
Spécial Investigation Report – Khabari News | एक रिपोर्ट जो यूपी की राजनीति में नई हलचल पैदा कर देगी
11 दिसंबर की रात जो बदलेगी यूपी की मतदाता तस्वीर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में इस समय एक ऐसा महाअभियान चल रहा है, जिसकी हल्की-सी लहर भी भरपूर भूचाल पैदा करने की क्षमता रखती है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) 2025—यह सिर्फ एक सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि यूपी की मतदाता राजनीति के डीएनए को बदल देने वाला पल है।
क्योंकि इस बार मामला मामूली नहीं…
तीन करोड़ से ज्यादा वोट कटने की संभावना
और कई जिलों में 25–30% तक वोट हट सकते हैं।
इस रिपोर्ट को तैयार करते समय हमारी टीम को लगातार ज़मीनी इनपुट, प्रशासनिक स्रोतों और राजनीतिक गलियारों से मिल रही जानकारियों ने एक ही तरफ इशारा किया—
यह सिर्फ वोट कटने का मामला नहीं, बल्कि जनता की पहचान, अधिकार और लोकतंत्र की मजबूती-कमजोरी की कहानी भी है।

लखनऊ–गाजियाबाद सबसे ज्यादा ‘हिट’—25 से 30% तक नाम हटने की संभावना!
किसी को पता भी नहीं चलेगा और आपका नाम लिस्ट से गायब हो सकता है
उत्तर प्रदेश के जिन जिलों से सबसे ज्यादा हड़कंप मचाने वाली रिपोर्ट आई है, उनमें सबसे ऊपर हैं—
- लखनऊ
- गाजियाबाद
SIR से जुड़े अफसरों के अनुसार इन दोनों जिलों में 25–30% नाम ASD श्रेणी (Absent/Shifted/Dead) में आ सकते हैं।
पूरा प्रदेश जहां औसतन 18–20% पर खड़ा है, वहीं ये दोनों जिले मतदाता कटौती की सुनामी का केंद्र नजर आ रहे हैं।
सवाल है—
क्या यह केवल डेटा है, या यूपी में कुछ बड़ा बदलने वाला है?
आज़मगढ़, एटा और औरैया—इन जिलों ने SIR का काम पूरा कर दिया, रिपोर्ट चौंकाने वाली!
एटा में 18% वोटर ASD की श्रेणी में—कौन हैं ये लोग? कहां गए ये वोटर?
एटा में SIR का काम 100% पूरा हो गया।
आंकड़े बेहद गहरे संकेत दे रहे हैं—
- कुल मतदाता: 13,11,967
- ASD में पाए गए: 18%
- स्थानांतरित: 7.9%
- अनुपस्थित: 5.7%
- मृतक: 2.49%
- कहीं और दर्ज: 1.023%
यानी ये वोटर सिर्फ नाम नहीं थे…
ये किसी के परिवार की उम्मीद, किसी के मोहल्ले की आवाज़, किसी राजनैतिक दल की ताकत और किसी प्रत्याशी की रणनीति थे।
11 दिसंबर की रात के बाद ये नाम आधिकारिक तौर पर सूची से हटाए जाएंगे।
और यही फैसला यूपी में राजनीतिक गणित बदल सकता है।
पूरा यूपी—6% अनुपस्थित, 10% शिफ्टेड, 4% मृतक—मतलब कुल 20% वोटर सूची से बाहर?
20% वोटर… यह संख्या नहीं, यह लोकतंत्र की दिशा बदलने वाली शक्ति है
SIR अधिकारियों के अनुसार अभी तक की स्थिति:
- 6%—अनुपस्थित
- 10%—शिफ्टेड
- 4%—मृतक
यानी कुल 20% लोग ऐसी श्रेणी में जहां से नाम कटना लगभग तय है।
प्रश्न यह नहीं कि ये लोग कौन हैं।
प्रश्न यह है—
क्या ये लोग वास्तव में सूची से हटने लायक हैं, या किसी गलती की वजह से मिट जाएंगे?
सहारनपुर से सीएम योगी का कड़ा संदेश: “एक भी गलत वोट नहीं बनेगा”
विपक्ष ने उठाया सवाल—क्या बड़े पैमाने पर वोट कटेगा? सरकार का जवाब—“भ्रम न फैलाएं”
सहारनपुर सर्किट हाउस में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पार्टी पदाधिकारियों के साथ 40 मिनट की विशेष बैठक की।
बैठक का सबसे बड़ा संदेश—
“SIR अभियान में एक भी गलत वोट न बने और जनता को विपक्ष द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम से बचाएं।”
मुख्यमंत्री ने साफ कहा—
- विपक्ष वोट कटने को लेकर भ्रम फैला रहा है
- जनप्रतिनिधि जनता के बीच जाकर यह गलतफहमी दूर करें
- SIR फॉर्म भरवाने में जनता की मदद करें
- गलत पंजीकरण रोका जाए
लेकिन सवाल वही—
अगर तीन करोड़ नाम कटे तो क्या इसे सिर्फ ‘भ्रम’ कहकर टाला जा सकता है?
