दलित परिवारों के साथ जमीन पर बैठकर किया सामूहिक भोज, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर को दी श्रद्धांजलि, गोशाला में 1000 पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण का लिया संकल्प
खबरी न्यूज नेशनल नेटवर्क चकिया (चंदौली)।
चंदौली जनपद की चकिया तहसील अंतर्गत पुरानाडीह मुसहर बस्ती रविवार को सामाजिक समरसता, संवेदनशील प्रशासन और मानवीय मूल्यों का सशक्त उदाहरण बनकर उभरी। यहां आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में तहसीलदार देवेन्द्र कुमार ने प्रशासनिक जिम्मेदारियों से आगे बढ़ते हुए 95 मुसहर परिवारों को आवास का आवंटन किया। इतना ही नहीं, उन्होंने दलित एवं मुसहर समाज के लोगों के साथ जमीन पर बैठकर सामूहिक भोज किया, भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए तथा गोशाला परिसर में 1000 पौधों का रोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।

यह कार्यक्रम केवल सरकारी योजनाओं के वितरण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक समानता, संविधान के मूल्यों और मानवीय संवेदनाओं को व्यवहार में उतारने का जीवंत उदाहरण बन गया।

बाबा साहब अंबेडकर के विचारों को व्यवहार में उतारने का प्रयास
कार्यक्रम का शुभारंभ भारत रत्न बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुआ। तहसीलदार देवेन्द्र कुमार ने कहा कि बाबा साहब ने ऐसा भारत बनाने का सपना देखा था जहां किसी भी व्यक्ति के साथ जाति, वर्ग या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव न हो। संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार देता है और प्रशासन का दायित्व है कि उन अधिकारों को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाए।
उन्होंने कहा कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य समाज के कमजोर और वंचित वर्गों को सम्मानजनक जीवन उपलब्ध कराना है।
95 मुसहर परिवारों के चेहरे पर दिखी नई उम्मीद
कार्यक्रम के दौरान पुरानाडीह मुसहर बस्ती के 95 पात्र परिवारों को आवास आवंटन पत्र वितरित किए गए। वर्षों से कच्चे मकानों और कठिन परिस्थितियों में जीवन व्यतीत कर रहे परिवारों के लिए यह क्षण बेहद भावुक और यादगार रहा।

लाभार्थियों ने प्रशासन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि पक्का आवास केवल रहने की जगह नहीं, बल्कि उनके बच्चों के सुरक्षित भविष्य, सम्मान और बेहतर जीवन का आधार बनेगा। कई परिवारों की आंखों में खुशी के आंसू थे। लोगों ने कहा कि पहली बार उन्हें लगा कि शासन की योजनाएं वास्तव में उनके द्वार तक पहुंच रही हैं।
जब तहसीलदार ने दलित परिवारों के साथ बैठकर किया सामूहिक भोज
कार्यक्रम का सबसे चर्चित और प्रेरणादायी दृश्य तब सामने आया, जब तहसीलदार देवेन्द्र कुमार ने दलित एवं मुसहर समाज के लोगों के साथ बिना किसी भेदभाव के जमीन पर बैठकर सामूहिक भोज किया।

