“संपूर्ण समाधान दिवस में 105 फरियादें, जिसमें 8 का मौके पर समाधान – शेष एक हफ्ते में होगा निर्णायक फैसला”
???? खबरी न्यूज, चंदौली | ✍???? प्रधान संपादक: के.सी. श्रीवास्तव (एडवोकेट)
????स्थान: तहसील सभागार, नौगढ़ – चंदौली का नक्सल प्रभावित इलाका, जहां जनता का हर दर्द पगडंडियों के रास्ते शिकायतों के रूप में पहुंचा।




???? जिला प्रशासन की खुली चौपाल – और जनता के टूटे भरोसे की मरम्मत की कोशिश…
कहीं आंखों में उम्मीद थी, कहीं सवाल। बुजुर्ग कांपते हाथों में थामे जमीन का खतौनी नकल, महिलाएं सिर पर पल्लू और हाथ में शिकायती पत्र, तो कहीं युवाओं की पीड़ा – इन सबका एक ही ठिकाना बना आज तहसील नौगढ़ का सभागार।
जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग और पुलिस अधीक्षक आदित्य लांघे खुद मंच पर मौजूद थे – जनता के हर सवाल को सुनने, हर दस्तक को जवाब देने के लिए।
???? आंकड़े नहीं, असलियत बोले – 105 आवेदन, सिर्फ 08 का मौके पर समाधान!

जिला प्रशासन के सामने कुल 105 प्रार्थना पत्र रखे गए। लेकिन सिर्फ 8 मामलों का निस्तारण मौके पर किया गया।
बाकी 97 शिकायतों को एक हफ्ते में गुणवत्तापूर्ण निस्तारण के निर्देश दिए गए हैं।
???? DM चंद्र मोहन गर्ग ने साफ कहा –

“हर विभाग अपने लंबित प्रकरणों को गंभीरता से लें। जमीन की पैमाइश, दाखिल-खारिज, अतिक्रमण जैसे मामलों को प्राथमिकता दें। फरियादी को मौके पर बुलाकर समाधान लिखित रूप में दें।”
???? पुलिस अधीक्षक आदित्य लांघे की सख्ती – अतिक्रमण हटेगा, पुलिस फोर्स साथ जाएगी!
बिना किसी लागलपेट के एसपी लांघे ने निर्देश दिया कि
“जहां अवैध कब्जे हैं, वहां पुलिस बल के साथ जाकर निष्कासन करें। नाली, रास्ते, ग्राम समाज की जमीन पर कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
???? उपस्थित अधिकारीगण – हर विभाग से जवाबदेही तय
???? मुख्य चिकित्साधिकारी
???? उप जिलाधिकारी आलोक कुमार
???? तहसीलदार, BDO, वन क्षेत्राधिकारी, पंचायत राज अधिकारी
सबकी उपस्थिति प्रशासन की गंभीरता को दर्शा रही थी। लेकिन सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या सिर्फ मौजूद रहना काफी है? क्या समाधान सिर्फ मंच से निर्देश देकर ही हो जाएगा?
???? जन भावनाएं – “DM साहब सुन तो रहे हैं, लेकिन हल कब होगा?”
एक बुजुर्ग महिला का फूटा दर्द:
“पिछले तीन समाधान दिवस से बस चक्कर काट रहे हैं। आज भी वही आश्वासन मिला… बेटा, कब तक?”
एक युवक ने कहा:
“हमने रास्ते के लिए 6 महीने पहले आवेदन दिया था। गांव में बच्चे स्कूल तक नहीं पहुंच पाते। अब एक हफ्ते में समाधान होगा या अगला समाधान दिवस देखना पड़ेगा?”
???? सवाल प्रशासन से – क्या सिर्फ समाधान दिवस काफी हैं?
✔ क्या शिकायतों का निस्तारण सिर्फ गिनती में पूरा कर देना ही ‘समाधान’ है?
✔ क्या ग्रामीण क्षेत्रों की समस्याएं एक या दो बैठकों में सुलझाई जा सकती हैं?
✔ क्या हर शिकायतकर्ता को बार-बार चक्कर लगवाना न्याय है?
???? उम्मीद की किरण – जब जिलाधिकारी ने खुद सुनी बुजुर्ग की शिकायत, SP ने किया मौके पर टीम भेजने का आदेश
कुछ ऐसे भी दृश्य देखने को मिले, जब डीएम खुद मंच से नीचे आए और जमीन विवाद को गंभीरता से लेते हुए तहसीलदार को तत्काल जांच करने का निर्देश दिया। पुलिस अधीक्षक ने एक अतिक्रमण वाले प्रकरण में तत्काल फोर्स रवाना करने की बात कही।
???? नक्सल क्षेत्र की सच्चाई – शिकायतें नहीं, संघर्ष की दास्तान हैं ये प्रार्थना पत्र
इन 105 प्रार्थना पत्रों में सिर्फ शिकायती कागज़ नहीं, विकास की प्यास, अधिकारों की पुकार और व्यवस्था से विश्वास की आखिरी उम्मीदें थीं।
✍???? खबरी की विशेष टिप्पणी:
“समाधान दिवस महज एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, यह लोकतंत्र की असली परीक्षा है। जहां अधिकारी सिर्फ मौजूद रहें, वहां जनता राहत नहीं पाती। लेकिन जहां DM-SP जैसे संवेदनशील नेतृत्व मौजूद हों – वहां भरोसा भी लौटता है और कार्रवाई भी होती है।”




















