खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चंदौली | शनिवार का दिन… कलेक्ट्रेट परिसर में रोज़ की तरह धीमी रफ्तार, फाइलों का ढेर, और “कल देखेंगे” वाली मानसिकता हावी थी। लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि आज का दिन प्रशासनिक इतिहास में एक बड़ा मोड़ लेकर आएगा।
जैसे ही मंडलायुक्त एस. राजलिंगम की गाड़ी कलेक्ट्रेट गेट के अंदर दाखिल हुई, पूरे सिस्टम में हलचल मच गई। कुर्सियां सीधी होने लगीं, फाइलें तेजी से पलटने लगीं, और कर्मचारियों के चेहरों पर साफ घबराहट दिखने लगी।
यह कोई सामान्य दौरा नहीं था…
यह था “सिस्टम का रियलिटी चेक” — औचक निरीक्षण!


जब खुलीं फाइलें… तो सामने आई लापरवाही की असली तस्वीर
मंडलायुक्त ने बिना किसी औपचारिकता के सीधे विभिन्न अनुभागों का निरीक्षण शुरू किया।
अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) न्यायालय, नजारत अनुभाग, अभिलेखागार और भूलेख पटल — हर जगह एक ही सवाल था:
“काम हुआ या सिर्फ दिखावा?”
👉 नजारत अनुभाग में जो सामने आया, वह चौंकाने वाला था—
- जीपीएफ पासबुक महीनों से अपडेट नहीं
- 2024 के बाद सेवा सत्यापन पूरी तरह ठप
यह सिर्फ एक तकनीकी कमी नहीं, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य से खिलवाड़ है। जिस पासबुक से उनकी जिंदगी की बचत जुड़ी है, वह ही अधूरी पड़ी हो—तो सिस्टम पर भरोसा कैसे बने?
मंडलायुक्त का गुस्सा यहीं फूट पड़ा।
उन्होंने साफ कहा—
“इतनी बड़ी लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी!”
“अब जवाब देना होगा” — अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई
निरीक्षण के दौरान मिली खामियों पर मंडलायुक्त ने तुरंत एक्शन लिया—
- उप जिलाधिकारी/प्रभारी अधिकारी कलेक्ट्रेट (OC) से स्पष्टीकरण तलब
- नजीर आशीष सिंह को प्रतिकूल प्रविष्टि देने का आदेश
यह कार्रवाई सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम को चेतावनी है—
अब लापरवाही की कीमत चुकानी पड़ेगी।
अभिलेखागार और भूलेख विभाग — जहां जनता सबसे ज्यादा परेशान
जब टीम अभिलेखागार और भूलेख अनुभाग पहुंची, तो वहां की स्थिति और भी चिंताजनक मिली।
👉 नक्शा और नकल वितरण में भारी अनियमितता
👉 आवेदनकर्ताओं का नाम और मोबाइल नंबर तक सही से दर्ज नहीं
👉 बस्ता सूची में आवश्यक प्रविष्टियों का अभाव
यानी, जो विभाग सीधे आम जनता से जुड़ा है, वहीं सबसे ज्यादा अव्यवस्था फैली हुई थी।
सोचिए…
एक किसान, एक गरीब नागरिक, या जमीन से जुड़ा कोई मामला—
जब वह कलेक्ट्रेट आता होगा, तो उसे कितनी परेशानियों का सामना करना पड़ता होगा?
मंडलायुक्त ने सख्त निर्देश दिए—
✔️ हर आवेदन का समयबद्ध निस्तारण हो
✔️ पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता लाई जाए
✔️ हर आवेदक का डेटा रजिस्टर में अनिवार्य रूप से दर्ज हो

