✍️ Khabari News | संपादन प्रभारी: के.सी. श्रीवास्तव (एडवोकेट)
चकिया, चंदौली —
जिस माँ काली की छाया में हर भक्त अपने दुःख-दर्द से मुक्ति की राह ढूंढता है, उसी माँ के दरबार में आज खुद अंधकार पसरा है। बात एक बल्ब की नहीं है, बात एक लाइट की नहीं है… बात उस “आस्था के उजाले” की है, जिसे एक समय सांसद जी ने खुद अपने हाथों से जलाने की कसम खाई थी।
“हाईमास्ट लाइट“, जिसे सांसद निधि से लगवाया गया था, एक प्रतीक थी विकास की, सुरक्षा की, और उस भरोसे की, जिसे जनता ने एक प्रतिनिधि के ऊपर रखा। लेकिन दुर्भाग्य देखिए—माँ काली के मंदिर परिसर में लगी यह हाईमास्ट लाइट बीते एक सप्ताह से ठप पड़ी है, और न सांसद जी को सुध है, न उनके प्रतिनिधियों को।

????️ एक दीप जो जल ना सका…
चकिया की जनता जानती है कि इस हाईमास्ट लाइट को लगवाने के पीछे सांसद छोटेलाल खरवार जी की पहल थी। लेकिन शिलापट्ट के इतिहास से ही इसकी नियति जैसे तय हो गई थी—जिस दिन पट्टिका लगी, दूसरे ही दिन ज़मीन पर गिर पड़ी। यह संयोग था या संकेत?
शायद माँ काली ही समझ रही थीं कि “ये विकास दिखावे का होगा, टिकाऊ नहीं…”




???? हाईमास्ट नहीं, शो-पीस बन गई है
एक ऐसा ढांचा, जो सांसद निधि से लगवाया गया था, आज खामोशी से आकाश की ओर ताकता है। उस ऊँचाई से न प्रकाश टपकता है, न ही उम्मीद। क्या तकनीकी खराबी है? कौन देखेगा इसकी मरम्मत? क्या यह जिम्मेदारी सिर्फ PWD या नगर पंचायत की है?
सवाल सीधा सांसद जी से है—
आपके नाम पर जो लाइटें जलती थीं, क्या उनका बुझना आपको नहीं दिखता?
⚠️ जनता के बीच अब सवाल… जवाब कौन देगा?
चकिया के लोगों के बीच यह चर्चा अब आम है—

“जब लाइट जल रही थी तो सांसद जी फोटो खिंचवा रहे थे,
अब जब लाइट बुझी है तो सब अंधेरे में गुम क्यों हैं?”
जो कार्यकर्ता दिन-रात ‘सांसद जी आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं’ की आवाज़ लगाते हैं, वे अब इस लाइट को देखकर चुप क्यों हैं? क्या जनता की आँखों में धूल झोंकना ही अब राजनीति बन गया है?
???? माँ काली की शरण में अंधेरा नहीं होना चाहिए
यह सिर्फ बिजली की बात नहीं है, यह श्रद्धा की बेइज्जती है।
माँ काली के मंदिर में एक सप्ताह से अंधेरा पसरा है और जो लोग ‘काली कृपा’ से चुनाव जीत कर संसद पहुँच गए, वे अब उसी माँ के दरबार की रोशनी बुझने पर खामोश हैं।

“काली माई देख रही हैं, बेटा। जनता भले चुप हो, माई चुप नहीं हैं…”
???? क्या सांसद के लोग सूचना नहीं देते, या खुद सांसद ही इग्नोर कर रहे हैं?
आमजन का मानना है कि या तो सांसद के इर्द-गिर्द रहने वाले लोग सच छुपाते हैं, या फिर सांसद जी खुद अब “अनदेखा” करने लगे हैं।
कई स्थानों पर सांसद निधि से लगाए गए हाईमास्ट लाइटें “बंद पड़ी हैं” — लेकिन मरम्मत के नाम पर न कोई अफसर आता है, न कोई ठेकेदार।
???? यह उदासीनता नहीं, जन-विश्वास से गद्दारी है
जब एक सांसद द्वारा लगवाया गया विकास कार्य एक सप्ताह से ठप हो,
जब कोई न तो देखने आए, न पूछे—
तो जनता का दिल टूटता है।
“यह सिर्फ एक लाइट का बुझना नहीं है, सांसद जी… यह उस उम्मीद का बुझना है जो जनता ने आप पर लगाई थी।”
???? Khabari News की ओर से माँ काली के दरबार से एक सीधी अपील…
“हे सांसद जी!
जब आपने माँ काली के मंदिर में हाईमास्ट लाइट लगवाई थी, तब आपने एक जिम्मेदारी ली थी।
अब जब वह बुझ गई है, तो यह आपकी ही नैतिक जिम्मेदारी है कि उसे फिर से जलवाएं।
यह सिर्फ रोशनी नहीं है, यह आपके और माँ के बीच का एक वादा है।
कृपया इसे निभाइए।”
???? जनता कह रही है:
“विकास सिर्फ शिलापट्ट से नहीं होता,
विकास तब होता है जब जनता को सच में फर्क महसूस हो।”
“सांसद जी, माँ काली के दरबार में ये अंधेरा क्यों? हाईमास्ट लाइट बुझी है… पर क्या आपकी संवेदना भी?”
(Khabari News | Ground Report) के साथ सरदार गौतम सिंह ‚ त्रिनाथ पांडेय‚सुधाशु जायसवाल




















