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“धरती, धरोहर और दर्शन: चंदौली के जलप्रपातों से निकले विकास के स्वप्न, जब D.M. खुद बने पर्यटक!”


राजदारी, मुसाखाड़, लतीफशाह और चंद्रप्रभा बांध की वादियों में जब पहुँचे डीएम चंद्र मोहन गर्ग – जमीन पर उतरी प्रशासनिक ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और पर्यटन के समन्वय की नई पहल


खबरी न्यूज़ नेशनल नेटवर्क चंदौली।

14 मई 2025, सुबह की धूप में कुछ अलग बात थी। चंदौली की पहाड़ियों में गूंजते झरनों की आवाज़ें, गेस्ट हाउस की दीवारों पर समय की थकी परछाइयाँ, और बांधों में जमा उम्मीदों की झीलें आज अचानक सतर्क हो गईं। कारण था – जनपद चंदौली के जिलाधिकारी चंद्र मोहन गर्ग और मुख्य विकास अधिकारी आर. जगत सांई का पर्यटक बनकर चंदौली के छिपे हुए खजानों का स्थलीय निरीक्षण।

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ये कोई औपचारिक यात्रा नहीं थी, यह था भविष्य को “Feel” करने का प्रयास। और यही बन गया चंदौली पर्यटन विकास का टर्निंग पॉइंट

चंद्रप्रभा डैम – जहां रिसाव में दिखी विकास की दरार


चंद्रप्रभा डैम, जो अब तक किसानों के लिए पानी का स्रोत था, अब पर्यटकों के लिए भी उम्मीद का केंद्र बनता जा रहा है।
यहाँ निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने देखा कि मरम्मत कार्य जारी है लेकिन गति की कमी है। उन्होंने तुरंत अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए – “Coordination बेहतर करो, Time कम करो, Result दो!”

बात सिर्फ डैम की नहीं थी, बात थी प्रशासन की उस सोच की जो अब सिर्फ कागज़ों में नहीं, “मिट्टी पर चलती है, पानी में बहती है और हवा में उड़ती है।”

राजदरी – जहां गेस्ट हाउस में मिली धूल, लेकिन झरनों में बसी उम्मीद


राजदारी के गेस्ट हाउस का निरीक्षण हुआ, और वहां दिखी बदहाली। कमरों में गंदगी, टूटी टाइलें और बिना इंतजाम के बने कमरे – यह देखकर जिलाधिकारी नाराज़ हुए।

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लेकिन उन्होंने सिर्फ नाराजगी नहीं दिखाई, उन्होंने समाधान भी दिया –
“गेस्ट हाउस सिर्फ दीवार नहीं, यह पर्यटक की पहली छाप है। इसे साफ, सुंदर और सेवाभावी बनाओ। पर्यटन वहीं टिकता है जहाँ स्वागत सच्चा होता है।”

वन अधिकारियों को तुरंत निर्देश मिले – स्वच्छता, भोजन व्यवस्था और स्टाफ़ की सक्रियता पर विशेष ध्यान।

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मुसाखाड़ बांध – पानी है, पर बिजली नहीं!


मुसाखाड़ के निरीक्षण में बांध की स्थिति संतोषजनक मिली, लेकिन विद्युत आपूर्ति की कमी अब भी समस्या बनी हुई है।
अधिशासी अभियंता ने बताया कि बाकी सब दुरुस्त है, बस बिजली की व्यवस्था नहीं हो पाई है।

इस पर जिलाधिकारी का जवाब था उम्मीद से भरा –
“या तो बिजली कनेक्शन देंगे, या सोलर पैनल लगाएँगे। लेकिन अब यहां अंधेरा नहीं रहेगा।”

यह एक प्रशासनिक घोषणा नहीं थी, यह उस किसान, पर्यटक और गाँव के भविष्य के लिए वादा था।

लतीफशाह बांध और मजार – आस्था और पर्यटन का अद्भुत संगम


चकिया क्षेत्र के लतीफशाह बांध और मजार का दौरा तब एक भावनात्मक यात्रा बन गई जब जिलाधिकारी ने श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखा।