“बस्ता सूची गायब, सत्यापन ठप” — सिस्टम की जड़ता उजागर
निरीक्षण में यह भी सामने आया कि—
- बस्ता सूची में कोई उल्लेख नहीं
- भूलेख पासबुक का सत्यापन 2024 के बाद से नहीं हुआ
यह केवल प्रशासनिक कमी नहीं…
यह “जिम्मेदारी से भागने” का सबसे बड़ा उदाहरण है।
क्योंकि जब रिकॉर्ड ही अपडेट नहीं होंगे, तो न तो पारदर्शिता होगी, न ही जवाबदेही।
🧾 सेवा पुस्तिकाएं और रिटायर कर्मचारियों का मुद्दा भी उठा
मंडलायुक्त ने केवल वर्तमान कार्यप्रणाली ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों के भविष्य से जुड़े मामलों को भी गंभीरता से लिया।
उन्होंने अधिकारियों से पूछा—
- सेवा पुस्तिकाएं सही से अपडेट हैं या नहीं?
- सेवानिवृत्त कर्मचारियों को समय पर लाभ मिल रहा है या नहीं?
यह सवाल इसलिए अहम है क्योंकि सरकारी सेवा में काम करने वाला हर कर्मचारी अपनी रिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लाभों पर निर्भर करता है।
अगर वहीं गड़बड़ी हो, तो यह सीधा अन्याय है।
“अब हर दिन होगा निरीक्षण” — सख्त निर्देश जारी
मंडलायुक्त ने प्रभारी अधिकारी कलेक्ट्रेट (OC) को साफ निर्देश दिए—
👉 रोस्टर के अनुसार नियमित निरीक्षण अनिवार्य किया जाए
👉 हर विभाग की जवाबदेही तय हो
👉 जनता की शिकायतों का प्राथमिकता और समयबद्ध समाधान हो
उनका स्पष्ट संदेश था—
“अब फाइलों में नहीं, जमीन पर काम दिखना चाहिए!”
बड़े अधिकारी भी रहे मौजूद — लेकिन सवाल सिस्टम पर
इस दौरान जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग,
मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत साईं,
अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) रतन वर्मा,
एसडीएम विजय कुमार और दिव्या ओझा सहित कई अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।
लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है—
जब इतने अधिकारी मौजूद हैं, तो फिर यह लापरवाही क्यों?

खबरी न्यूज का विश्लेषण — “डर नहीं, जिम्मेदारी चाहिए”
यह औचक निरीक्षण सिर्फ एक प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि
“सिस्टम के आईने में झांकने का मौका” था।
खबरी न्यूज का साफ मानना है—
👉 जब तक डर के बजाय जिम्मेदारी की भावना नहीं आएगी,
👉 जब तक फाइलों से ज्यादा जनता की तकलीफ नहीं समझी जाएगी,
👉 तब तक ऐसे निरीक्षण सिर्फ खबर बनकर रह जाएंगे।
📢 जनता की आवाज — “अब बदलाव चाहिए, सिर्फ चेतावनी नहीं”
चंदौली की जनता अब सवाल पूछ रही है—
- क्या यह सख्ती स्थायी बदलाव लाएगी?
- क्या अब कलेक्ट्रेट में काम समय पर होगा?
- क्या आम आदमी को राहत मिलेगी?
या फिर…
कुछ दिनों बाद सब कुछ फिर से पुराने ढर्रे पर लौट जाएगा?
✍️ अंतिम शब्द — “यह शुरुआत है, अंजाम बाकी है…”
मंडलायुक्त एस. राजलिंगम का यह कदम निश्चित रूप से सराहनीय है।
लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है—
क्या अधिकारी इस चेतावनी को गंभीरता से लेंगे या नहीं?
क्योंकि—
👉 सिस्टम तभी बदलेगा जब नीयत बदलेगी
👉 काम तभी सुधरेगा जब जवाबदेही तय होगी
खबरी न्यूज लगातार इस मुद्दे पर नजर बनाए रखेगा…
क्योंकि यह सिर्फ खबर नहीं, जनता के हक की लड़ाई है!
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