खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क
चकिया (चंदौली) । CHAKIA FOREST RANGE के मुजफ्फरपुर बीट स्थित हथिनी वन ब्लॉक के कंपार्टमेंट नंबर 2A में अवैध कब्जे के खिलाफ वन विभाग ने बुलडोजर चलाकर पक्के मकान को ध्वस्त कर दिया।

यह कार्रवाई भले ही प्रशासनिक सख्ती का संकेत देती हो, लेकिन इसके साथ ही कई गंभीर सवाल भी खड़े कर रही है, जो सीधे वन विभाग की कार्यप्रणाली और जिम्मेदारी पर उंगली उठाते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस पक्के मकान को आज गिराया गया, वह एक दिन में तो बना नहीं होगा। निर्माण कार्य में समय, संसाधन और मजदूर लगे होंगे—तो आखिरकार इतने दिनों तक यह अवैध निर्माण वन विभाग की नजरों से कैसे बचा रहा? क्या स्थानीय वनकर्मियों को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया गया?
CHAKIA FOREST RANGEमें बीट गार्ड से लेकर रेंज अधिकारी तक कई स्तर के कर्मचारी तैनात रहते हैं, जिनकी प्राथमिक जिम्मेदारी ही वन क्षेत्र की निगरानी और संरक्षण है। ऐसे में यह घटना विभागीय लापरवाही की ओर साफ इशारा करती है। यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो यह अवैध निर्माण इतनी बड़ी स्थिति तक पहुंचता ही नहीं।

क्या यह कार्रवाई सिर्फ दिखावा?
CHAKIA FOREST RANGE में स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी तेज है कि क्या यह कार्रवाई केवल एक उदाहरण पेश करने के लिए की गई है या फिर वास्तव में पूरे क्षेत्र में फैले अतिक्रमण पर व्यापक अभियान चलाया जाएगा। क्योंकि सूत्रों की मानें तो इस इलाके में और भी कई स्थानों पर अवैध निर्माण हुए हैं, जिन पर अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।

रेंज अधिकारी की भूमिका पर सवाल
CHAKIA FOREST RANGE अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आखिरकार उनके नेतृत्व में यह पूरा क्षेत्र आता है, तो क्या उन्हें इस अवैध गतिविधि की जानकारी नहीं थी? अगर थी, तो समय पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? और अगर नहीं थी, तो यह उनकी निगरानी व्यवस्था की गंभीर विफलता है।
जनता की मांग – हो व्यापक जांच
अब स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों की मांग है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि आखिरकार इतने बड़े अतिक्रमण के पीछे कौन-कौन जिम्मेदार हैं। साथ ही, पूरे चकिया वन रेंज में अतिक्रमण के खिलाफ व्यापक अभियान चलाकर सभी अवैध निर्माणों को हटाया जाए।

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वन क्षेत्र सिर्फ पेड़ों का समूह नहीं होता, बल्कि यह पर्यावरण और भविष्य की सुरक्षा का आधार है। ऐसे में किसी भी प्रकार का अतिक्रमण न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के साथ भी अन्याय है। अब देखना होगा कि वन विभाग इस कार्रवाई को एक शुरुआत बनाता है या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
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