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कई संगठन, वर्षों की निष्क्रियता और अब चुनाव की कसौटी — क्या सच में जागेगा चकिया का व्यापारी ?

खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया‚चन्दौली।

चकिया का बाजार… सुबह से शाम तक चहल-पहल, दुकानों पर ग्राहक, लेन-देन, मेहनत और उम्मीदों की आवाजाही। लेकिन इसी बाजार की एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि व्यापारियों के नाम पर बने संगठन वर्षों से तो हैं, पर व्यापारी खुद लंबे समय तक निष्क्रिय रहे हैं।
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल सहित क्षेत्र में कम से कम चार व्यापारिक संगठन सक्रिय रूप से पंजीकृत और संचालित बताए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि इन संगठनों की मौजूदगी के बावजूद व्यापारी वर्ग की सामूहिक ताकत अक्सर कमजोर दिखाई दी।

SRVS Sikanderpur

अब जब उ०प्र० उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव वर्ष 2025 की घोषणा करते हुए 7 जनवरी से सदस्यता अभियान और 25 जनवरी को चुनाव की तिथि तय कर दी है, तो यह सिर्फ एक संगठनात्मक सूचना नहीं है। यह चकिया के व्यापारी समाज के लिए आत्ममंथन और आत्मपरीक्षा का समय है।

संगठन बहुत, सक्रियता कम — यही रही सबसे बड़ी समस्या

पिछले कई वर्षों से चकिया में व्यापारियों की समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं।
कभी टैक्स और जीएसटी की उलझनें,
कभी नगर पंचायत और प्रशासनिक स्तर पर दबाव,
कभी बाजार व्यवस्था, अतिक्रमण, पार्किंग और सुरक्षा जैसे मुद्दे।

इन सबके बीच सवाल बार-बार उठा—
“इतने संगठन होने के बावजूद व्यापारी की आवाज कमजोर क्यों है?”

उत्तर साफ है—निष्क्रियता।
व्यापारी संगठन बने, पदाधिकारी चुने गए, लेकिन आम व्यापारी खुद को इनसे जोड़ नहीं पाया। संगठन और व्यापारी के बीच वह भावनात्मक और संघर्षशील रिश्ता नहीं बन सका, जो किसी भी आंदोलन या दबाव की नींव होता है।

Dalimss Sunbeam Chakia

अब चुनाव… औपचारिकता या बदलाव का मौका?

स्थानीय कैम्प कार्यालय में आयोजित हालिया बैठक में प्रदेश मंत्री चन्द्रेश्वर जायसवाल, संगठन मंत्री अशोक केशरी और जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकान्त अग्रहरी की मौजूदगी में जब चुनाव की घोषणा हुई, तो माहौल में उम्मीद भी थी और संदेह भी।

उम्मीद इस बात की—
कि शायद इस बार व्यापारी खुलकर आगे आएं।

Silver Bells Chakia

संदेह इस बात का—
कि कहीं यह चुनाव भी पहले की तरह सिर्फ पदों का बंटवारा बनकर न रह जाए।

सदस्यता अभियान 7 जनवरी से 15 जनवरी तक चलेगा। यही वह समय है, जहां से तय होगा कि व्यापारी इस चुनाव को कितनी गंभीरता से लेता है।
अगर सदस्यता सिर्फ गिनती बनकर रह गई, तो बदलाव की उम्मीद कमजोर होगी।
लेकिन अगर व्यापारी खुद आगे बढ़कर संगठन को मजबूत करता है, तो तस्वीर बदल सकती है।

“हर तीन वर्ष में चुनाव” — लोकतंत्र की मजबूती या रस्म अदायगी?

जिलाध्यक्ष लक्ष्मीकान्त अग्रहरी ने स्पष्ट कहा कि संगठन का चुनाव हर तीन वर्ष में कराया जाता है। यह बात अपने आप में लोकतांत्रिक सोच को दर्शाती है।
लेकिन खबरी न्यूज यह सवाल भी उठाता है—
क्या सिर्फ चुनाव करा लेना ही लोकतंत्र है, या उसमें व्यापारी की भागीदारी और सवाल पूछने की ताकत भी जरूरी है?

अगर व्यापारी सिर्फ वोटर बनकर रह गया और फैसले फिर कुछ लोगों तक सीमित रहे, तो निष्क्रियता का चक्र टूटना मुश्किल होगा।

प्रदेश का सबसे बड़ा संगठन — जिम्मेदारी भी उतनी ही बड़ी

प्रदेश मंत्री चन्द्रेश्वर जायसवाल ने संगठन को उत्तर प्रदेश का सबसे बड़ा व्यापारिक संगठन बताया। इसमें कोई संदेह नहीं कि संगठन का नेटवर्क मजबूत है और हर जिले में उसकी इकाइयां हैं।

लेकिन बड़ा संगठन होने के साथ-साथ जिम्मेदारी भी बड़ी होती है।
चकिया जैसे कस्बों में व्यापारी यह देखना चाहता है कि

  • उसकी छोटी-छोटी समस्याओं को कौन सुनेगा?
  • प्रशासन से टकराने का साहस कौन दिखाएगा?
  • और जरूरत पड़ने पर सड़क से लेकर शासन तक कौन खड़ा होगा?

बैठक में मौजूद चेहरे — सिर्फ नाम नहीं, उम्मीदें

इस बैठक में चकिया नगर अध्यक्ष मोहन वर्मा के साथ
राकेश मोदनवाल, आलोक जायसवाल, कैलाश जायसवाल, शुभम मोदनवाल, अजय उर्फ शिवजी, संदीप केशरी, शुभम जायसवाल, दीपक चौहान, अभिषेक यादव, अनुज गुप्ता, अनिल केशरी, अनुज मध्देशिया सहित बड़ी संख्या में व्यापारी मौजूद रहे।

ये नाम सिर्फ उपस्थिति दर्ज कराने वाले लोग नहीं हैं।
ये अपने-अपने मोहल्ले, बाजार और व्यापारिक वर्ग का प्रतिनिधित्व करते हैं। सवाल यही है—क्या ये चेहरे सिर्फ बैठक तक सीमित रहेंगे, या आने वाले दिनों में मैदान में भी दिखाई देंगे?

निष्क्रियता टूटी तो बदलेगा बाजार का मिजाज

अगर इस चुनाव में

  • व्यापारी खुलकर सदस्यता लेता है,
  • बैठकों में सवाल पूछता है,
  • नेतृत्व चुनते समय सोच-समझकर निर्णय करता है,

तो चकिया का बाजार सिर्फ खरीद-बिक्री का केंद्र नहीं, बल्कि एक संगठित शक्ति बन सकता है।

लेकिन अगर निष्क्रियता हावी रही, तो फिर चाहे कितने भी संगठन क्यों न हों, व्यापारी की आवाज कमजोर ही रहेगी।

खबरी न्यूज का सवाल

अब आगे देखना है—

  • क्या यह चुनाव सच में सफल हो पाता है?
  • क्या व्यापारी सिर्फ दर्शक बना रहता है या भागीदार बनता है?
  • और क्या वर्षों से जमी निष्क्रियता टूटती है या फिर एक बार और इतिहास खुद को दोहराता है?

खबरी न्यूज के लिए यह खबर सिर्फ संगठन की नहीं, बल्कि चकिया के व्यापारी समाज के भविष्य की है।
क्योंकि जब व्यापारी जागता है, तब सिर्फ दुकान नहीं चलती—पूरा बाजार बोलने लगता है।

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