Khabari News DDU Nagar: जनपद में गन हाउस लाइसेंस के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। पुलिस और प्रशासन की संयुक्त कार्रवाई में दो लाइसेंसी गन हाउसों पर एफआईआर दर्ज की गई है, जहां जांच के दौरान मालिकों के नाम-पते फर्जी पाए गए और 700 से अधिक कारतूस गायब मिले हैं। इस खुलासे से अवैध हथियार कारोबार की आशंका गहरा गई है।
गुरुवार को पुलिस ने चंदौली के दो गन हाउसों पर छापेमारी की। जांच में पाया गया कि लाइसेंस धारकों के दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं हैं। कई नाम और पते पूरी तरह फर्जी निकले, जिससे संगठित फर्जीवाड़े की पुष्टि होती है।
छापेमारी के दौरान स्टॉक रजिस्टर और रिकॉर्ड बुक की जांच में 700 से ज्यादा कारतूस लापता पाए गए। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लाइसेंस धारकों ने नियमों के विपरीत बड़ी मात्रा में कारतूस खरीदे। उदाहरण के तौर पर, एक व्यक्ति ने एक वर्ष में 399 कारतूस खरीदे, जबकि अन्य ने भी सैकड़ों की संख्या में कारतूस लिए—लेकिन सत्यापन में उनके पते अस्तित्वहीन निकले।
जांच टीम ने जीएस गन हाउस और वीर गन हाउस से संबंधित सभी दस्तावेज जब्त कर लिए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इन गन हाउसों का लाइसेंस 2021 के बाद नवीनीकृत नहीं हुआ था, फिर भी ये लंबे समय से संचालित हो रहे थे।
पुलिस ने आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज कर फर्जी दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और कारतूस तस्करी नेटवर्क की तलाश तेज कर दी है। साथ ही अन्य गन हाउसों की भी जांच शुरू किए जाने के संकेत दिए गए हैं।
इस घटना ने क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों में दहशत का माहौल है, क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर कारतूसों का गायब होना संभावित आपराधिक गतिविधियों की ओर इशारा करता है। प्रशासन ने सभी शस्त्र लाइसेंस धारकों को सत्यापन अनिवार्य कराने की चेतावनी दी है और लापरवाही पर कड़ी कार्रवाई की बात कही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है—फर्जी दस्तावेजों के जरिए जारी हथियार और कारतूस आखिर किनके हाथों में पहुंचे? पुलिस इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करने में जुटी है।
