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सांसद छोटेलाल खरवार ने वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों के अधिकारों का मुद्दा उठाया : MP Chhotelal Kharavar

चकिया‚चन्दौली। सोनभद्र जिले के सांसद छोटेलाल खरवार ने लोकसभा में एक महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया। सांसद ने वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों और किसानों के पट्टे की प्रक्रिया में हो रही अनियमितताओं और दबंगों के अवैध कब्जे की ओर ध्यान आकर्षित किया। सांसद ने यह मुद्दा लोकसभा में एक जोरदार तरीके से उठाया और अधिकारियों की भ्रष्टाचार पर भी सवाल खड़े किए।

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MP Chhotelal Kharavar ने उठाया मुद्दा

सांसद छोटेलाल खरवार ने कहा कि “हमारे संसदीय क्षेत्र रॉबर्टसगंज, सोनभद्र और चकिया ब्लॉक में कई आदिवासी और किसान ऐसे हैं, जो वर्षों से अपनी पुश्तैनी जमीन पर कब्जा किए हुए हैं, लेकिन उन्हें वनाधिकार कानून के तहत अपना पट्टा नहीं मिल पा रहा है।” उन्होंने यह भी कहा कि “यह स्थिति पिछले कई दशकों से बनी हुई है, और अब वक्त आ गया है कि इस समस्या का समाधान किया जाए।”

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दबंगों और बाहरी लोगों का कब्जा

सांसद ने इस बात पर जोर दिया कि चकिया विधानसभा क्षेत्र में आदिवासियों और किसानों से उनकी जमीनें छीन ली जा रही हैं। यह जमीनें लगभग 50 वर्षों से सर्वे में बाहरी व्यक्तियों और दबंगों द्वारा अवैध रूप से अपने नाम करा ली गई हैं। उन्होंने कहा, “आदिवासी समाज की पुश्तैनी जमीनों पर बाहरी लोगों और दबंगों का कब्जा है, जो नियमों के खिलाफ और भ्रष्टाचार से भरा हुआ है। यह स्थिति ठीक नहीं है, और अब हमें इसे बदलने की आवश्यकता है।”

वनाधिकार कानून और उसके लाभ

वनाधिकार कानून, जो 2006 में लागू हुआ था, आदिवासियों और अन्य वनवासियों को उनके पारंपरिक अधिकारों की सुरक्षा प्रदान करता है। इस कानून के तहत, जो आदिवासी समुदाय अपनी पुश्तैनी भूमि पर वर्षों से रह रहे हैं, उन्हें उस जमीन पर मालिकाना अधिकार मिल सकता है। यह कानून उन समुदायों को वनाधिकारों के तहत भूमि पट्टे देने के उद्देश्य से बनाया गया था, जो पहले से ही जंगलों में निवास कर रहे थे।

सांसद ने लोकसभा में कहा कि इस कानून का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है, और यह कानून उन आदिवासियों के लिए वरदान साबित हो सकता था, जिनकी जमीनें आज बाहरी व्यक्तियों के कब्जे में हैं। उन्होंने यह भी कहा कि, “यह कानून सिर्फ एक कागज के टुकड़े की तरह रह गया है, और सही तरीके से लागू नहीं हो पा रहा है।”

अधिकारी कर रहे हैं मनमानी और भ्रष्टाचार

MP Chhotelal Kharavar ने आरोप लगाया कि वनाधिकार कानून के तहत पट्टों के वितरण में अधिकारियों द्वारा मनमानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने निजी स्वार्थ के लिए इस प्रक्रिया को जटिल बना रहे हैं, और इस प्रक्रिया में भ्रष्टाचार व्याप्त है। सांसद ने यह भी कहा कि “दिशा की बैठक में अधिकारी इस मुद्दे पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं, और इस प्रकार भ्रष्टाचार की स्थिति बनी हुई है। यह अत्यंत दुखद है कि आदिवासी समाज का अधिकार उनका ही छीन लिया जा रहा है।”

