✍️ विशेष रिपोर्ट – खबरी न्यूज़, चकिया (संपादक-इन-चीफ के.सी. श्रीवास्तव, अधिवक्ता)
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क नौगढ‚चन्दौली।

???? “25 साल से बसे गरीबों की बस्ती को राख में बदल दिया गया”
महिलाओं की चीखें, बच्चों की सिसकियां और राख में बदल चुके मड़इयों की लपटें…
शुक्रवार की सुबह नौगढ़ वन रेंज के चिरवाटांड़ (खदरा) गांव में ऐसा दर्दनाक मंजर सामने आया जिसने हर किसी को झकझोर दिया।
वनविभाग के अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान करीब ढाई दशक से बसी मुसहर बस्ती को उजाड़ दिया गया। आरोप है कि वनकर्मियों ने 8 मड़इयों को ध्वस्त किया और 4 मड़इयों में आग लगा दी।



???? “हमारे घर जला दिए… हमारी इज़्ज़त भी छीन ली” – पीड़िता परमशीला
परमशीला, जिनकी मड़ई धधकती लपटों में जल गई, रोते हुए कहती हैं –
???? “हम गरीब हैं… हमारी मड़ई उजाड़ दी, कपड़ा-लत्ता, अनाज सब जला दिया। विरोध करने पर मुझे लाठी से मारा गया, गालियां दी गईं। अब हम बच्चों को लेकर कहां जाएं?”
उनकी आंखों से बहते आंसू सिर्फ उनके दर्द का नहीं, बल्कि पूरे मुसहर समाज के अपमान का प्रतीक हैं।

???????????????? आक्रोशित ग्रामीणों का धरना – “जिंदा रहेंगे तो कहां रहेंगे?”
कार्रवाई से गुस्साए ग्रामीण महिलाएं, पुरुष और मासूम बच्चे उपजिलाधिकारी आवास का घेराव करने पहुंच गए।
घंटों तक सड़क पर बैठे ग्रामीण रोते-चिल्लाते रहे –
???? “जिंदा रहेंगे तो कहां रहेंगे? जंगल से भी भगा दिया, अब गांव में भी जगह नहीं देंगे?”
धरने में शामिल रंजीत, कन्हैया, सोमारू, रामप्यारे और अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वन विभाग ने गरीबों की बस्ती को बिना नोटिस, बिना पुनर्वास सीधे आग के हवाले कर दिया।

⚖️ राजनीतिक हस्तक्षेप – विधायक ने की जिलाधिकारी से शिकायत
घटना की सूचना मिलते ही क्षेत्रीय विधायक कैलाश खरवार ने जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग को फोन पर स्थिति से अवगत कराया।
डीएम के निर्देश पर एडीएम जे. रतन बर्मा मौके पर पहुंचे और आक्रोशित लोगों को शांत कराया।
उन्होंने आश्वासन दिया –
???? “दोषियों पर मुकदमा दर्ज होगा, और प्रभावित परिवारों को आवासीय पट्टा दिलवाया जाएगा।”


???? “आवासीय पट्टा मिलेगा” – उपजिलाधिकारी का वादा
उपजिलाधिकारी विकास मित्तल ने कहा कि बस्ती के लोगों की सूची बनाकर उन्हें आवासीय पट्टा दिया जाएगा ताकि उन्हें बार-बार उजाड़ा न जाए।
साथ ही, क्षेत्रीय वन अधिकारी जयमोहनी मकसूद हुसैन को निर्देशित किया गया कि पीड़ित परिवारों को दो दिनों तक भोजन (लंच पैकेट) उपलब्ध कराया जाए।
???? भाजपा मंडल अध्यक्ष का आरोप – “वनभूमि पर तो खुद वनकर्मी काबिज हैं”
भाजपा मंडल अध्यक्ष भगवानदास अग्रहरि और सामाजिक कार्यकर्ता अश्विनी पांडेय ने खुलासा किया कि –
???? “वनभूमि पर अवैध कब्जा सिर्फ गरीबों ने नहीं किया है, बल्कि कई वनकर्मी भी आरक्षित भूमि पर खेती और मकान बनाकर रह रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष ग्राम पंचायत बाघी में मुसहर जाति के गरीबों को बेहद कम संख्या में पट्टा मिला था। चिरवाटांड़ में इस गलती की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।
???? “हमारी फसल रौंद दी गई” – किसानों का दर्द
सिर्फ मड़ई ही नहीं, बल्कि फसल भी बर्बाद कर दी गई।
वन विभाग की कार्रवाई में लगभग
- ????️ एक विस्सा जमीन पर बोया गया मिर्च का पौधा जल गया।
- ???? पांच बिस्सा जमीन में बोया गया मक्का, मूंगफली और सब्जियां लाठी-डंडों से रौंदकर नष्ट कर दी गईं।
???? ग्रामीणों का कहना है – “गरीबी में जैसे-तैसे खेती करके बच्चों का पेट पालते थे, लेकिन वनकर्मियों ने उसे भी खत्म कर दिया।”

