???? चन्दौली में जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने जल जीवन संतुलन को बचाने के लिए उठाया बड़ा कदम – नदियों, पोखरों और जलाशयों में मछलियों के आखेट पर पाबंदी



????️ ख़बरी न्यूज़ वेव पोर्टल चन्दौली:
Editor-in-Chief: एडवोकेट के.सी. श्रीवास्तव
अगर आप चन्दौली के किसी तालाब, नदी या पोखरे में जाल डालकर मछलियों को पकड़ने की सोच रहे हैं, तो ज़रा रुक जाइए! अब ऐसा करना सिर्फ़ गलत नहीं, बल्कि कानूनी अपराध बन चुका है। चन्दौली जनपद के जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग ने उत्तर प्रदेश मत्स्य अधिनियम 1948 की धारा 3 (1) के तहत एक सख्त आदेश जारी कर दिया है, जिससे जिले भर के जलस्रोतों में मछलियों के आखेट (फिशिंग) पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है।
यह आदेश न सिर्फ एक प्रशासनिक निर्देश है, बल्कि प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र और जैव विविधता के संरक्षण की दिशा में एक गंभीर और साहसी कदम माना जा रहा है।

???? किन जल स्रोतों पर लागू होगा आदेश?
यह प्रतिबंध चन्दौली जिले की सभी नदियों, नालों, पोखरों और जलधाराओं पर लागू होगा। सिर्फ वही जलस्रोत इससे बाहर होंगे जिन्हें “व्यक्तिगत” या “धार्मिक प्रयोजन हेतु आरक्षित” घोषित किया गया है। यानी अब न तो कोई व्यक्ति और न ही कोई मछुआ समुदाय बिना अनुमति के जल जीवन में हस्तक्षेप नहीं कर सकेगा।
☣️ ज़हर या विस्फोट से मछलियों को मारना अब ‘गुनाह’
डीएम गर्ग के आदेश में विशेष रूप से कहा गया है कि विस्फोटक पदार्थों, कृषि रक्षा रसायनों या अन्य विषैले रसायनों के जरिए मछली मारना या मारने का प्रयास पूरी तरह वर्जित है। ऐसे तरीकों से न सिर्फ़ जल जीवन को खतरा है, बल्कि इंसानी जीवन को भी भारी जोखिम होता है।
यह आदेश मछलियों को पकड़ने के अमानवीय और अवैज्ञानिक तरीकों पर लगाम लगाने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

???? प्रतिबंध की समयसीमा: क्या-क्या नहीं कर सकते आप?
निम्न लिखित तिथियों में निर्दिस्ट आदेशाे के तहत इन तारीखों से लेकर इन तारीखों तक प्रजननशील मछलियों को न पकडेगा और न बेचेगा। यह आदेश आज भी प्रभावी है।

- 15 जून 2023 से 30 जुलाई 2023 तक:
- किसी भी प्रकार की प्रजननशील मछलियों को न मारा जा सकता है, न पकड़ा जा सकता है और न ही बाजार में बेचा जा सकता है।
- 15 जुलाई 2023 से 30 सितम्बर 2023 तक:
- अंगुलिका या मत्स्य जीरा (10 इंच से कम आकार की मछलियाँ) को पकड़ना, बेचना या किसी भी रूप में उसका उपयोग करना पूरी तरह निषिद्ध रहेगा।
???? यह दोनों ही प्रतिबंध मत्स्य पालन की जैविक चक्र को बनाए रखने के लिए बेहद जरूरी हैं। यही वह समय होता है जब मछलियाँ अंडे देती हैं और नई पीढ़ी जन्म लेती है।
???? पानी के बहाव में बाधा डालना अपराध
अगर आप अपने खेत या व्यवसायिक उद्देश्य से नदी-नाले के बहाव को रोकने के लिए कोई बांध, जाल, जाली या अवरोध लगाते हैं, तो अब सावधान हो जाइए। आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी व्यक्ति प्राकृतिक जल प्रवाह को बाधित नहीं कर सकता, और ऐसा करने पर पकड़ी गई मछलियों , मत्स्य जीरा और अन्य उपकरण जब्त कर लिए जाएंगे।

इस कदम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मछलियों के प्राकृतिक आवास को सुरक्षित रखा जाए और उनके जीवन-चक्र को बाधित न किया जाए।
⚖️ कानून तोड़ा तो कार्रवाई तय
डीएम गर्ग ने दो टूक कहा है कि यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश मत्स्य अधिनियम 1948 के तहत सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी। इसमें जुर्माना, मछलियों की जब्ती, उपकरणों की सीज़िंग और जरूरत पड़ने पर एफआईआर व गिरफ्तारी तक का प्रावधान है।
???? डीएम की अपील: “जल जीवन है – इसे बचाना सबकी जिम्मेदारी”
डीएम चंद्र मोहन गर्ग ने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा है कि –
“हमारा कर्तव्य है कि हम आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संसाधनों और मछलियों की विविधता को सुरक्षित रखें। अवैध शिकार और ज़हरीले रसायनों के प्रयोग से न सिर्फ़ मछलियाँ मरती हैं, बल्कि हमारा पूरा जल-तंत्र बीमार हो जाता है। मैं सभी से अपील करता हूँ कि वे इस प्रतिबंध का पालन करें और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की जानकारी तत्काल प्रशासन या मत्स्य विभाग को दें।”
???? सोशल मीडिया पर जागरूकता अभियान शुरू
ख़बरी न्यूज़ वेव पोर्टल ने इस आदेश के बाद एक जागरूकता अभियान शुरू किया है। हैशटैग #SaveFishSaveFuture, #ChandauliDMAction और #जलजीवन_बचाओ के तहत जिलेभर में लोगों से अपील की जा रही है कि वे इस मुहिम में शामिल हों और प्राकृतिक संसाधनों को बचाने में प्रशासन का साथ दें।
???? रिपोर्टर की नज़र से – जमीनी हकीकत
ख़बरी न्यूज़ संवाददाता ने जब चकिया, नौगढ़ और सकलडीहा ब्लॉक के कई ग्रामीण इलाकों का दौरा किया तो पाया कि पहले लोगों को इस मछलियों के नियम की जानकारी नहीं थी, लेकिन डीएम के निर्देश और स्थानीय प्रशासन की सक्रियता के बाद अब ग्रामीण जागरूक हो रहे हैं।
ग्राम बघाईं के निवासी रामनाथ निषाद कहते हैं,
“हम पहले छोटे बच्चों की मदद से भी नदी में जाल डलवा देते थे। लेकिन अब समझ में आया कि ये मछलियों की नसल को खत्म कर रहा है। हम नियम का पालन करेंगे।”
यह आदेश मछलियों की जैविक प्रजातियों के संरक्षण, जल प्रदूषण को रोकने और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने के लिए एक ऐतिहासिक और साहसी कदम है। चन्दौली जैसे जिले, जहां प्राकृतिक जलधाराओं की भरमार है, वहां ऐसे प्रतिबंधों की सख्त ज़रूरत थी।
अगर प्रशासन, समाज और मछुआ समुदाय मिलकर इस अभियान में भाग लें, तो न सिर्फ़ मछलियाँ बचेंगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को एक स्वस्थ और संतुलित जल जीवन का उपहार मिलेगा।
सम्पर्क: khabarinewsno01india@gmail.com
हैशटैग: #मत्स्यसंरक्षण #ChandauliAction #DMGargStrictOrder
????स्थान: चकिया, चन्दौली, उत्तर प्रदेश




