उनका यह कदम सामाजिक समरसता और समानता का जीवंत संदेश बन गया। उन्होंने कहा कि इंसान की पहचान उसकी जाति से नहीं, बल्कि उसके कर्म, व्यवहार और मानवता से होती है। समाज तभी आगे बढ़ेगा जब सभी लोग भेदभाव छोड़कर एक-दूसरे का सम्मान करेंगे।
उपस्थित ग्रामीणों ने इस पहल का जोरदार स्वागत किया। लोगों का कहना था कि इस प्रकार का व्यवहार समाज में फैली दूरियों को कम करने और आपसी विश्वास बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
गोशाला परिसर में 1000 पौधों का रोपण, पर्यावरण बचाने का लिया संकल्प
सामाजिक कार्यक्रम के साथ पर्यावरण संरक्षण को भी बराबर महत्व दिया गया। गोशाला परिसर में विभिन्न प्रजातियों के 1000 पौधों का रोपण किया गया।
तहसीलदार देवेन्द्र कुमार ने कहा कि वृक्ष केवल पर्यावरण की रक्षा नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के जीवन को भी सुरक्षित बनाते हैं। उन्होंने लोगों से अपील की कि प्रत्येक व्यक्ति कम से कम एक पौधा अवश्य लगाए और उसकी देखभाल भी करे।
उन्होंने कहा कि हरियाली बढ़ेगी तो जल संरक्षण, स्वच्छ वायु और बेहतर पर्यावरण का लाभ पूरे समाज को मिलेगा।
सामाजिक न्याय के साथ विकास का संदेश
कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि सरकार की मंशा है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास की हर योजना पहुंचे। मुसहर समाज जैसे वंचित समुदायों को आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी सुविधाओं से जोड़ना विकसित भारत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
तहसीलदार ने कहा कि प्रशासन केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में विश्वास, संवेदनशीलता और समानता का वातावरण तैयार करना भी उसकी जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों ने कहा—ऐसी पहल से बढ़ेगा प्रशासन पर विश्वास
कार्यक्रम में मौजूद ग्रामीणों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने तहसीलदार देवेन्द्र कुमार की इस पहल की मुक्त कंठ से सराहना की।
लोगों ने कहा कि जब कोई वरिष्ठ अधिकारी समाज के सबसे वंचित वर्ग के बीच पहुंचकर उनके साथ बैठता है, भोजन करता है और उनकी समस्याओं को समझता है, तो इससे प्रशासन और जनता के बीच विश्वास मजबूत होता है।
ग्रामीणों का कहना था कि ऐसे कार्यक्रम केवल योजनाओं का लाभ देने तक सीमित नहीं रहते, बल्कि सामाजिक दूरी कम करने और भाईचारे की भावना मजबूत करने का माध्यम भी बनते हैं।
पुरानाडीह मुसहर बस्ती बनी सामाजिक परिवर्तन की मिसाल
पुरानाडीह मुसहर बस्ती में आयोजित इस कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि सामाजिक परिवर्तन केवल भाषणों से नहीं, बल्कि व्यवहार और संवेदनशील नेतृत्व से आता है। आवास आवंटन, सामूहिक भोज, पौधारोपण और बाबा साहब के विचारों को सम्मान देने जैसे कदमों ने इस आयोजन को विशेष बना दिया।
स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि इसी प्रकार प्रशासन लगातार समाज के कमजोर वर्गों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं का समाधान करता रहा, तो सामाजिक न्याय और समावेशी विकास का लक्ष्य और अधिक मजबूती से हासिल किया जा सकेगा।
मुख्य आकर्षण
- पुरानाडीह मुसहर बस्ती में आयोजित विशेष कार्यक्रम।
- 95 मुसहर परिवारों को आवास आवंटन।
- बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा पर माल्यार्पण।
- दलित एवं मुसहर समाज के लोगों के साथ सामूहिक भोज।
- गोशाला परिसर में 1000 पौधों का रोपण।
- सामाजिक समरसता, समानता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश।
- प्रशासन के मानवीय और संवेदनशील स्वरूप की झलक।
खबरी का मंथन– समाज को जोड़ने वाली पहल बनी चर्चा का विषय
चकिया तहसील के पुरानाडीह मुसहर बस्ती में आयोजित यह कार्यक्रम केवल एक सरकारी आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक न्याय, समानता और मानवीय संवेदनाओं का प्रेरक उदाहरण बन गया। 95 मुसहर परिवारों को आवास आवंटित करना, दलित परिवारों के साथ सामूहिक भोज करना, बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के आदर्शों को व्यवहार में उतारना और 1000 पौधों का रोपण करना—इन सभी प्रयासों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि विकसित भारत का मार्ग सामाजिक समरसता, संवेदनशील प्रशासन और समान अवसरों से होकर गुजरता है।
चकिया की यह पहल अब पूरे जनपद में चर्चा का विषय है और यह विश्वास मजबूत करती है कि जब प्रशासन जनसेवा को अपना धर्म मानकर कार्य करता है, तब विकास की रोशनी समाज के अंतिम व्यक्ति तक भी पहुंचती है।






