13 साल के बच्चे से लेकर 80 साल के बुजुर्ग तक—क्या आपके परिवार का कोई नाम भी सूची से गायब हो सकता है?
SIR 2025 सिर्फ आंकड़े नहीं, हर परिवार का भविष्य बदलने वाला कदम
मतदाता सूची केवल चुनाव नहीं तय करती—
वह तय करती है कौन बोल पाएगा और किसकी आवाज़ चुपचाप मिटा दी जाएगी।
ग्रामीण इलाकों में जहां लोग एक-एक वोट को इज्जत समझते हैं,
शहरी इलाकों में जहां युवा वोट को अधिकार की तरह रखते हैं,
महिलाएं जिन्हें वोट देना अपनी सहभागिता मानती हैं—
उन सभी पर SIR का सीधा प्रभाव पड़ने वाला है।
क्या SIR लोकतंत्र को मजबूत करेगा या लोगों को असहज? जनता के मन में उठ रहे बड़े सवाल
- क्या इतनी बड़ी संख्या में लोगों के हटने का मतलब यह है कि मतदाता सूची पहले गलत थी?
- क्या इतने स्थानांतरित लोग वास्तव में दूसरे जिलों में वोटर बन चुके हैं?
- मृतकों की संख्या इतनी ज्यादा कैसे?
- क्या यह डेटा-ड्रिवन साफ़-सफाई है या बड़े बदलाव की तैयारी?
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है—
यूपी में मतदाता सूची को इस बार पूरी तरह रीसेट किया जा रहा है।
यह चुनावी समीकऱण को पूरी तरह रीडिजाइन कर देगा।

ग्राउंड रिपोर्ट: मोहल्लों की गलियों से लेकर सचिवालय तक—हर जगह एक ही चर्चा “नाम कट रहा है?”
खबरी न्यूज वेव पोर्टल की टीम विभिन्न जिलों में घूमकर जिस माहौल को महसूस कर रही है, वह बेहद संवेदनशील है।
- कहीं बुजुर्ग परेशान हैं कि उनका नाम हट न जाए
- कहीं युवा पूछ रहे हैं कि क्या उन्हें रिजिस्टरेशन दुबारा करना पड़ेगा
- कहीं महिलाओं में डर है कि दस्तावेज़ सही न होने पर नाम हट जाएगा
- कई प्रवासी परिवारों को शक है कि उनके नाम गायब हो जाएंगे
मतलब—
SIR 2025 यूपी के हर गांव, हर वार्ड, हर घर की चर्चा बन गया है।
कटने वाले वोट और बदलने वाली राजनीति—यूपी में ‘नए समीकरण’ की आहट
तीन करोड़ वोट कटेंगे—
यह कोई साधारण खबर नहीं।
यही वोट—
- किसी पार्टी की जीत
- किसी प्रत्याशी की हार
- किसी बूथ का समीकरण
- किसी जिले का राजनीतिक मूड
सब कुछ बदल सकते हैं।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि
SIR की वजह से 2026 और 2027 के चुनावों का पूरा बैलेंस बदल सकता है।
हेडलाइन सबहेडिंग 9:
क्या करें? जनता के लिए खबरी न्यूज वेव पोर्टल की 5 जरूरी सलाह
- SIR फॉर्म 11 दिसंबर तक भरें—यह अंतिम मौका है
- अपने दस्तावेज़ चेक करें—पहचान पत्र, पता प्रमाण
- परिवार के सभी सदस्यों का नाम मतदाता सूची में 확인 करें
- शिफ्ट हो गए हैं तो नई जगह वोट ट्रांसफर कराएं
- किसी भी गलतफहमी में न रहें—नाम कटता है तो चुनाव में हक भी खत्म हो जाता है
High Impact Ending
यूपी की मतदाता लिस्ट इतिहास की सबसे बड़ी सर्जरी से गुजर रही है—और इसके परिणाम आने वाले समय की राजनीति तय करेंगे
तीन करोड़ से ज्यादा नाम… यह केवल डेटा नहीं, यह लोकतंत्र की नब्ज है, जिसकी धड़कनें अब तेज हो चुकी हैं
11 दिसंबर के बाद उत्तर प्रदेश बदला हुआ दिखेगा—
मतदाता सूची भी,
मतदाता अधिकार भी
और राजनीतिक समीकरण भी।
अब यह तय करना जनता के हाथ में है कि—
आप अपना नाम बचा पाएंगे या मतदाता सूची में आपकी पहचान मिट जाएगी।
यह सिर्फ एक सरकारी अपडेट नहीं…
यह एक चेतावनी है,
एक जनजागरूकता मुहिम है
और एक आने वाले परिवर्तन का संकेत है।


