिवार का सहारा छिन गया।
लेकिन आज, आधा साल बीत जाने के बाद भी —
👉 मुख्य शूटर फरार
👉 पुलिस के हाथ खाली
👉 परिवार दर-दर भटकता
यह सवाल उठना लाजिमी है —
क्या यह केस भी “अनसुलझे मामलों” की सूची में जुड़ने जा रहा है?

⚖️ साजिशकर्ता जेल में, लेकिन असली गुनहगार आजाद क्यों?
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए तीन नामजद व्यापारियों — भानू जायसवाल, ओमप्रकाश जायसवाल और मनोज जायसवाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
लेकिन जिस “मुख्य शूटर” ने ट्रिगर दबाया…
👉 वो आज भी पुलिस की पकड़ से बाहर है
यही वो बिंदु है जहां पूरा मामला सवालों के घेरे में आ जाता है।
9 स्पेशल टीमें, STF, 300 CCTV… फिर भी ZERO RESULT?
यह कोई साधारण केस नहीं था।
👉 9 स्पेशल पुलिस टीमें लगीं
👉 STF की मदद ली गई
👉 300+ CCTV फुटेज खंगाले गए
फिर भी…
❌ शूटर की पहचान नहीं
❌ गिरफ्तारी नहीं
तो क्या जांच सिर्फ “दिखावे” तक सीमित है?
या फिर… कहीं न कहीं दबाव काम कर रहा है?
“सफेदपोश” कनेक्शन का साया!
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, एक नया एंगल सामने आया —
👉 सफेदपोश लोगों की भूमिका
स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि इस हत्याकांड के पीछे सिर्फ जमीन विवाद नहीं, बल्कि
👉 बड़े आर्थिक हित
👉 राजनीतिक संरक्षण
भी हो सकते हैं।
विधानसभा में भी इस बात का जिक्र हुआ… लेकिन जमीन पर कार्रवाई?
शून्य!
जमीन विवाद बना मौत की वजह
पुलिस जांच के मुताबिक, यह पूरा मामला कन्हैया टॉकीज की जमीन से जुड़ा है।
👉 यह जमीन रोहितास के दादा राजाराम के नाम थी
👉 फर्जी वरासत के जरिए नाम दर्ज कराया गया
👉 फिर कम कीमत पर बेच दी गई
रोहितास पाल ने इस पर कोर्ट में केस दायर किया…
और यहीं से शुरू हुआ संघर्ष —
👉 कब्जा नहीं मिला
👉 दबाव बढ़ा
👉 धमकियां दी गईं
👉 और अंत में… हत्या!
परिवार की पुकार: “हत्यारे आज भी आजाद हैं…”
रोहितास पाल का परिवार पिछले 5–6 महीनों से न्याय के लिए भटक रहा है।
उनकी आंखों में आंसू हैं… आवाज में दर्द… और सवाल एक ही —
👉 “अगर इतने बड़े केस में न्याय नहीं मिलेगा, तो आम आदमी कहां जाए?”
परिवार का कहना है:
“हमारा भाई दुश्मनी में मारा गया… लेकिन हत्यारे खुले घूम रहे हैं।”
जनता का भरोसा टूट रहा है
यह सिर्फ एक केस नहीं… यह पूरे सिस्टम पर सवाल है।
👉 यूपी में 70% हाई-प्रोफाइल हत्याकांड 2 साल में ठंडे पड़ जाते हैं
👉 चंदौली में 5 साल में 4 व्यापारी हत्याएं अब तक अनसुलझी
अब लोग पूछ रहे हैं —
👉 क्या पुलिस सिर्फ छोटे मामलों में ही सख्त है?
👉 बड़े मामलों में क्यों कमजोर पड़ जाती है?
सोशल मीडिया पर गूंज: #JusticeForRohitasPal
सोशल मीडिया पर हजारों लोग एक ही मांग कर रहे हैं —
👉 “रोहितास पाल को न्याय दो!”
पोस्ट्स में पुलिस की लापरवाही, सिस्टम की धीमी गति और न्याय में देरी पर तीखे सवाल उठ रहे हैं।
मानवाधिकार आयोग भी सख्त
मामला अब इतना बढ़ चुका है कि
👉 उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने भी संज्ञान लिया
👉 SP से स्पष्टीकरण मांगा गया
👉 जांच में देरी पर सवाल उठे
यह साफ संकेत है कि मामला सिर्फ स्थानीय नहीं, अब राज्य स्तर पर भी गंभीर हो चुका है।
राजनीति बनाम हकीकत
स्थानीय विधायक ने विधानसभा में न्याय का भरोसा दिया…
लेकिन जमीनी हकीकत क्या कहती है?
👉 आरोपी फरार
👉 जांच अधूरी
👉 परिवार परेशान
तो क्या यह सिर्फ “राजनीतिक बयान” बनकर रह जाएगा?
🔍 क्या यह केस भी दफन हो जाएगा?
इतिहास गवाह है —
👉 कई बड़े केस समय के साथ “फाइलों में दब” जाते हैं
और अब यही डर इस केस को लेकर भी है।
👉 6 महीने — कोई ठोस प्रगति नहीं
👉 मुख्य आरोपी — फरार
👉 जांच — अधूरी
यह संकेत खतरनाक हैं।
विश्लेषण: सिस्टम की सबसे बड़ी कमजोरी
इस केस ने तीन बड़ी खामियां उजागर की हैं:
1. इंटेलिजेंस फेलियर
इतनी बड़ी घटना के बाद भी शूटर का कोई सुराग नहीं
2. इन्वेस्टिगेशन गैप
CCTV, टीम, STF — सब होने के बावजूद रिजल्ट नहीं
3. प्रेशर फैक्टर
“सफेदपोश” एंगल जांच को प्रभावित कर सकता है
अब क्या चाहिए?
👉 CBI जांच की मांग तेज हो रही है
👉 SIT का गठन जरूरी
👉 हाई-लेवल मॉनिटरिंग होनी चाहिए
अगर अब भी सख्त कदम नहीं उठाए गए…
तो यह केस सिर्फ एक “नंबर” बनकर रह जाएगा।

खबरी का ब्यू
रोहितास पाल हत्याकांड आज एक ऐसा आईना बन चुका है…
जिसमें सिस्टम की सच्चाई साफ नजर आ रही है।
👉 क्या न्याय मिलेगा?
👉 क्या शूटर पकड़ा जाएगा?
👉 या यह केस भी फाइलों में दफन हो जाएगा?
जवाब अभी अधूरा है… लेकिन इंतजार लंबा होता जा रहा है।
✍️ खबरी अपील
👉 अगर आज रोहितास को न्याय नहीं मिला…
👉 तो कल कोई और रोहितास होगा…
यह सिर्फ एक परिवार की लड़ाई नहीं —
यह पूरे समाज के न्याय की लड़ाई है।
📢 Khabari News National Network की विशेष रिपोर्ट
“सवाल सिस्टम से है… जवाब भी सिस्टम को देना होगा!”