यह कोई सामान्य स्थान नहीं, यह “Spirit and Soil” का मिलन है – जहां जल से सिंचाई होती है, और मजार से आत्मा को शांति।

डीएम ने साफ कहा –
“धार्मिक पर्यटन को भी संरचित किया जाए। लतीफशाह बाबा की मजार और बांध को एक साथ एक पर्यटन सर्किट में जोड़ा जाए।”

सीडीओ आर. जगत सांई को जिम्मेदारी दी गई – स्थानीय अधिकारियों से चर्चा कर योजना तैयार करें, ताकि इस क्षेत्र की आत्मा को पहचान मिल सके।

सोशल मीडिया का संदेश – जब अफसरों की यात्राएं बनें जन-संवाद

  • इस निरीक्षण का असली रंग तब उभरा जब इसकी तस्वीरें और बातें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं।
    लोगों ने लिखा:
  • “ऐसा डीएम पहले कभी नहीं देखा, जो खुद जमीन पर चलकर निरीक्षण करता हो।”
  • “अब लग रहा है चंदौली भी बन सकता है छोटा सा ‘हिमाचल’।”
  • “सर, पर्यटन की ताक़त आपने हमें दिखाई।”
    यह पोस्ट प्रशासनिक क्रियाशीलता का नहीं, “पब्लिक ट्रस्ट” का प्रमाण पत्र बन गई।
    रणनीति और सुझाव – आने वाला कल

जिलाधिकारी ने मौके पर ही अधिकारियों से कहा:

चंद्रप्रभा क्षेत्र में ट्रैकिंग रूट्स विकसित किए जाएं

गेस्ट हाउस को पीपीपी मॉडल पर निजी सहयोग से सुधारा जाए

लतीफशाह और राजदारी को एक Eco-Religious Circuit के रूप में विकसित किया जाए

जल प्रबंधन के साथ साथ e-टिकटिंग सिस्टम और गाइड्स की ट्रेनिंग की भी व्यवस्था हो

इन सबके पीछे सोच साफ थी – “पर्यटन सिर्फ फोटो नहीं, यह रोज़गार है, पहचान है, और जनपद का आर्थिक इंजन है।”

स्थानीय जनता की भागीदारी – असली चाबी


इस निरीक्षण का सबसे बड़ा पहलू यह रहा कि हर जगह स्थानीय नागरिकों से संवाद किया गया।
लोगों ने अपनी समस्याएं रखीं – पानी, शौचालय, सड़क, मोबाइल नेटवर्क आदि। और अफसरों ने सुना, लिखा और आश्वासन नहीं, कार्रवाई का भरोसा दिया।


अंतिम विचार: जब एक अफसर पर्यटक बन जाए, तब बदलती है धरती की किस्मत!

14 मई 2025 की यह यात्रा सिर्फ स्थलीय निरीक्षण नहीं थी। यह जनपद चंदौली की छवि बदलने की शुरुआत थी।
यह दिन हमें याद दिलाता है कि यदि अधिकारी “जमीनी हकीकत” को देखने निकलें, तो “पर्यटन स्थल सिर्फ तस्वीर नहीं, परिवर्तन की तस्वीर” बन जाते हैं।

अब वक्त है कि हम भी जुड़ें – अपने क्षेत्र, अपने पर्यावरण और अपने भविष्य से।
क्योंकि जब प्रशासन, प्रकृति और जनता एक साथ चलें, तभी बनता है सच्चा ‘पर्यटन विकास मॉडल’।

जब एक ज़िला प्रशासन नई ऊर्जा से काम करता है, और एक पत्रकारिता संस्थान ज़मीन की धड़कन को महसूस करता है – तब शुरू होता है विकास का असली युग।

खबरी न्यूज़ आपको जोड़ेगा हर उस कहानी से, जो बदलाव की ओर बढ़ती है।
क्योंकि हम सिर्फ खबर नहीं दिखाते, हम बदलाव का नक्शा बनाते हैं।

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