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बाहरी दबंगों का अवैध कब्जा

MP Chhotelal Kharavar ने कहा कि कई बाहरी व्यक्तियों और दबंगों ने आदिवासी क्षेत्रों की जमीनों पर कब्जा जमा लिया है। ये दबंग और बाहरी लोग पैसे की ताकत का उपयोग करके आदिवासियों की जमीनों पर कब्जा कर रहे हैं। इस प्रक्रिया में अधिकारियों का भी समर्थन प्राप्त है, जो अवैध तरीके से कब्जे को वैध करने की कोशिश कर रहे हैं।

सांसद ने कहा, “आदिवासियों की भूमि उनके लिए एक सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान है। इसे उनसे छीनना उनके अस्तित्व को नष्ट करने के समान है। अगर यह समस्या जल्द हल नहीं की जाती, तो आदिवासी समुदाय और कमजोर वर्ग के लोग और अधिक पिछड़े रह जाएंगे।”

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जमीनों का सर्वे और गलत तरीके से कब्जा

MP Chhotelal Kharavar ने यह भी कहा कि आदिवासियों की जमीनों का सर्वे किया गया, लेकिन इस सर्वे में अधिकारियों द्वारा कई गलतियाँ की गईं। कई बार जमीनें ऐसी हुईं, जिन्हें आदिवासियों के लिए विशेष रूप से आवंटित किया गया था, उन्हें अवैध रूप से बाहरी लोगों और दबंगों के नाम कर दिया गया। उन्होंने कहा कि “इन जमीनों को वापस आदिवासियों के नाम किया जाए, क्योंकि वे कई पीढ़ियों से इस पर काबिज हैं।”

सांसद ने यह भी कहा कि भूमि सर्वे के दौरान अधिकारियों ने कई बार आदिवासी समाज के खिलाफ मनमानी की है। “इन नियमों और सर्वे की प्रक्रियाओं में अव्यवस्था और भ्रष्टाचार ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह से निष्क्रिय बना दिया है। आदिवासियों को उनकी भूमि मिलनी चाहिए, और यह कोई सौदा नहीं है, बल्कि उनका बुनियादी अधिकार है।”

आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करना है प्राथमिकता

सांसद ने कहा कि “हमारी सरकार को आदिवासियों और दलितों के अधिकारों की रक्षा करने के लिए और कड़ी नीतियाँ बनानी चाहिए। वनाधिकार कानून के तहत उन आदिवासियों को उनके अधिकार मिलना चाहिए, जो अपनी जमीन पर सालों से काबिज हैं। यह कानून आदिवासी समाज के लिए एक बड़े बदलाव का कारण बन सकता है, लेकिन इसके लिए हमें इसमें सुधार करना होगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि “अगर इस कानून का सही तरीके से पालन किया जाता, तो यह आदिवासियों को उनका हक दे सकता था और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बना सकता था। इस दिशा में कई कदम उठाए जाने की आवश्यकता है, ताकि आदिवासी और दलित वर्ग के लोग समाज में सम्मानजनक जीवन जी सकें।”

समाधान की दिशा में कदम

सांसद ने सरकार से यह मांग की कि आदिवासियों को उनके कानूनी अधिकार मिले और उनके भूमि पट्टे को जल्द से जल्द जारी किया जाए। उन्होंने कहा, “अगर इस प्रक्रिया में कुछ ठोस कदम उठाए जाते हैं, तो आदिवासी समाज को उनका हक मिल सकता है। साथ ही, अधिकारियों द्वारा की जा रही अनियमितताओं पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे भ्रष्टाचार की पुनरावृत्ति न हो।”

सांसद ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की भी बात की और कहा कि “यह समस्या केवल मेरे क्षेत्र की नहीं है, बल्कि पूरे देश में आदिवासी और दलित वर्ग के लोग इसी तरह के उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं। सरकार को इस मुद्दे को गंभीरता से लेना चाहिए और ठोस कदम उठाने चाहिए।”

निष्कर्ष

सांसद छोटेलाल खरवार ने वनाधिकार कानून के तहत आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए एक मजबूत आवाज उठाई है। उनका यह कदम समाज के कमजोर वर्गों के लिए उम्मीद की किरण है। अगर सरकार इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करती है और इसे लागू करती है, तो यह न केवल आदिवासियों के अधिकारों की रक्षा करेगा, बल्कि समाज में समानता और न्याय की दिशा में भी एक बड़ा कदम साबित होगा।

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