???? वन विभाग का पक्ष – “2001 में लगाए गए पौधे काट दिए थे”
वन विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई नोटिस और चेतावनी देने के बाद की गई है।
???? “वर्ष 2001 में आरक्षित भूमि पर पौधरोपण हुआ था। उसे काटकर बस्ती बसाई गई। कई बार हटने की चेतावनी दी गई, लेकिन लोग हटे नहीं, इसलिए मजबूरी में कार्रवाई करनी पड़ी।”
टीम में वन दरोगा गुरुदेव सिंह, राजकुमार, प्रशांत कुमार, सावित्री, बबुंदर, मट्टर समेत दर्जनों कर्मचारी शामिल रहे।
उप प्रभागीय वनाधिकारी वरुण प्रताप सिंह और प्रभारी निरीक्षक सुरेंद्र कुमार यादव भी मौके पर मौजूद थे।
???? धरना स्थल का दृश्य – “रोते बच्चे, टूटे सपने”
जब खबरी न्यूज़ की टीम ने उपजिलाधिकारी आवास के सामने बैठे लोगों को देखा तो वहां का दृश्य दिल दहला देने वाला था।
- औरतें फूट-फूटकर रो रही थीं।
- बच्चे भूख से बिलख रहे थे।
- बूढ़े ग्रामीण राख में तब्दील हो चुके घरों की याद में चुपचाप बैठे थे।
यह सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह गरीबों के सपनों का विध्वंस था।
???? प्रशासन के लिए सवाल – “क्यों सिर्फ गरीबों पर डंडा?”
- क्या वास्तव में सिर्फ मुसहर बस्ती ही वनभूमि पर कब्जा किए थी?
- क्यों उन प्रभावशाली लोगों के मकानों पर बुलडोजर नहीं चला जो वर्षों से जंगल की जमीन पर होटल, खेत और मकान बना बैठे हैं?
- क्या प्रशासन गरीब की झोपड़ी पर ही सख्त और अमीर की कोठी पर नरम है?
???? जनभावना – “यह अन्याय है, हमें इंसाफ चाहिए”
धरने में मौजूद कलावती नामक महिला चीखते हुए बोली –
???? “हमसे सब छीन लिया, अब मर जाएंगे लेकिन जंगल छोड़कर नहीं जाएंगे।”
उनकी आवाज में डर कम, लेकिन विद्रोह की ललकार ज्यादा थी।
भीड़ से बार-बार यही आवाज गूंज रही थी –
???? “हमें पट्टा दो, वरना हमें जीने का हक दो।”
✍️ निष्कर्ष – संघर्ष अभी बाकी है…
नौगढ़ की इस घटना ने यह साबित कर दिया कि गरीब की झोपड़ी पर हमेशा सबसे पहले डंडा चलता है।
वन विभाग अपनी कार्रवाई को सही ठहराता है, लेकिन सवाल ये है कि –
???? “क्या कानून सिर्फ गरीबों पर लागू होता है?”
खबरी न्यूज़ की यह विशेष रिपोर्ट प्रशासन और समाज दोनों से सवाल करती है कि –
क्या इन गरीब मुसहर परिवारों का कोई भविष्य होगा, या ये हमेशा उजड़ते ही रहेंगे?
???? खबरी न्यूज़ अपील करता है कि –
- पीड़ित परिवारों को तुरंत मुआवज़ा दिया जाए।
- आवासीय पट्टे का आवंटन जल्द से जल्द हो।
- कार्रवाई में शामिल दोषी वनकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
???? ✍️ रिपोर्टर टीम:
खबरी न्यूज़ ब्यूरो, नौगढ़-चकिया
संपादक-इन-चीफ: के.सी. श्रीवास्तव (अधिवक्ता)






















